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बारिश में पानी उबालकर पीना क्यों जरूरी? जानिए सही वजह

Neelam Saini 2026-08-09 17:08:42
बारिश में पानी उबालकर पीना क्यों जरूरी? जानिए सही वजह
बारिश में पानी उबालकर पीना क्यों जरूरी? जानिए पूरी वजह

बरसात में पानी दूषित होने का खतरा, उबालना कितना कारगर?

पानी उबालकर पीने से बच सकते हैं जलजनित संक्रमण से?

बारिश के मौसम में जलस्रोतों और पाइपलाइन के दूषित होने का जोखिम बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पानी को उबालना रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया, वायरस और प्रोटोजोआ को निष्क्रिय करने का प्रभावी तरीका है। हालांकि उबालना रासायनिक प्रदूषकों को दूर नहीं करता, इसलिए पानी की गुणवत्ता और स्थानीय एडवाइजरी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 

📍 Location: भारत
📰 Date: 9 अगस्त 2026
✍️ Neelam Saini

बारिश में पानी उबालकर पीना क्यों जरूरी माना जाता है?

बारिश का मौसम सिर्फ मौसम में बदलाव नहीं लाता, बल्कि पानी की गुणवत्ता के लिए भी एक अहम चुनौती बन सकता है। तेज बारिश, जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और पाइपलाइन में लीकेज जैसी परिस्थितियों में दूषित पदार्थ पानी के स्रोतों तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में पानी उबालकर पीना जलजनित संक्रमण के जोखिम को कम करने का एक आसान घरेलू उपाय माना जाता है।  हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना भी अहम है। हर जगह बारिश के मौसम में नल का पानी अनिवार्य रूप से असुरक्षित हो जाए, ऐसा नहीं है। अगर स्थानीय जलापूर्ति सुरक्षित है और संबंधित प्रशासन या जल विभाग की ओर से किसी तरह की चेतावनी नहीं है, तो सिर्फ मौसम बदलने के आधार पर पानी को असुरक्षित घोषित करना सही नहीं होगा।

बारिश के मौसम में पानी दूषित होने का खतरा क्यों बढ़ता है?

बारिश का पानी जमीन की सतह से बहते हुए कई तरह के प्रदूषकों को अपने साथ ले जा सकता है। अगर किसी इलाके में सीवर व्यवस्था प्रभावित हो, जलभराव हो या पेयजल पाइपलाइन में रिसाव हो, तो रोगाणु पानी की सप्लाई में प्रवेश कर सकते हैं। सीडीसी के मुताबिक दूषित पानी में बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी मौजूद हो सकते हैं, जो बीमारी का कारण बन सकते हैं। बारिश के दौरान यह समस्या खासतौर पर उन इलाकों में गंभीर हो सकती है जहां जल निकासी और सीवेज सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। इसलिए पानी का रंग साफ दिखाई देना हमेशा इस बात की गारंटी नहीं है कि उसमें कोई रोगाणु मौजूद नहीं है।

पानी उबालकर पीने से क्या होता है?

पानी उबालकर पीना इसलिए प्रभावी माना जाता है क्योंकि पर्याप्त तापमान पर गर्म करने से कई रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव निष्क्रिय हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पानी को रोलिंग बॉयल तक गर्म करना रोगजनक बैक्टीरिया, वायरस और प्रोटोजोआ को निष्क्रिय करने के लिए प्रभावी तरीका है। सीडीसी भी बताता है कि पानी को एक मिनट तक उबालना कई जलजनित रोगाणुओं को खत्म करने का प्रभावी तरीका है। इसमें ई-कोलाई, साल्मोनेला, शिगेला, जियार्डिया और कुछ अन्य रोगजनक शामिल हैं। यही वजह है कि जब पानी के दूषित होने की आशंका हो, तो उबालकर ठंडा किया गया पानी पीने और खाना बनाने के लिए इस्तेमाल करना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

पानी कितनी देर तक उबालना चाहिए?

