कम पानी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है। प्यास, गहरे पीले रंग का पेशाब, मुंह सूखना, थकान, सिरदर्द और चक्कर इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
कम पानी पीने से शरीर में कौन से बदलाव होते हैं?
पानी हमारे शरीर के लिए सिर्फ प्यास बुझाने वाला पेय नहीं है। शरीर के सामान्य कामकाज के लिए पर्याप्त तरल जरूरी है। सांस लेने, पसीना आने और पेशाब के जरिए शरीर लगातार तरल खोता रहता है, जिसकी भरपाई भोजन और पेय पदार्थों से होती है। जब शरीर जितना तरल खोता है, उसकी तुलना में कम तरल मिलता है तो डिहाइड्रेशन यानी निर्जलीकरण की स्थिति पैदा हो सकती है। शुरुआत में शरीर कई छोटे संकेत देता है। प्यास, मुंह या होंठ सूखना, थकान, सिरदर्द, चक्कर और पेशाब का रंग गहरा होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सबसे पहला संकेत हो सकती है तेज प्यास
जब शरीर में तरल की कमी होने लगती है तो प्यास बढ़ सकती है। हालांकि, केवल प्यास को ही पानी की कमी का पैमाना मानना सही नहीं है। कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति को डिहाइड्रेशन के दूसरे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। लगातार प्यास लगना और पर्याप्त तरल लेने के बावजूद प्यास का बने रहना सामान्य नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में इसके पीछे मधुमेह, कुछ दवाएं या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं और चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
पेशाब का रंग दे सकता है अहम संकेत
शरीर में पानी की कमी पहचानने का एक आसान संकेत पेशाब में दिखाई दे सकता है। डिहाइड्रेशन होने पर पेशाब सामान्य से अधिक गहरे पीले रंग का और तेज गंध वाला हो सकता है। साथ ही पेशाब की मात्रा या बारंबारता कम हो सकती है। आम तौर पर पर्याप्त पानी मिलने पर पेशाब हल्के पीले रंग का रहता है। हालांकि, कुछ दवाएं और अन्य परिस्थितियां पेशाब के रंग को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए केवल रंग देखकर किसी बीमारी का निदान नहीं किया जा सकता।
मुंह और होंठ सूखना
पानी कम होने पर मुंह, होंठ और जीभ सूख सकते हैं। मुंह में चिपचिपाहट या सूखापन महसूस होना भी शरीर में तरल की कमी का संकेत हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार मुंह सूखने की शिकायत है, तो इसके दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को केवल पानी की कमी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है
डिहाइड्रेशन के दौरान कुछ लोगों को असामान्य थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है। सिरदर्द और हल्कापन महसूस होना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं। गर्मी, ज्यादा पसीना आने या शारीरिक मेहनत के दौरान शरीर अधिक तरल खो सकता है। ऐसे समय में पर्याप्त तरल लेना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना विशेष रूप से जरूरी हो जाता है।
चक्कर और सिरदर्द को भी न करें नजरअंदाज
पानी की कमी के साथ चक्कर या सिर हल्का लगने की शिकायत हो सकती है। विशेषकर खड़े होने पर चक्कर बढ़ना गंभीर डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है। हालांकि चक्कर आने के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए बार-बार चक्कर आने पर स्वयं इसका कारण तय करने के बजाय चिकित्सक से जांच कराना बेहतर है।
कब्ज की परेशानी भी बढ़ सकती है
पर्याप्त तरल शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है और अच्छी हाइड्रेशन कब्ज जैसी समस्या को रोकने या कम करने में मदद कर सकती है। कुछ स्वास्थ्य संस्थानों की जानकारी के अनुसार कम तरल लेने से कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए अगर पानी कम पीने के साथ मल त्याग में परेशानी भी हो रही है, तो पूरे दिन के तरल सेवन पर ध्यान देना जरूरी है।
