बरसात में हेयर फॉल बढ़ गया? जानिए बालों को बचाने के उपाय
मानसून में क्यों झड़ते हैं बाल? जानिए वजह और बचाव के तरीके
बारिश में बाल झड़ने लगे तो ये गलतियां तुरंत छोड़ दें
मानसून में बाल झड़ने की शिकायत बढ़ सकती है, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर हर हेयर फॉल को बारिश से जोड़ना सही नहीं है। सामान्य तौर पर रोजाना 50 से 100 बाल झड़ना सामान्य हो सकता है। तनाव, बीमारी, तेज वजन कम होना, पोषण की कमी, हार्मोनल बदलाव और आनुवंशिक कारण भी हेयर फॉल के पीछे हो सकते हैं।
📍 Location: भारत
📰 Date: 9 अगस्त 2026
✍️ Neelam Saini
बरसात में हेयर फॉल क्यों बढ़ जाता है?
मानसून आते ही कई लोगों की शिकायत होती है कि कंघी करने, नहाने या तकिए पर सामान्य से ज्यादा बाल नजर आने लगे हैं। बारिश के दौरान बालों की देखभाल में बदलाव जरूर जरूरी होता है, लेकिन यह मान लेना कि हर व्यक्ति में हेयर फॉल का सीधा कारण मौसम है, वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं है। बाल झड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मायो क्लिनिक के मुताबिक आनुवंशिकता, हार्मोनल बदलाव, कुछ मेडिकल कंडीशन, तनाव, खराब पोषण और कुछ दवाएं हेयर लॉस से जुड़ी हो सकती हैं।
सामान्य हेयर शेडिंग और हेयर फॉल में फर्क
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कुछ बालों का गिरना सामान्य प्रक्रिया है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के मुताबिक रोजाना करीब 50 से 100 बाल झड़ना सामान्य हो सकता है, क्योंकि पुराने बाल गिरते हैं और उनकी जगह नए बाल उगते हैं। फिक्र की स्थिति तब बनती है जब बालों का झड़ना अचानक काफी बढ़ जाए, सिर की त्वचा ज्यादा दिखाई देने लगे, बाल लगातार पतले होते जाएं या सिर पर खाली पैच नजर आने लगें। ऐसी स्थिति को केवल मानसून का असर समझना सही नहीं होगा।
बारिश में बालों की देखभाल क्यों जरूरी?
बारिश में भीगने के बाद बाल लंबे समय तक गीले रहने से टूटने का जोखिम बढ़ सकता है। गीले बाल ज्यादा नाजुक होते हैं और उन्हें जोर से कंघी करने या खींचने से हेयर ब्रेकेज हो सकता है।मायो क्लिनिक भी गीले बालों को संभालते समय ज्यादा खींचतान से बचने और चौड़े दांत वाली कंघी इस्तेमाल करने की सलाह देता है। बालों को कसकर बांधने वाली हेयरस्टाइल और अत्यधिक हीट या केमिकल ट्रीटमेंट भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
गीले बालों को तुरंत सुखाना क्यों जरूरी?
बारिश में भीगने के बाद बालों को लंबे समय तक गीला छोड़ना अच्छी हेयर केयर आदत नहीं है। बालों को साफ पानी से धोने के बाद मुलायम तौलिये से हल्के हाथों से सुखाएं और उन्हें जोर से रगड़ने से बचें।गीले बालों में तुरंत कंघी करने के बजाय पहले अतिरिक्त पानी निकलने दें। बालों को खींचकर सुलझाने की आदत टूटने और हेयर फॉल की समस्या को बढ़ा सकती है।
स्कैल्प की सफाई पर दें खास ध्यान
मानसून में पसीना, नमी और धूल स्कैल्प पर जमा हो सकती है। इसलिए अपनी स्कैल्प की जरूरत के मुताबिक नियमित सफाई करना जरूरी है।लेकिन हर दिन बहुत ज्यादा शैम्पू करना या तेज केमिकल वाले प्रोडक्ट इस्तेमाल करना भी उचित नहीं है। अगर स्कैल्प में लगातार खुजली, लालिमा, पपड़ी या दर्द हो रहा है तो घरेलू उपायों के बजाय डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।
खान-पान में प्रोटीन की कमी न होने दें
बालों की मजबूती केवल बाहरी देखभाल से तय नहीं होती। शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलने पर भी हेयर शेडिंग बढ़ सकती है। क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक बहुत कम प्रोटीन वाली डाइट और अत्यधिक डाइटिंग टेलोजन एफ्लुवियम जैसी स्थिति को ट्रिगर कर सकती है। इसलिए भोजन में दाल, चना, राजमा, दूध-दही, अंडा, मछली या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल करना उपयोगी हो सकता है। संतुलित आहार लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है, जबकि बिना जांच के सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं माना जाना चाहिए।
तेल लगाना कितना फायदेमंद?