यह सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिर्फ पानी को गर्म करना और उसे पर्याप्त रूप से उबालना एक बात नहीं है। सीडीसी की सलाह के मुताबिक साफ पानी को रोलिंग बॉयल तक पहुंचाकर कम से कम एक मिनट तक उबालना चाहिए। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अलग समय की जरूरत हो सकती है। अगर पानी में गंदगी या मिट्टी दिखाई दे रही है, तो उसे सीधे उबालने से पहले साफ कपड़े या उपयुक्त फिल्टर से छानना बेहतर है। इसके बाद पानी को उबालकर ठंडा किया जाना चाहिए और साफ, ढके हुए बर्तन में रखा जाना चाहिए। यहां स्वच्छ भंडारण भी उतना ही जरूरी है। अगर उबले हुए पानी को गंदे बर्तन में रखा जाए या हाथों से बार-बार छुआ जाए, तो दोबारा संदूषण हो सकता है।

क्या उबालने से हर तरह का प्रदूषण खत्म हो जाता है?

यहीं पर पानी उबालने को लेकर एक आम गलतफहमी सामने आती है। उबालना मुख्य रूप से सूक्ष्मजीवों के खिलाफ प्रभावी है, लेकिन यह हर तरह के रासायनिक प्रदूषण को दूर नहीं करता।सीडीसी स्पष्ट करता है कि अगर पानी में ईंधन, जहरीले रसायन या रेडियोधर्मी पदार्थ मौजूद हों, तो केवल उबालने या डिसइन्फेक्शन से पानी सुरक्षित नहीं बनता। ऐसी स्थिति में किसी सुरक्षित वैकल्पिक जलस्रोत का इस्तेमाल करना जरूरी है। इसलिए अगर किसी इलाके में बाढ़ के बाद पानी में रासायनिक प्रदूषण की आशंका है या प्रशासन ने पानी को इस्तेमाल न करने की एडवाइजरी जारी की है, तो सिर्फ उबालकर उसे पीना सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

बारिश में पेट की बीमारियों से पानी का क्या संबंध है?

दूषित पानी कई तरह के संक्रमणों का माध्यम बन सकता है। इसमें दस्त, उल्टी, पेट में ऐंठन और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं, हालांकि हर ऐसे लक्षण का कारण पानी ही हो, यह जरूरी नहीं है। सीडीसी के अनुसार दूषित पानी से कैंपिलोबैक्टर, जियार्डिया, साल्मोनेला और शिगेला जैसे रोगजनक संक्रमण पैदा कर सकते हैं। यही वजह है कि मानसून के दौरान सिर्फ पानी पीने पर नहीं, बल्कि उसी पानी से खाना बनाने, बर्फ तैयार करने और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार करने पर भी ध्यान देना जरूरी है। अगर पानी के दूषित होने की आशंका हो, तो सुरक्षित पानी का इस्तेमाल इन सभी गतिविधियों में किया जाना चाहिए। 

क्या फिल्टर किया हुआ पानी भी उबालना जरूरी है?

इसका जवाब परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सभी वाटर फिल्टर एक जैसे नहीं होते और उनकी क्षमता अलग-अलग रोगाणुओं तथा रसायनों को हटाने में अलग हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन घरेलू जल उपचार तकनीकों का मूल्यांकन उनकी माइक्रोबियल सुरक्षा और रोगजनकों को हटाने की क्षमता के आधार पर करता है। अगर स्थानीय प्रशासन ने पानी उबालने की एडवाइजरी जारी की है, तो सिर्फ घरेलू फिल्टर पर निर्भर रहना उचित नहीं होगा। ऐसी स्थिति में संबंधित स्वास्थ्य या जल विभाग के निर्देशों का पालन करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

बारिश का पानी क्या सीधे पी सकते हैं?

