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बारिश में पैरों में फंगल इंफेक्शन क्यों होता है? जानिए कारण

Neelam Saini 2026-08-16 16:19:49
बारिश में पैरों में फंगल इंफेक्शन क्यों होता है? जानिए कारण

बारिश में पैरों में फंगल इंफेक्शन क्यों होता है? जानिए वजह

गीले जूते-मोजे बन सकते हैं पैरों के फंगल इंफेक्शन की वजह

 बारिश में पैरों की खुजली को नजरअंदाज न करें, जानिए कारण


बारिश में नमी और पसीने के कारण पैरों की त्वचा लंबे समय तक गीली रह सकती है, जिससे फंगस को बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल मिलता है। गीले जूते-मोजे और सार्वजनिक नम जगहें जोखिम बढ़ाती हैं। खुजली, सफेद पड़ती त्वचा, पपड़ी और दरारें इसके संकेत हो सकते हैं। साफ-सफाई बेहद जरूरी है।

LOCATION | DATE | BYLINE

नई दिल्ली | 16 अगस्त 2026 | नीलम सैनी

बारिश में पैरों में फंगल इंफेक्शन क्यों बढ़ता है?

मानसून के दौरान बारिश और बढ़ी हुई नमी सिर्फ मौसम को प्रभावित नहीं करती, बल्कि त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों का जोखिम भी बढ़ा सकती है। इनमें पैरों का फंगल इंफेक्शन, जिसे आम तौर पर एथलीट्स फुट कहा जाता है, एक आम समस्या है। गर्म और नम वातावरण फंगस के पनपने के लिए अनुकूल होता है, जबकि लगातार गीले या पसीने वाले पैर संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। खास तौर पर बारिश में भीगे जूते-मोजे लंबे समय तक पहनना, पैरों को ठीक से न सुखाना और सार्वजनिक नम जगहों पर नंगे पैर चलना जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए मानसून में पैरों की स्वच्छता के साथ उन्हें सूखा रखना भी उतना ही जरूरी है।

फंगल इंफेक्शन आखिर होता कैसे है?

एथलीट्स फुट एक सामान्य फंगल संक्रमण है, जो पैरों की त्वचा को प्रभावित करता है। इसके लिए जिम्मेदार फंगस गर्म और नम वातावरण में आसानी से पनपते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, नम सार्वजनिक स्थानों जैसे स्विमिंग पूल के आसपास, जिम के चेंजिंग रूम और सार्वजनिक शॉवर में नंगे पैर चलने से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा अगर पैर लंबे समय तक पसीने या पानी से गीले रहें, तो जूते और मोजे के भीतर ऐसा वातावरण बन सकता है जिसमें फंगस बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिल जाती हैं। इसलिए समस्या केवल बारिश के पानी से नहीं, बल्कि नमी के लंबे समय तक बने रहने से जुड़ी है। 

बारिश में गीले जूते-मोजे क्यों बनते हैं जोखिम?

मानसून में अक्सर लोग बारिश में भीगने के बाद जूते और मोजे तुरंत नहीं बदलते। इससे पैर लंबे समय तक नम रहते हैं और त्वचा की ऊपरी परत में नमी बनी रहती है। एनएचएस के मुताबिक गीले या पसीने वाले पैर और ऐसे जूते पहनना जो पैरों को गर्म और पसीने से भरा रखते हैं, एथलीट्स फुट की संभावना बढ़ा सकते हैं। 
सिंथेटिक और कम हवा वाले जूते भी पसीना बढ़ा सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी पैरों को सूखा रखने, नमी सोखने वाले मोजे पहनने और जूतों को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह सूखने देने की सलाह देती है। 

पैरों में फंगल इंफेक्शन के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

इस संक्रमण की शुरुआत अक्सर उंगलियों के बीच खुजली या त्वचा के सफेद और नरम पड़ने से हो सकती है। इसके साथ जलन, पपड़ीदार त्वचा, लालिमा, त्वचा का छिलना और पैरों में दरारें भी दिखाई दे सकती हैं। कुछ मामलों में छोटे-छोटे छाले भी हो सकते हैं। एनएचएस के अनुसार एथलीट्स फुट में पैरों के तलवों या किनारों पर भी सूखी और परतदार त्वचा दिखाई दे सकती है। अगर संक्रमण का इलाज न किया जाए, तो यह पैर के नाखूनों तक फैलकर फंगल नेल इंफेक्शन का कारण बन सकता है। 

क्या हर खुजली फंगल इंफेक्शन होती है?

