उत्तराखंड सरकार ने 2025-26 के लिए तीलू रौतेली स्त्री शक्ति पुरस्कार और आंगनबाड़ी सम्मान की सूची जारी की। 13 महिलाओं और 35 कार्यकर्तियों का चयन हुआ। 8 अगस्त को देहरादून में सम्मान समारोह होगा।
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📍 देहरादून
📰 06 अगस्त 2026
✍️ By Asif Khan
उत्तराखंड सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तीलू रौतेली स्त्री शक्ति पुरस्कार और राज्य स्तरीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ती सम्मान के चयनित नामों का ऐलान कर दिया है। यह फैसला महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की सिफारिशों के आधार पर लिया गया।
सरकार के मुताबिक इस साल प्रदेश के सभी 13 जिलों से एक-एक महिला को तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चुना गया है। इसके साथ ही 35 आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों को भी उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा।
यह सम्मान 8 अगस्त को देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में दिया जाएगा।
मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि तीलू रौतेली स्त्री शक्ति पुरस्कार उन महिलाओं को समर्पित है जिन्होंने संघर्ष और मेहनत से समाज में अलग पहचान बनाई है। यह अवार्ड सिर्फ सम्मान नहीं बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है।
सरकार का नज़रिया साफ है। जिन महिलाओं ने सीमित संसाधनों में असाधारण काम किया, उन्हें सामने लाया जाए। इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिले और जमीनी स्तर पर बदलाव तेज हो।
इस साल चयनित महिलाओं ने कई अहम क्षेत्रों में काम किया है। इनमें संस्कृति, खेल, वैज्ञानिक शोध, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, स्वरोजगार और समाजसेवा शामिल हैं।
कुछ महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण और दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। यह विविधता दिखाती है कि राज्य में महिलाओं की भागीदारी कई सेक्टर में बढ़ रही है।
तीलू रौतेली उत्तराखंड की ऐतिहासिक वीरांगना मानी जाती हैं। कम उम्र में उन्होंने युद्ध में नेतृत्व किया और साहस का परिचय दिया।
उनके नाम पर दिया जाने वाला यह पुरस्कार राज्य की महिलाओं के साहस, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। पिछले वर्षों में भी इस सम्मान ने कई जमीनी नायिकाओं को पहचान दिलाई है।
राज्य स्तरीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ती पुरस्कार भी इस समारोह का अहम हिस्सा है। इस बार 35 कार्यकर्तियों का चयन किया गया है।
आंगनबाड़ी नेटवर्क भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ये कार्यकर्तियां मातृ और शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं।
सरकार का मानना है कि इनकी सेवाओं को पहचान देना जरूरी है, क्योंकि यही जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं को लागू करती हैं।
इस तरह के पुरस्कारों का असर सिर्फ व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहता। यह सामाजिक सोच को प्रभावित करता है।
जब किसी गांव या जिले की महिला को राज्य स्तर पर सम्मान मिलता है, तो स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है। इससे शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आता है।
सरकार के इस फैसले को महिला सशक्तीकरण की नीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। राज्य में महिला भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं।
यह कदम राजनीतिक तौर पर भी अहम है, क्योंकि इससे सरकार का फोकस सामाजिक कल्याण और जमीनी विकास पर दिखता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा होता है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ पुरस्कार देना काफी नहीं है। असली चुनौती यह है कि इन महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए लगातार संसाधन और सपोर्ट मिले।
कुछ सवाल भी उठते हैं। चयन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। क्या सभी योग्य उम्मीदवारों तक जानकारी पहुंचती है। इन पहलुओं पर लगातार निगरानी जरूरी है।
सरकार का दावा है कि ऐसे पुरस्कारों के जरिए महिलाओं को आगे आने का मौका मिलेगा। लेकिन इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट, फाइनेंशियल सपोर्ट और शिक्षा पर भी जोर जरूरी है।
यदि इन प्रयासों को नीतिगत स्तर पर मजबूत किया जाए, तो राज्य में महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिल सकती है।
तीलू रौतेली स्त्री शक्ति पुरस्कार सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का जरिया है। 13 महिलाओं और 35 आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों का चयन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब नजर 8 अगस्त के समारोह और उसके बाद के प्रभाव पर रहेगी
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।