बारिश का पानी देखने में साफ हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह पीने के लिए स्वतः सुरक्षित है। सीडीसी के अनुसार बारिश का पानी हवा में मौजूद कणों और छत या संग्रहण प्रणाली के संपर्क में आने के बाद रोगाणुओं और कुछ रसायनों से दूषित हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति वर्षाजल को पीने के लिए संग्रहित करता है, तो संग्रहण प्रणाली की सफाई, नियमित परीक्षण और उचित ट्रीटमेंट जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जुलाई 2026 में वर्षाजल संग्रह और भंडारण से जुड़े जोखिमों की पहचान के लिए अलग सैनिटरी इंस्पेक्शन पैकेज भी जारी किया है। 

सिर्फ उबालना नहीं, सुरक्षित भंडारण भी जरूरी

पानी को उबालने के बाद उसे खुले बर्तन में छोड़ देना सुरक्षित आदत नहीं है। सीडीसी साफ तौर पर उबले पानी को ठंडा करके साफ और सैनिटाइज्ड कंटेनर में ढक्कन लगाकर रखने की सलाह देता है। घर में पानी निकालने के लिए साफ बर्तन या करछी का इस्तेमाल करना चाहिए। जिस कंटेनर में पानी रखा है, उसकी नियमित सफाई भी जरूरी है। पानी को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया तभी प्रभावी होगी जब उसे इस्तेमाल करने तक दोबारा दूषित होने से बचाया जाए।

क्या हर व्यक्ति को मानसून में उबला पानी ही पीना चाहिए?

इस सवाल का जवाब एक सामान्य नियम से नहीं दिया जा सकता। सुरक्षित और नियमित रूप से जांचे गए सार्वजनिक पेयजल की व्यवस्था वाले इलाकों में स्थानीय जल गुणवत्ता मानकों और प्रशासनिक निर्देशों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए? लेकिन अगर बाढ़, जलभराव, पाइपलाइन टूटने, सीवर ओवरफ्लो या जल आपूर्ति को लेकर आधिकारिक चेतावनी हो, तो सावधानी बढ़ाना जरूरी है। ऐसी परिस्थिति में बोतलबंद, उबला या आधिकारिक तौर पर सुरक्षित किया गया पानी इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। 

पानी की सुरक्षा में जागरूकता सबसे बड़ा हथियार

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मौजूदा ड्रिंकिंग-वॉटर गाइडलाइंस पानी की सुरक्षा को सिर्फ घर में पानी उबालने तक सीमित नहीं मानतीं। पानी के स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक उसकी गुणवत्ता और जोखिमों का प्रबंधन जरूरी है। जून 2026 में जारी डब्ल्यूएचओ की नई गाइडलाइंस में भी पानी की सुरक्षा के लिए रिस्क-बेस्ड मैनेजमेंट और स्वतंत्र निगरानी पर जोर दिया गया है। इसका मतलब साफ है कि घर में उबालना एक उपयोगी सुरक्षा उपाय हो सकता है, लेकिन यह सुरक्षित जल व्यवस्था का विकल्प नहीं है। दीर्घकालीन समाधान के लिए सुरक्षित जलस्रोत, बेहतर पाइपलाइन, प्रभावी सीवेज व्यवस्था, नियमित जांच और समय पर प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी है।

निष्कर्ष

बारिश के मौसम में पानी उबालकर पीना तब खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जब पानी के दूषित होने की आशंका हो। सही तरीके से उबालने पर कई बैक्टीरिया, वायरस और प्रोटोजोआ निष्क्रिय किए जा सकते हैं, जिससे जलजनित संक्रमण का जोखिम घटता है। लेकिन उबालना कोई सर्वांगीण समाधान नहीं है। रासायनिक या जहरीले प्रदूषण की स्थिति में यह पर्याप्त नहीं होता। इसलिए मानसून में सबसे समझदारी भरा नज़रिया यही है—पानी की गुणवत्ता पर भरोसा हो तो सामान्य व्यवस्था अपनाएं, संदेह या आधिकारिक चेतावनी हो तो पानी को सुरक्षित तरीके से ट्रीट करें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सुरक्षित जलस्रोत का इस्तेमाल करें।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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