नहीं। पैरों में खुजली, लालिमा या त्वचा का छिलना हमेशा फंगल इंफेक्शन का संकेत नहीं होता। एलर्जी, त्वचा में जलन, अत्यधिक पसीना या दूसरी त्वचा संबंधी समस्याएं भी इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं।
यही वजह है कि लंबे समय तक बने रहने वाले या बार-बार लौटने वाले लक्षणों को केवल घरेलू उपायों के भरोसे छोड़ना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक त्वचा की जांच कर सकते हैं और कुछ मामलों में संक्रमण की पुष्टि के लिए त्वचा का नमूना प्रयोगशाला में भेजा जा सकता है। 

संक्रमण फैलने का खतरा कहां ज्यादा रहता है?

बारिश में सार्वजनिक नम जगहों पर विशेष सावधानी की जरूरत होती है। स्विमिंग पूल के आसपास, जिम के चेंजिंग रूम, सार्वजनिक शॉवर और ऐसे फर्श जहां लोग नंगे पैर चलते हैं, वहां संक्रमित व्यक्ति से फंगस के संपर्क में आने की संभावना हो सकती है। घर में भी संक्रमण फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के तौलिये, जूते या दूसरे निजी सामान साझा करने से फंगस दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। इसलिए परिवार में किसी सदस्य को फंगल इंफेक्शन होने पर व्यक्तिगत सामान अलग रखना और साफ-सफाई पर ध्यान देना जरूरी है। 

किन लोगों में जोखिम ज्यादा हो सकता है?

गर्म और नम मौसम में रहने वाले, अधिक पसीना आने वाले और लंबे समय तक बंद जूते पहनने वाले लोगों में जोखिम बढ़ सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार डायबिटीज और कुछ अन्य स्थितियां भी फंगल इंफेक्शन के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं। पैरों की त्वचा में कट, खरोंच या दूसरी तरह की क्षति होने पर भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मानसून के दौरान पैरों की त्वचा में किसी तरह की चोट या लगातार नमी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

पैरों को फंगल इंफेक्शन से कैसे बचाएं?

मानसून में पैरों को रोजाना साफ पानी और साबुन से धोना और खास तौर पर उंगलियों के बीच की त्वचा को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है। केवल धोना पर्याप्त नहीं है; नमी को लंबे समय तक त्वचा पर बने रहने से रोकना भी जरूरी है। मोजे रोज बदलें और अगर वे बारिश या पसीने से गीले हो जाएं तो उन्हें तुरंत बदल देना बेहतर है। ऐसे जूते पहनें जिनमें हवा का आवागमन हो और कोशिश करें कि एक ही जोड़ी जूते लगातार कई दिनों तक न पहनी जाए। जूतों को दोबारा पहनने से पहले अच्छी तरह सूखने दें। सार्वजनिक शॉवर, जिम, पूल या चेंजिंग रूम में नंगे पैर चलने के बजाय फ्लिप-फ्लॉप या शॉवर फुटवियर का इस्तेमाल करना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। तौलिये, मोजे और जूते दूसरे लोगों के साथ साझा करने से भी बचना चाहिए। 

क्या पैरों पर मॉइस्चराइजर लगाना सही है?

सूखी एड़ियों के लिए मॉइस्चराइजर उपयोगी हो सकता है, लेकिन अगर उंगलियों के बीच फंगल इंफेक्शन या लगातार नमी की समस्या है, तो उस हिस्से को नम बनाए रखना उचित नहीं है। एनएचएस की सलाह के मुताबिक एथलीट्स फुट में उंगलियों के बीच मॉइस्चराइजर लगाने से बचना चाहिए। 
इसका मतलब यह नहीं है कि पैरों की त्वचा को हर स्थिति में सूखा और रूखा बना दिया जाए। जरूरत के अनुसार पैरों की त्वचा की देखभाल की जानी चाहिए, लेकिन संक्रमित या नम हिस्से में गलत उत्पाद का इस्तेमाल समस्या बढ़ा सकता है।

इलाज में किन बातों का ध्यान रखें?

