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सावन में उपवास: सेहत का ख्याल कैसे रखें? जानिए जरूरी बातें

Neelam Saini 2026-08-10 15:49:39
सावन में उपवास: सेहत का ख्याल कैसे रखें? जानिए जरूरी बातें
सावन में उपवास रखते हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

सावन के व्रत में सेहत न बिगड़े, जानिए क्या खाएं और क्या नहीं

सावन के उपवास में कमजोरी और डिहाइड्रेशन से कैसे बचें?

सावन के उपवास में भोजन की दिनचर्या बदलने से शरीर को मिलने वाली ऊर्जा और पोषण प्रभावित हो सकते हैं। खासकर डायबिटीज, गर्भावस्था या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में सावधानी जरूरी है। संतुलित फलाहार, पर्याप्त तरल और शरीर के संकेतों पर ध्यान देकर आस्था के साथ सेहत का भी ख्याल रखा जा सकता है।

📍 Location: नई दिल्ली
📰 Date: 10 अगस्त 2026
✍️ नीलम सैनी

सावन में उपवास और सेहत का सवाल

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और धार्मिक आस्था से जुड़ा है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार समेत अलग-अलग दिनों में उपवास रखते हैं। लेकिन व्रत के दौरान भोजन का पैटर्न बदलने के साथ शरीर को मिलने वाली ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और तरल पदार्थों की मात्रा भी बदल सकती है। यही वजह है कि उपवास को सिर्फ भोजन छोड़ने के नज़रिये से देखना पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह समझना जरूरी है कि व्रत के दौरान शरीर को जरूरी पोषण कैसे मिलता रहे और किन परिस्थितियों में उपवास नुकसानदेह हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन संतुलित आहार के लिए पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता को बुनियादी सिद्धांत मानता है। 

सावन के उपवास में क्या बदलता है?

हर व्यक्ति का व्रत रखने का तरीका एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग केवल एक समय भोजन करते हैं, कुछ फलाहार लेते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार सीमित खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। इसलिए स्वास्थ्य पर असर भी व्यक्ति और उपवास की अवधि के अनुसार अलग हो सकता है। यदि सामान्य भोजन की जगह केवल आलू, साबूदाना, तली हुई चीजें या मीठे खाद्य पदार्थ लगातार लिए जाएं, तो भोजन की पोषण गुणवत्ता संतुलित नहीं रह सकती।

फलाहार का मतलब सिर्फ पेट भरना नहीं

व्रत के दौरान फलाहार का अर्थ केवल पेट भरना नहीं होना चाहिए। यदि आपकी धार्मिक परंपरा में फल, दूध, दही, मेवे या कुछ विशेष अनाज स्वीकार्य हैं, तो उपलब्ध विकल्पों में विविधता रखना ज्यादा बेहतर दृष्टिकोण है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक स्वस्थ आहार में अलग-अलग खाद्य समूहों से पोषक तत्व लेना महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और उपयुक्त प्रोटीन स्रोत संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, हालांकि व्रत में कौन-से खाद्य पदार्थ लिए जा सकते हैं यह धार्मिक परंपरा और व्यक्ति की जरूरत पर निर्भर करता है। 

व्रत में पानी को नजरअंदाज न करें

सावन मानसून के मौसम में आता है और बादल या बारिश होने पर कई बार प्यास कम महसूस हो सकती है। लेकिन कम प्यास का मतलब यह नहीं है कि शरीर को तरल पदार्थों की जरूरत नहीं है। अगर आपकी उपवास परंपरा पानी पीने की अनुमति देती है, तो दिनभर पर्याप्त तरल लेते रहना जरूरी है। एनएचएस के अनुसार डिहाइड्रेशन में प्यास, गहरे पीले रंग का पेशाब, कम पेशाब आना, चक्कर, थकान और मुंह सूखना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। 

साबूदाना और आलू को लेकर क्या समझें?