बालों में तेल लगाना कई लोगों की पारंपरिक हेयर केयर रूटीन का हिस्सा है। इससे बालों में रूखापन कम महसूस हो सकता है, लेकिन तेल को हर तरह के हेयर फॉल का इलाज मानना सही नहीं है।अगर बाल झड़ने की वजह थायरॉयड समस्या, हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक हेयर लॉस, स्कैल्प इंफेक्शन या पोषण की कमी है तो केवल तेल लगाने से मूल कारण खत्म नहीं होगा। इसलिए लगातार हेयर फॉल में कारण की पहचान ज्यादा अहम है।
तनाव भी बन सकता है हेयर फॉल की वजह
कई बार हेयर फॉल का संबंध मौसम से ज्यादा शरीर या मानसिक तनाव से होता है। तेज बुखार, बीमारी, ऑपरेशन, अचानक वजन कम होना, गंभीर तनाव या पोषण की कमी के बाद कुछ महीनों में ज्यादा बाल झड़ सकते हैं।इसे टेलोजन एफ्लुवियम कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक इसमें बालों के विकास चक्र में बदलाव आने के बाद सामान्य से अधिक बाल एक साथ झड़ सकते हैं और कई मामलों में यह स्थिति अस्थायी होती है।
घरेलू उपायों में किन बातों का रखें ध्यान?
बरसात में हेयर फॉल से बचने के लिए सबसे सुरक्षित घरेलू तरीका बालों को साफ और सूखा रखना, गीले बालों में जोर से कंघी न करना और संतुलित भोजन लेना है। इसके साथ ही बालों को बहुत कसकर बांधने और बार-बार हीट स्टाइलिंग से बचना चाहिए।प्याज का रस, नींबू, तेज घरेलू मिश्रण या किसी भी नुस्खे को हेयर फॉल का पक्का इलाज बताना उचित नहीं है। संवेदनशील स्कैल्प पर ऐसे प्रयोग जलन या अन्य परेशानी पैदा कर सकते हैं।
क्या बायोटिन या आयरन की गोली लेनी चाहिए?
हेयर फॉल देखकर खुद से बायोटिन, आयरन या दूसरे सप्लीमेंट शुरू करना सही रणनीति नहीं है। बाल झड़ने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं और हर व्यक्ति में सप्लीमेंट की जरूरत अलग होती है।मायो क्लिनिक के अनुसार पोषण की कमी हेयर लॉस से जुड़ सकती है, लेकिन इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लगातार या ज्यादा हेयर फॉल होने पर चिकित्सकीय मूल्यांकन ज्यादा बेहतर रास्ता है।
कब समझें कि डॉक्टर से मिलने का समय आ गया?
अगर अचानक बहुत ज्यादा बाल गिरने लगें, सिर पर गोल-गोल खाली हिस्से दिखाई दें या स्कैल्प में खुजली, जलन, दर्द और पपड़ी जैसी समस्या हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।मायो क्लिनिक के अनुसार अचानक या पैची हेयर लॉस कभी-कभी किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डर्मेटोलॉजिस्ट कारण की पहचान कर उचित उपचार सुझा सकता है।
मानसून के बाद भी समस्या रहे तो क्या करें?
अगर बारिश का मौसम खत्म होने के बाद भी बाल लगातार झड़ रहे हैं, तो केवल हेयर ऑयल या शैम्पू बदलने पर निर्भर रहना उचित नहीं है। लंबे समय तक जारी हेयर फॉल के पीछे हार्मोनल समस्या, थायरॉयड, पोषण संबंधी कमी, आनुवंशिक कारण या अन्य मेडिकल स्थिति हो सकती है। टेलोजन एफ्लुवियम जैसे कुछ मामलों में बालों का झड़ना अस्थायी हो सकता है और मूल कारण दूर होने के बाद धीरे-धीरे सुधार आ सकता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार कई मामलों में बालों की ग्रोथ समय के साथ वापस आती है।
निष्कर्ष
बरसात में हेयर फॉल को रोकने के लिए किसी एक घरेलू नुस्खे को रामबाण समझने के बजाय बालों की बुनियादी देखभाल पर ध्यान देना ज्यादा समझदारी है। बालों को लंबे समय तक गीला न रखें, गीले बालों में खींचतान से बचें, संतुलित आहार लें और अत्यधिक केमिकल या हीट ट्रीटमेंट से दूरी रखें। सबसे अहम बात यह है कि हर हेयर फॉल मानसून की वजह से नहीं होता। अगर बाल सामान्य से काफी ज्यादा झड़ रहे हैं या सिर पर खाली पैच बनने लगे हैं, तो घरेलू प्रयोगों में समय गंवाने के बजाय विशेषज्ञ से कारण की जांच कराना ही सबसे जिम्मेदार नज़रिया है।