चमोली टनल हादसा: CM धामी ने मौके पर पहुंचकर लिया रेस्क्यू का जायजा
THDC टनल हादसे के बाद CM धामी घटनास्थल पहुंचे, रेस्क्यू तेज
पीपलकोटी टनल हादसा: लापता श्रमिकों की तलाश, CM धामी ने लिया जायजा
चमोली के पीपलकोटी में THDC की निर्माणाधीन टनल में पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया। कई श्रमिकों की मौत हुई, कुछ घायल हैं और कुछ अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।
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पीपलकोटी, चमोली, उत्तराखंड | 14 अगस्त 2026 | Mohd Naved
चमोली टनल हादसे के बाद घटनास्थल पहुंचे धामी
उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में THDC की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और जारी रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया। मुख्यमंत्री के दौरे का मकसद बचाव अभियान की प्रगति, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और प्रभावित श्रमिकों के लिए चल रही राहत व्यवस्था की समीक्षा करना रहा। आईएएनएस की रिपोर्ट भी धामी के घटनास्थल निरीक्षण और रेस्क्यू अभियान की समीक्षा की पुष्टि करती है।
हादसा गुरुवार शाम चमोली के मायापुर, पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगाड-पिपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुआ। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक टनल के भीतर अचानक पानी और मलबा घुसने से वहां काम कर रहे श्रमिकों के लिए हालात गंभीर हो गए। घटना के बाद पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, फायर सर्विस और दूसरी बचाव एजेंसियों को अभियान में लगाया गया।
14 अगस्त की सुबह तक उपलब्ध कई रिपोर्टों में सात श्रमिकों की मौत की पुष्टि की गई है। तीन श्रमिकों के अब भी लापता होने की जानकारी भी कई रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि घायलों और सुरक्षित निकाले गए श्रमिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़े आने तक संख्या को सावधानी से देखना जरूरी है।
इंडिया टुडे ने सात मौतों, 14 घायलों और तीन श्रमिकों के फंसे होने की जानकारी दी है। वहीं एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में सात मौतों के साथ 12 लोगों के बाहर निकाले जाने और तीन लोगों के लापता होने की बात कही गई है। आंकड़ों में यह अंतर बताता है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान प्रशासनिक आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे थे।
ऐसे हालात में सबसे अहम प्राथमिकता लापता श्रमिकों तक पहुंचना है। टनल के भीतर पानी, गाद और मलबे की स्थिति ने बचाव टीमों की रफ्तार को प्रभावित किया है। रेस्क्यू एजेंसियां प्रभावित हिस्से तक पहुंच बनाने और अंदर फंसे लोगों की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों और बचाव एजेंसियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली। इससे पहले उन्होंने आपदा परिचालन केंद्र से भी स्थिति की समीक्षा की थी। सरकार का फोकस रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने और सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन बनाए रखने पर है।
घायलों को अलग-अलग चिकित्सा केंद्रों में इलाज दिया जा रहा है। गंभीर मरीजों के लिए बड़े अस्पतालों को अलर्ट पर रखने की जानकारी भी सामने आई है। जिला प्रशासन और मेडिकल टीमों के लिए प्राथमिक चुनौती राहत अभियान के साथ-साथ घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार टनल में काम चल रहा था, तभी अचानक पानी और मलबे का तेज प्रवाह अंदर पहुंचा। शुरुआती रिपोर्टों में पानी के रिसाव, भू-स्खलन और भूमिगत भूगर्भीय अस्थिरता जैसे संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है, लेकिन हादसे की अंतिम वजह अभी स्थापित नहीं हुई है। इसलिए किसी एक कारण को अंतिम निष्कर्ष के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी।
यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। चमोली पहले भी भूस्खलन, बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित रहा है। लेकिन किसी विशेष हादसे को केवल प्राकृतिक कारण बताकर निर्माण सुरक्षा से जुड़े सवालों को खत्म नहीं किया जा सकता।
अब जांच में यह देखना अहम होगा कि घटना के समय टनल के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या थे, पानी की निगरानी किस स्तर पर हो रही थी, चेतावनी प्रणाली सक्रिय थी या नहीं और श्रमिकों की निकासी के लिए कौन-सी व्यवस्था मौजूद थी। इन सवालों के जवाब आधिकारिक जांच और तकनीकी आकलन से ही स्पष्ट होंगे।
विष्णुगाड-पिपलकोटी जलविद्युत परियोजना THDC इंडिया लिमिटेड की निर्माणाधीन परियोजनाओं में शामिल है। कंपनी के मुताबिक यह चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर आधारित 4x111 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है। परियोजना में 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल और लगभग 3.07 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल का प्रावधान है।
THDC के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना निर्माणाधीन है और इसकी पहली यूनिट के दिसंबर 2027 तथा चौथी और अंतिम यूनिट के जून 2028 तक चालू होने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना की डिजाइन एनर्जी 1,657.09 मिलियन यूनिट बताई गई है।