साबूदाना और आलू कई तरह के व्रत में इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन किसी खाद्य पदार्थ का व्रत में अनुमत होना अपने आप उसे संपूर्ण भोजन नहीं बना देता।अगर भोजन में लगातार केवल स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ ज्यादा हों और प्रोटीन, फल या दूसरे पोषक विकल्प कम हों, तो आहार की विविधता घट सकती है। इसलिए व्रत की अनुमति के दायरे में भोजन में विविधता रखना अधिक उपयोगी है।

तली हुई चीजों से सावधानी क्यों?

व्रत के दौरान पकौड़े, पूरी, चिप्स या दूसरी तली हुई चीजें कई घरों में आसानी से उपलब्ध होती हैं। लेकिन इन्हें बार-बार और ज्यादा मात्रा में खाना स्वस्थ फलाहार का पर्याय नहीं माना जा सकता। डब्ल्यूएचओ स्वस्थ आहार में अस्वास्थ्यकर वसा, फ्री शुगर और अधिक सोडियम वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करने की सलाह देता है। तलने की बजाय उबालना, भाप में पकाना या कम तेल में तैयार करना कई परिस्थितियों में बेहतर विकल्प हो सकता है। 

व्रत खोलने के बाद ज्यादा खाना भी चुनौती

लंबे अंतराल के बाद भोजन करते समय कुछ लोग अचानक बहुत ज्यादा खाना शुरू कर देते हैं। खासकर अगर पूरे दिन भूखे रहने के बाद तला-भुना, बहुत मीठा या बहुत भारी भोजन लिया जाए, तो पेट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसलिए व्रत खोलते समय भोजन की मात्रा पर संयम रखना बेहतर है। उपलब्ध व्रत-अनुकूल विकल्पों में फल, दही, दूध या हल्का भोजन शामिल किया जा सकता है और व्यक्ति अपनी सामान्य डाइट की ओर धीरे-धीरे लौट सकता है।

डायबिटीज वालों के लिए क्यों जरूरी है अतिरिक्त एहतियात?

डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति के लिए उपवास सामान्य व्यक्ति जैसा नहीं माना जा सकता। कुछ दवाओं या इंसुलिन के इस्तेमाल के दौरान भोजन का लंबा अंतराल ब्लड ग्लूकोज को बहुत कम कर सकता है, जबकि दूसरी परिस्थितियों में ब्लड ग्लूकोज बढ़ने और डिहाइड्रेशन का जोखिम भी हो सकता है। डायबिटीज यूके धार्मिक उपवास से पहले डॉक्टर या डायबिटीज टीम से सलाह लेने पर जोर देता है। खासकर इंसुलिन लेने वाले या डायबिटीज की जटिलताओं वाले लोगों में बिना चिकित्सकीय योजना के उपवास जोखिम बढ़ा सकता है। 

कमजोरी को सिर्फ व्रत का असर न मानें

उपवास के दौरान हल्की भूख महसूस होना एक सामान्य अनुभव हो सकता है। लेकिन लगातार चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम, बेहोशी, बहुत ज्यादा प्यास या असामान्य थकान को केवल व्रत का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। एनएचएस के अनुसार चक्कर, थकान, गहरा पीला पेशाब और कम पेशाब आना डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण गंभीर हों या लगातार बने रहें तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना और चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है। 

गर्भवती महिलाओं को क्या करना चाहिए?

