बदलते मौसम में क्यों बढ़ जाती है खांसी-जुकाम की परेशानी?
मौसम में अचानक बदलाव आने पर कई लोगों को छींक, नाक बहना, गले में खराश, खांसी और हल्का बुखार जैसी शिकायत होने लगती है। खासकर जब तापमान में उतार-चढ़ाव हो या आसपास वायरल संक्रमण फैला हो, तब सर्दी-जुकाम की समस्या अधिक देखने को मिल सकती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सिर्फ मौसम बदलना ही सर्दी-जुकाम का कारण नहीं है। सामान्य सर्दी अक्सर विभिन्न वायरस के कारण होती है। वहीं, धूल, परागकण और अन्य एलर्जेन कुछ लोगों में एलर्जी के लक्षण पैदा कर सकते हैं। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, सामान्य सर्दी ऊपरी श्वसन तंत्र का वायरल संक्रमण है और इसके लक्षणों में नाक बहना, नाक बंद होना, खांसी, छींक और गले में खराश शामिल हो सकते हैं।
खांसी और जुकाम होने पर सबसे पहले क्या करें?
अधिकांश सामान्य सर्दी-जुकाम के मामलों में शरीर को आराम देने और लक्षणों को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाता है। पर्याप्त नींद और आराम प्रतिरोधक तंत्र को संक्रमण से निपटने में मदद करते हैं। इस दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना भी उपयोगी हो सकता है। पानी, सूप या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ शरीर में पानी की कमी से बचाने में मदद करते हैं। बहुत गर्म पेय या अत्यधिक गर्म भाप लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जलने का खतरा हो सकता है।
गले की खराश में क्या करें?
खांसी के साथ गले में खराश या दर्द भी हो सकता है। ऐसे में गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे कुछ लोगों को राहत दे सकते हैं। छोटे बच्चों को गरारे कराते समय विशेष सावधानी जरूरी है, क्योंकि वे पानी निगल सकते हैं। शहद भी खांसी को शांत करने में मदद कर सकता है। लेकिन एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु बोटुलिज्म का जोखिम रहता है।
भाप लेने से क्या फायदा होता है?
नाक बंद होने पर गर्म शॉवर या भाप से कुछ समय के लिए आराम महसूस हो सकता है। इससे नाक के मार्ग में जमा स्राव ढीला होने का एहसास हो सकता है। लेकिन उबलते पानी के बर्तन के ऊपर झुककर भाप लेना सुरक्षित तरीका नहीं है। इससे खासकर बच्चों में गंभीर जलने का खतरा रहता है। इसलिए यदि भाप से राहत लेनी हो तो सुरक्षित वातावरण में गर्म पानी की भाप या गर्म शॉवर का विकल्प बेहतर है।
नाक बंद होने पर क्या करें?
नाक बंद होने या नाक बहने की समस्या में सलाइन नेजल स्प्रे या ड्रॉप्स उपयोगी हो सकते हैं। ये नाक के भीतर जमा स्राव को साफ करने और नाक को नम रखने में मदद कर सकते हैं। बच्चों में किसी भी दवा या नेजल डिकंजेस्टेंट का इस्तेमाल उम्र के अनुसार चिकित्सकीय सलाह से करना ज्यादा सुरक्षित है।
क्या खांसी-जुकाम में एंटीबायोटिक लेनी चाहिए?
यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। सामान्य सर्दी-जुकाम आमतौर पर वायरस के कारण होता है, जबकि एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया पर काम करती हैं। इसलिए वायरल सर्दी-जुकाम में डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है। अनावश्यक एंटीबायोटिक इस्तेमाल से दवाओं के प्रति प्रतिरोध यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी एंटीबायोटिक के जिम्मेदार इस्तेमाल और चिकित्सकीय सलाह के महत्व पर जोर देता है।
खांसी में शहद कितना उपयोगी?
वयस्कों और एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में शहद खांसी की तीव्रता या परेशानी को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है।लेकिन इसे किसी गंभीर संक्रमण की दवा नहीं समझना चाहिए। यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहती है या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
खाने-पीने में किन बातों का ध्यान रखें?
बीमारी के दौरान ऐसा भोजन लेना बेहतर रहता है जिसे आसानी से पचाया जा सके और जिससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा व पोषण मिले।दाल, सब्जियां, फल, सूप और सामान्य संतुलित भोजन डाइट का हिस्सा बनाए रखे जा सकते हैं। यदि भूख कम हो तो थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन लिया जा सकता है। सिर्फ किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और पर्याप्त तरल पदार्थ पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
किन घरेलू नुस्खों से बचना चाहिए?
खांसी-जुकाम के दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह के नुस्खे वायरल होते हैं। हर नुस्खा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो, यह जरूरी नहीं।विशेष रूप से बच्चों को तेज मसालेदार मिश्रण, बिना सलाह के दवाएं या अत्यधिक गर्म पदार्थ देने से बचना चाहिए। इसी तरह किसी भी एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड या अन्य दवा को डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू करना उचित नहीं है।
संक्रमण फैलने से कैसे रोकें?
सर्दी-जुकाम के कई वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकते हैं। इसलिए व्यक्तिगत स्वच्छता संक्रमण के प्रसार को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकना चाहिए। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को उचित तरीके से फेंकने और उसके बाद हाथ साफ करने की आदत डालनी चाहिए। बार-बार हाथ धोना और बीमार होने पर दूसरों के बहुत करीब जाने से बचना भी संक्रमण फैलने की संभावना कम कर सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
सामान्य सर्दी-जुकाम अक्सर समय के साथ ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार या बहुत तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम, शरीर में पानी की गंभीर कमी या लक्षणों के बिगड़ने जैसी स्थिति हो तो चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में लक्षणों को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
बदलते मौसम में पहले से कैसे रखें ख्याल?
बदलते मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतें मददगार हो सकती हैं।
* पर्याप्त नींद लें।
* दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।
* संतुलित भोजन करें।
* हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें।
* धूल और एलर्जी के कारण पता हो तो उनसे बचने की कोशिश करें।
* बीमार व्यक्ति के साथ लंबे समय तक नजदीकी संपर्क से बचें।
* कमरे में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें।
* डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें।
यदि किसी व्यक्ति को हर मौसम बदलने पर बार-बार छींक, नाक बहना और खांसी होती है, तो केवल इसे “मौसम का असर” मानकर नजरअंदाज करने के बजाय एलर्जी या अन्य कारणों के लिए डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
निष्कर्ष
बदलते मौसम में खांसी-जुकाम होना आम जरूर है, लेकिन हर खांसी को सामान्य मान लेना भी सही नहीं है। वायरल सर्दी-जुकाम में पर्याप्त आराम, तरल पदार्थ, गले की देखभाल और स्वच्छता जैसी सामान्य सावधानियां राहत देने में मदद कर सकती हैं। सबसे अहम बात यह है कि बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लें और गंभीर या लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करें। मौसम बदलने के दौरान अपनी दिनचर्या में थोड़ी सावधानी बरतकर संक्रमण से बचाव किया जा सकता है और बीमार पड़ने पर शरीर को ठीक होने के लिए जरूरी आराम भी दिया जा सकता है।