परियोजना की संरचना से साफ है कि इसमें बड़े पैमाने पर भूमिगत निर्माण कार्य शामिल है। ऐसे में सुरंग सुरक्षा, जल प्रवाह की निगरानी, भूगर्भीय सर्वेक्षण, वेंटिलेशन, आपातकालीन निकासी और अर्ली वार्निंग सिस्टम की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
हादसे के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल यह नहीं है कि पानी और मलबा टनल में कैसे पहुंचा। सवाल यह भी है कि संभावित खतरे की पहचान कितनी पहले हुई और श्रमिकों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए सिस्टम कितनी तेजी से सक्रिय हुआ।
THDC ने जुलाई 2025 में इसी परियोजना में बाढ़ जैसी आपात स्थिति को लेकर एक मल्टी-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित की थी। कंपनी के अनुसार उस अभ्यास में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ, स्थानीय पुलिस, परियोजना कर्मियों और एचसीसी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। अभ्यास का उद्देश्य टनल के भीतर संभावित बाढ़ जैसी स्थिति में अर्ली फ्लड वार्निंग सिस्टम और रेस्क्यू तैयारियों को परखना था।
यह तथ्य मौजूदा हादसे के संदर्भ में खास महत्व रखता है। हालांकि केवल मॉक ड्रिल का होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वास्तविक हादसे में सुरक्षा व्यवस्था विफल हुई। इसके लिए तकनीकी जांच, लॉग डेटा, चेतावनी प्रणाली के रिकॉर्ड और साइट से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा जरूरी होगी।
चमोली टनल हादसा उत्तराखंड में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस को फिर सामने ला सकता है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, भूस्खलन का जोखिम और भूगर्भीय जटिलता सुरंग निर्माण को सामान्य मैदानी निर्माण परियोजनाओं से अलग बनाती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर जलविद्युत परियोजना असुरक्षित है। लेकिन प्रत्येक परियोजना में जोखिम आकलन, निर्माण पद्धति और आपातकालीन प्रतिक्रिया को स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों के अनुरूप लगातार अपडेट करना जरूरी है।
इस हादसे से एक और नीति संबंधी सवाल जुड़ता है। अगर किसी क्षेत्र में पहले से भूगर्भीय अस्थिरता के संकेत मौजूद हों, तो निर्माण की गति और सुरक्षा मानकों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। यह सवाल केवल उत्तराखंड नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में चल रही सुरंग और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए अहम है।
तत्काल प्राथमिकता लापता श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद हादसे के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा जरूरी होगी। जांच में परियोजना प्रबंधन, ठेकेदार, सुरक्षा प्रोटोकॉल और साइट पर मौजूद चेतावनी प्रणालियों की भूमिका की समीक्षा होनी चाहिए।
एचसीसी परियोजना में निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी है, जबकि THDC परियोजना की प्रमुख संस्था है। उपलब्ध रिपोर्टों में एचसीसी के अधीन श्रमिकों के काम करने की जानकारी सामने आई है। जिम्मेदारी तय करने से पहले सभी पक्षों के रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष देखना जरूरी होगा।
आने वाले घंटों में सबसे अहम अपडेट रेस्क्यू अभियान से जुड़े होंगे। लापता श्रमिकों का पता लगाना, टनल के भीतर पानी और मलबे की स्थिति को नियंत्रित करना तथा बचावकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अभियान की प्राथमिकता रहेगी।
इसके बाद प्रशासन और परियोजना प्रबंधन को हादसे का विस्तृत तकनीकी आकलन करना होगा। अगर जांच में सुरक्षा प्रोटोकॉल में कमी सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने के साथ भविष्य की परियोजनाओं के लिए सुरक्षा मानकों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
चमोली का THDC टनल हादसा फिलहाल सबसे पहले एक मानवीय त्रासदी है। सात श्रमिकों की मौत की पुष्टि और कुछ लोगों के लापता होने की स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन सर्वोच्च प्राथमिकता है। आंकड़ों में अलग-अलग रिपोर्टों के बीच अंतर होने के कारण अंतिम सरकारी आंकड़े का इंतजार भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का घटनास्थल पहुंचकर अभियान का जायजा लेना प्रशासनिक निगरानी का संकेत है, लेकिन हादसे की वास्तविक जवाबदेही और कारणों का निर्धारण जांच के बाद ही संभव होगा। इस समय सबसे जरूरी सवाल यह है कि लापता श्रमिकों तक सुरक्षित पहुंच कैसे बनाई जाए और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं का जोखिम किस तरह कम किया जाए।
हादसा उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में विष्णुगाड-पिपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुआ।
14 अगस्त की सुबह तक उपलब्ध कई रिपोर्टों में सात श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई थी।
कई ताज़ा रिपोर्टों में तीन श्रमिकों के लापता होने की जानकारी दी गई है। रेस्क्यू अभियान उनके लिए जारी था।
प्रारंभिक रिपोर्टों में टनल के भीतर पानी और मलबा घुसने की बात सामने आई है। भू-स्खलन और पानी के अचानक प्रवाह को संभावित कारण बताया गया है, लेकिन अंतिम वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की और अधिकारियों तथा बचाव एजेंसियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।