एथलीट्स फुट का इलाज आम तौर पर एंटीफंगल दवाओं से किया जाता है। एनएचएस के अनुसार फार्मेसी से मिलने वाली एंटीफंगल क्रीम, स्प्रे या पाउडर कुछ मामलों में इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन उपचार को निर्देश के मुताबिक पूरा करना महत्वपूर्ण है क्योंकि संक्रमण दोबारा लौट सकता है। 
केवल खुजली कम होने पर इलाज रोक देना सही नहीं हो सकता। अगर संक्रमण बढ़ रहा है, बार-बार लौट रहा है या फार्मेसी से मिलने वाले उपचार से सुधार नहीं हो रहा, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। बिना सलाह के अलग-अलग क्रीम मिलाकर लगाने से भी बचना चाहिए।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

अगर पैर या टांग बहुत लाल, गर्म और दर्दनाक हो जाए, संक्रमण तेजी से फैलने लगे या त्वचा में गंभीर दरारें और घाव दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। एनएचएस विशेष रूप से डायबिटीज या कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को पैरों के संक्रमण में डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह देता है। 
अगर संक्रमण हाथों या नाखूनों तक फैलने लगे, दर्द बढ़ रहा हो या सामान्य एंटीफंगल उपचार से सुधार न हो, तब भी विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है। पैरों की फंगल समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से उपचार मुश्किल हो सकता है।

आम धारणा और वास्तविकता

मानसून में यह मान लेना कि पैरों का हर लाल निशान या खुजली फंगल इंफेक्शन ही है, सही नहीं है। इसी तरह यह सोचना भी उचित नहीं कि केवल बारिश का पानी लगने से फंगल संक्रमण हो जाता है। वास्तविक जोखिम गर्मी, नमी, पसीना, लंबे समय तक गीले जूते-मोजे और संक्रमित सतहों या व्यक्ति के संपर्क से जुड़ा है। 
इसलिए बचाव का सबसे अहम नज़रिया है—पैरों को साफ और सूखा रखना, गीले मोजे तुरंत बदलना और सार्वजनिक नम जगहों पर नंगे पैर चलने से बचना। ये सामान्य सावधानियां संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।

पाठकों के पांच अहम सवाल

बारिश में पैरों में फंगल इंफेक्शन क्यों होता है?

बारिश के दौरान नमी और पसीने के कारण पैर लंबे समय तक गीले रह सकते हैं। गर्म और नम वातावरण फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल होता है, जिससे एथलीट्स फुट का जोखिम बढ़ सकता है। 

फंगल इंफेक्शन का सबसे आम लक्षण क्या है?

उंगलियों के बीच खुजली, सफेद या नरम पड़ती त्वचा, पपड़ी, जलन और त्वचा का छिलना इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं। कुछ मामलों में दरारें या छोटे छाले भी हो सकते हैं। 

क्या गीले मोजे पहनने से फंगल इंफेक्शन हो सकता है?

लंबे समय तक गीले या पसीने वाले मोजे पहनने से पैरों में नमी बनी रहती है, जिससे फंगस के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। इसलिए गीले मोजे जल्द बदलना जरूरी है। 

पैरों को फंगल इंफेक्शन से कैसे बचाएं?

पैर रोज धोकर अच्छी तरह सुखाएं, खासकर उंगलियों के बीच। साफ मोजे पहनें, गीले मोजे तुरंत बदलें, जूतों को सूखने दें और सार्वजनिक नम जगहों पर नंगे पैर चलने से बचें। 

फंगल इंफेक्शन होने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर संक्रमण बढ़ रहा हो, इलाज से सुधार न हो, बहुत दर्द हो, पैर या टांग गर्म और लाल हो जाए या संक्रमण नाखून अथवा शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैलने लगे, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। डायबिटीज वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। 

निष्कर्ष

पैरों में फंगल इंफेक्शन का खतरा मानसून में इसलिए बढ़ सकता है क्योंकि बारिश, नमी और पसीना पैरों को लंबे समय तक नम रख सकते हैं। गीले जूते-मोजे, बंद फुटवियर और सार्वजनिक नम जगहों पर नंगे पैर चलना भी जोखिम बढ़ाने वाले कारक हैं। इससे बचाव का सबसे अहम तरीका पैरों को साफ और सूखा रखना है। अगर खुजली, पपड़ी, सफेद पड़ती त्वचा, दरार या दर्द लगातार बना रहे, तो इसे सामान्य मानसूनी परेशानी मानकर नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।
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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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