शरीर को कितना पानी चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत एक जैसी नहीं होती। उम्र, शारीरिक गतिविधि, मौसम, बीमारी, गर्भावस्था और स्तनपान जैसी परिस्थितियों के अनुसार तरल की जरूरत बदल सकती है।ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा सामान्य मार्गदर्शन के तौर पर दिनभर में करीब छह से आठ कप या गिलास तरल लेने की बात कहती है, लेकिन गर्म वातावरण, लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि या बीमारी के दौरान अधिक तरल की आवश्यकता हो सकती है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि शरीर को मिलने वाला तरल केवल सादे पानी से नहीं आता। दूध, चाय-कॉफी और कुछ अन्य पेय पदार्थ तथा पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ भी कुल तरल सेवन में योगदान करते हैं।
गर्मी और व्यायाम में बढ़ जाती है जरूरत
गर्म मौसम में पसीने के जरिए शरीर अधिक तरल खो सकता है। इसी तरह लंबे समय तक व्यायाम करने या शारीरिक मेहनत करने पर भी पानी और अन्य तरल की जरूरत बढ़ सकती है। उल्टी या दस्त जैसी स्थिति में भी शरीर तेजी से पानी और लवण खो सकता है। ऐसे मामलों में केवल पानी ही पर्याप्त न हो और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार मौखिक पुनर्जलीकरण घोल की जरूरत पड़ सकती है।
गंभीर डिहाइड्रेशन में क्या हो सकता है?
अगर पानी और तरल की कमी बहुत ज्यादा हो जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। बहुत कम पेशाब आना, लगातार चक्कर, असामान्य कमजोरी, तेज धड़कन, तेजी से सांस लेना या भ्रम जैसी स्थिति गंभीर निर्जलीकरण के संकेत हो सकते हैं। बेहोशी, अत्यधिक भ्रम या सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है।
सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें
हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तरल लेते रहना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। पानी की बोतल साथ रखना, भोजन के समय पानी लेना और गर्म मौसम या शारीरिक मेहनत के दौरान तरल सेवन बढ़ाना मददगार हो सकता है। लेकिन जरूरत से बहुत ज्यादा पानी पीना भी उचित नहीं है। जिन लोगों को डॉक्टर ने किसी बीमारी के कारण तरल सेवन सीमित करने को कहा है, उन्हें अपनी चिकित्सकीय सलाह का पालन करना चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत?
छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा दस्त, उल्टी, तेज बुखार, अधिक पसीना या गर्म वातावरण में रहने वाले लोगों को भी शरीर में पानी की कमी के प्रति सतर्क रहना चाहिए। बुजुर्गों में कभी-कभी प्यास का एहसास कम हो सकता है, इसलिए नियमित रूप से तरल लेने की आदत महत्वपूर्ण हो सकती है।
शरीर के इन संकेतों पर दें ध्यान
अगर शरीर में पानी की कमी हो रही है तो ये संकेत दिखाई दे सकते हैं—
* बहुत ज्यादा प्यास लगना
* मुंह, होंठ या जीभ का सूखना
* पेशाब का गहरा पीला होना
* सामान्य से कम पेशाब आना
* थकान और कमजोरी
* सिरदर्द
* चक्कर या सिर हल्का लगना
* कब्ज
* गंभीर स्थिति में भ्रम या अत्यधिक सुस्ती
इनमें से कई लक्षण दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी हो सकते हैं, इसलिए लगातार या गंभीर लक्षणों की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
निष्कर्ष
कम पानी पीने का असर केवल प्यास तक सीमित नहीं रहता। शरीर में तरल की कमी होने पर पेशाब का रंग गहरा होना, कम पेशाब आना, मुंह सूखना, थकान, सिरदर्द और चक्कर जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। गंभीर डिहाइड्रेशन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक भी हो सकता है। इसलिए पूरे दिन नियमित रूप से पर्याप्त तरल लेना, गर्मी और शारीरिक मेहनत के दौरान जरूरत के अनुसार सेवन बढ़ाना और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करना जरूरी है। हालांकि, हर व्यक्ति की तरल जरूरत अलग होती है और हृदय, गुर्दे या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में तरल की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय की जानी चाहिए।