SYNOPSIS
उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन विष्णुगाड-पिपलकोटी हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुसने से मजदूर फंस गए। राहत-बचाव अभियान में अब तक 16 श्रमिकों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी है, जबकि तीन लोगों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई है। अभियान जारी है।
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चमोली, उत्तराखंड | 13 अगस्त 2026 | अपूर्वा चौधरी
चमोली की निर्माणाधीन सुरंग में अचानक घुसा पानी और मलबा
उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार को निर्माणाधीन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुसने से अफरा-तफरी मच गई। घटना मायापुर-पिपलकोटी क्षेत्र में स्थित विष्णुगाड-पिपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से जुड़े निर्माण क्षेत्र में हुई।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक भारी बारिश के बीच पानी का बहाव अचानक बढ़ा, जिसके बाद सुरंग के भीतर पानी और मलबा पहुंच गया। वहां काम कर रहे कई श्रमिकों के फंसने की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और रेस्क्यू टीमों को सक्रिय किया गया।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 16 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि तीन लोगों के अभी भी अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
कैसे हुआ हादसा?
हादसे के पीछे फिलहाल भारी बारिश के बाद अचानक बढ़ा पानी का बहाव प्रमुख वजह के तौर पर सामने आया है। पानी और मलबे के सुरंग में प्रवेश करने से अंदर मौजूद श्रमिकों के लिए बाहर निकलने का रास्ता बाधित हो गया।
पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के दौरान अचानक पानी बढ़ने और मलबा आने का खतरा बढ़ जाता है। निर्माणाधीन सुरंगों में ऐसी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अंदर काम कर रहे लोगों तक पहुंच बनाने के लिए सीमित रास्ते उपलब्ध होते हैं।
फिलहाल घटना की विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पानी और मलबा किस रास्ते से सुरंग में पहुंचा और घटना के समय निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था क्या थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी
घटना की जानकारी मिलते ही बचाव दलों ने सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों तक पहुंच बनाने का अभियान शुरू किया। प्राथमिकता अंदर मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की रही।
बचाव अभियान के दौरान एक के बाद एक श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकाला गया। शुरुआती अपडेट में कम संख्या में लोगों के बाहर आने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर 16 तक पहुंची।
अभी भी तीन लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू टीमों की गतिविधियां जारी हैं। सुरंग के भीतर पानी, मलबे और रास्ते की स्थिति अभियान की गति को प्रभावित कर सकती है।
परियोजना कितनी बड़ी है?
विष्णुगाड-पिपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही 444 मेगावाट क्षमता की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है।
परियोजना में 13.4 किलोमीटर लंबी हेडरेस टनल और करीब 3.07 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल समेत कई भूमिगत संरचनाएं शामिल हैं। परियोजना का उद्देश्य अलकनंदा नदी के जल का इस्तेमाल कर बिजली उत्पादन करना है।
इतने बड़े भूमिगत निर्माण कार्य के कारण यहां सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
बारिश ने बढ़ाई रेस्क्यू टीमों की चुनौती
चमोली समेत उत्तराखंड के कई पर्वतीय इलाकों में मानसून के दौरान अचानक तेज बारिश, भूस्खलन और जलभराव जैसी परिस्थितियां सामने आती रहती हैं।
ऐसे मौसम में किसी निर्माणाधीन सुरंग के अंदर रेस्क्यू अभियान चलाना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो जाता है। पानी का स्तर, मलबे की मात्रा और सुरंग के भीतर रास्ते की स्थिति लगातार बदल सकती है।
यही वजह है कि रेस्क्यू टीमों को पहले अंदर की स्थिति का आकलन करना पड़ता है और उसके बाद सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ना होता है।
इस प्रोजेक्ट में पहले भी सुरक्षा अभ्यास हुआ था
परियोजना क्षेत्र में आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए पहले भी मॉक ड्रिल आयोजित की जा चुकी है। जुलाई 2025 में इसी परियोजना की पावरहाउस टनल में बाढ़ जैसी स्थिति का सिमुलेशन करते हुए मल्टी-एजेंसी रेस्क्यू अभ्यास किया गया था।
इस अभ्यास में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस, परियोजना कर्मियों और अन्य संबंधित टीमों ने हिस्सा लिया था। इसका उद्देश्य सुरंग के भीतर अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने पर रेस्क्यू और आपातकालीन प्रतिक्रिया की तैयारियों को परखना था।
मौजूदा हादसे के बाद इस तरह की आपातकालीन तैयारियों और उनकी वास्तविक स्थिति में उपयोगिता पर भी नजर रहेगी।
कितने मजदूर फंसे थे?
घटना के शुरुआती घंटों में फंसे श्रमिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। इसी वजह से शुरुआती रिपोर्टों में 10 या उससे अधिक लोगों के फंसे होने की जानकारी दी गई थी।
बाद के अपडेट में 16 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने और तीन अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका की जानकारी सामने आई। इसलिए इस समय उपलब्ध सबसे ताजा आंकड़े के आधार पर 16 लोगों के रेस्क्यू और 3 लोगों की संभावित मौजूदगी को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सुरंग में कुल कितने लोग मौजूद थे और सभी को सुरक्षित निकाला जा सका या नहीं।
प्रशासन की नजर हर अपडेट पर
घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। रेस्क्यू टीमों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग में मौजूद लोगों की सुरक्षित निकासी है।
इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि पानी और मलबा किस स्तर तक पहुंचा है और सुरंग के भीतर आगे बढ़ने के लिए कौन सा रास्ता सुरक्षित है।
जब तक अंदर मौजूद सभी संभावित श्रमिकों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक अभियान को निर्णायक रूप से समाप्त मानना उचित नहीं होगा।
हादसे ने फिर उठाए निर्माण सुरक्षा के सवाल
चमोली की यह घटना मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।
हाइड्रो पावर और सुरंग परियोजनाएं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में बनाई जाती हैं। यहां मौसम में अचानक बदलाव, पहाड़ी मलबा, जल प्रवाह और भूगर्भीय परिस्थितियां निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे में अर्ली वार्निंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, कम्युनिकेशन नेटवर्क, नियमित मॉक ड्रिल और तत्काल मेडिकल सहायता जैसी व्यवस्थाओं का प्रभावी होना बेहद जरूरी है।
अभी सबसे बड़ा फोकस सुरक्षित निकासी पर
फिलहाल चमोली टनल हादसे में सबसे अहम मुद्दा फंसे हुए संभावित श्रमिकों का सुरक्षित रेस्क्यू है। 16 लोगों को बाहर निकाला जाना राहत की बड़ी खबर है, लेकिन तीन लोगों के अंदर होने की आशंका के कारण ऑपरेशन अभी महत्वपूर्ण चरण में है।
रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर सामने आएगी। इसके बाद पानी और मलबे के सुरंग में पहुंचने के कारण, निर्माण स्थल की स्थिति और सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी विस्तृत समीक्षा की जा सकती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।