गर्भावस्था में शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें बदल जाती हैं। इसलिए गर्भवती महिला के लिए धार्मिक उपवास का फैसला उसकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखकर होना चाहिए। गर्भावस्था में पर्याप्त और विविध पोषण महत्वपूर्ण है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स भी गर्भावस्था के दौरान पोषण को महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विषय मानता है। ऐसे में लंबे या कठोर उपवास से पहले अपने स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है। 

बुजुर्ग और बच्चों के लिए भी अलग है मामला

बच्चों और बुजुर्गों की पोषण एवं तरल पदार्थों की जरूरत अलग हो सकती है। खासकर छोटे बच्चों में लंबे समय तक भोजन या तरल पदार्थों से दूरी रखना उचित नहीं माना जाना चाहिए। इसी तरह बुजुर्ग व्यक्ति यदि पहले से कोई बीमारी या नियमित दवा ले रहे हैं, तो उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है। उम्र के साथ डिहाइड्रेशन का जोखिम भी बढ़ सकता है। 

क्या व्रत से शरीर अपने आप डिटॉक्स हो जाता है?

उपवास को लेकर कई तरह के दावे सोशल मीडिया पर दिखाई देते हैं। इनमें शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने या हर व्यक्ति के लिए वजन घटाने जैसे दावे भी शामिल हैं। लेकिन किसी भी एक धार्मिक उपवास को हर व्यक्ति के लिए मेडिकल डिटॉक्स या वजन घटाने की गारंटी मानना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक स्वस्थ खान-पान का आधार विविधता, संतुलन, पर्याप्तता और संयम है। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ या एक दिन के उपवास को संपूर्ण स्वास्थ्य का विकल्प नहीं माना जा सकता। 

क्या उपवास में व्यायाम बंद कर देना चाहिए?

यह व्यक्ति की दिनचर्या, उपवास की अवधि और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। अगर उपवास के दौरान कमजोरी, चक्कर या डिहाइड्रेशन के संकेत हैं, तो भारी व्यायाम से बचना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है। दूसरी ओर स्वस्थ व्यक्ति अपनी सामान्य हल्की गतिविधियां अपनी क्षमता के अनुसार जारी रख सकता है। लेकिन उपवास को चुनौती की तरह लेकर शरीर की क्षमता से ज्यादा शारीरिक मेहनत करना उचित नहीं है।

दवाएं लेने वाले लोग क्या करें?

किसी बीमारी की नियमित दवा को केवल व्रत की वजह से अपने स्तर पर बंद करना या उसके समय में बदलाव करना सही नहीं है। दवा का समय भोजन और पानी के साथ जुड़ा हो सकता है, इसलिए बदलाव से उपचार प्रभावित हो सकता है। डायबिटीज के मामले में तो दवा और इंसुलिन की मात्रा या समय में बदलाव डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं किया जाना चाहिए। डायबिटीज यूके भी उपवास से पहले हेल्थकेयर टीम के साथ दवाओं की योजना बनाने की सलाह देता है। 

सावन में स्वस्थ उपवास का सही नजरिया

सावन का उपवास धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परंपरा का विषय है। इसलिए स्वास्थ्य पत्रकारिता का उद्देश्य किसी धार्मिक परंपरा पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि यह बताना है कि उसे अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार कैसे सुरक्षित बनाया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फलाहार को केवल तली हुई चीजों का नाम न बनाया जाए। जहां पानी पीने की अनुमति हो वहां पर्याप्त तरल लिया जाए, भोजन में उपलब्ध पौष्टिक विकल्पों की विविधता रखी जाए और किसी बीमारी या दवा की स्थिति में डॉक्टर से सलाह ली जाए।

निष्कर्ष

सावन में उपवास आस्था के साथ आत्मअनुशासन का भी अवसर हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य की कीमत पर उपवास करना जरूरी नहीं है। शरीर को पर्याप्त पोषण, तरल और आराम देना धार्मिक अनुशासन के साथ संतुलन बनाने का व्यावहारिक रास्ता है। खासकर डायबिटीज, गर्भावस्था, बुजुर्गावस्था या किसी पुरानी बीमारी की स्थिति में उपवास का फैसला व्यक्तिगत स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर होना चाहिए। आस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वस्थ शरीर ही उस आस्था और जीवन दोनों को बेहतर ढंग से निभाने की ताकत देता है।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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