इमरान खान के इलाज पर क्रिकेट जगत एकजुट, सरकार से अपील
गावस्कर-कपिल समेत दिग्गजों ने इमरान के इलाज की मांग की
इमरान खान की सेहत पर बढ़ी चिंता, क्रिकेट दिग्गजों ने लिखा पत्र
इमरान खान की चिकित्सा देखभाल को लेकर 21 पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखा है। गावस्कर और कपिल देव समेत दिग्गजों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक मेडिकल बोर्ड से स्वतंत्र जांच, उचित इलाज और पारिवारिक मुलाकातों की बहाली की मांग की है।
इस्लामाबाद/नई दिल्ली | 25 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 विश्व कप विजेता कप्तान इमरान खान की चिकित्सा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत के पूर्व दिग्गजों ने पाकिस्तान सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। 21 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखकर खान को मानवीय व्यवहार, उचित चिकित्सा सुविधा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक स्वतंत्र मेडिकल जांच उपलब्ध कराने की अपील की है।
इस अपील में भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर, कपिल देव और दिलीप वेंगसरकर भी शामिल हैं। इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज, श्रीलंका और दूसरे क्रिकेट देशों के पूर्व कप्तानों ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अपील ऐसे समय आई है जब 73 वर्षीय इमरान खान को जेल से अस्पताल ले जाने और फिर कुछ घंटों बाद वापस जेल भेजने को लेकर पाकिस्तान में कानूनी और सियासी विवाद चल रहा है। सरकार और खान के समर्थकों ने घटनाक्रम की अलग-अलग तस्वीर पेश की है।
पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक इमरान खान की पूरी मेडिकल जांच कराई जाए। इसमें ऐसा मेडिकल बोर्ड शामिल करने की मांग है जिसमें उनके निजी डॉक्टर और उनकी बहन डॉ. उज़मा खान भी शामिल हों।
पत्र में खान के लिए नियमित पारिवारिक मुलाकातों को भी सुनिश्चित करने की अपील की गई है। क्रिकेट दिग्गजों का कहना है कि अदालत के निर्देशों का सम्मान किया जाना चाहिए और चिकित्सा प्रक्रिया स्वतंत्र तथा पूरी होनी चाहिए।
यह अपील राजनीतिक समर्थन के रूप में पेश नहीं की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने अपने रुख को एक पूर्व साथी क्रिकेटर और विश्व कप विजेता कप्तान की मानवीय और चिकित्सा जरूरतों से जुड़ा बताया है।
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में इमरान खान को अस्पताल ले जाकर विशेषज्ञ चिकित्सा जांच कराने का निर्देश दिया था। आदेश के मुताबिक उन्हें इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में जांच और जरूरत के मुताबिक उपचार मिलना था। अदालत के निर्देश में खान के निजी चिकित्सक को मेडिकल प्रक्रिया में शामिल करने और उनकी बहन के साथ साप्ताहिक मुलाकात की व्यवस्था का भी उल्लेख था। अदालत ने यह कदम उनके स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए उठाया था। लेकिन बाद में सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी। कानून मंत्री आज़म नज़ीर तरार ने सरकार की ओर से तर्क दिया कि निजी अस्पताल में स्थानांतरण को लेकर अदालत का फैसला कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े करता है।
20 अगस्त को इमरान खान को जेल से अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। घटनाक्रम के दौरान यह विवाद सामने आया कि उन्हें शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाएगा या सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी पीआईएमएस में जांच होगी।
पाकिस्तान सरकार के मुताबिक सुरक्षा कारणों से मेडिकल जांच पीआईएमएस में कराई गई। सरकार ने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों ने खान की जांच की, जिसमें कार्डियोलॉजिस्ट, नेत्र विशेषज्ञ और अन्य चिकित्सक शामिल थे। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित किया गया और 21 अगस्त की सुबह अदियाला जेल वापस भेज दिया गया। यही घटनाक्रम क्रिकेट दिग्गजों की नई अपील का केंद्रीय आधार बना। उनके मुताबिक अदालत द्वारा निर्धारित मेडिकल बोर्ड और प्रक्रिया को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए था।
पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों से इनकार किया है। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार सरकार ने कहा कि खान को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा दी गई और उनके जेल में रहते हुए बड़ी संख्या में मुलाकातें भी हुई हैं। सरकार ने सुरक्षा कारणों को निजी अस्पताल में लंबे समय तक रखने में बड़ी बाधा बताया। दूसरी ओर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई और खान के परिवार ने उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनकी पार्टी ने अस्पताल में कुछ जरूरी जांच नहीं होने का भी आरोप लगाया है, जिसमें सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी की मांग शामिल है। इस आरोप की स्वतंत्र चिकित्सा पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में स्थापित नहीं हुई है। यानी इस मामले में दो अलग नैरेटिव मौजूद हैं। सरकार चिकित्सा जांच पूरी होने और सुरक्षा जरूरतों की बात करती है, जबकि खान का परिवार और समर्थक अदालत के आदेश के अनुरूप अधिक स्वतंत्र और विस्तृत चिकित्सा प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उनकी कानूनी टीम और परिवार ने लंबे समय से उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई है, खासकर उनकी आंखों की समस्या के संबंध में। सरकार ने कई आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि चिकित्सकीय जांच में तत्काल गंभीर समस्या सामने नहीं आई। हाल की अस्पताल प्रक्रिया ने इस विवाद को फिर सामने ला दिया। अदालत ने जिस तरह की चिकित्सा निगरानी का निर्देश दिया था और जिस तरह से वास्तविक जांच हुई, उनके बीच अंतर को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस शुरू हो गई। इसी वजह से पूर्व क्रिकेट कप्तानों की अपील केवल चिकित्सा मुद्दा नहीं रह गई है। यह जेल में बंद एक पूर्व प्रधानमंत्री के अधिकारों, न्यायिक आदेशों के पालन और राजनीतिक तनाव से भी जुड़ गई है।
पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने इस अपील के समर्थन में कहा कि उनका उद्देश्य इमरान खान को बेहतर इलाज दिलाना है। उन्होंने खान के साथ अपने पुराने क्रिकेट संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि उन्हें सबसे अच्छा संभव इलाज मिले। कपिल ने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान में सक्रिय क्रिकेटरों से इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान की अपेक्षा करना आसान नहीं है, क्योंकि उन्हें वहीं रहना है। उनका रुख मुख्य रूप से चिकित्सा देखभाल और मानवीय व्यवहार पर केंद्रित रहा। यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंध अक्सर सियासी तनाव से प्रभावित रहे हैं। ऐसे माहौल में दोनों देशों के पूर्व क्रिकेट कप्तानों का एक साथ अपील करना अंतरराष्ट्रीय खेल समुदाय की अलग भूमिका को सामने लाता है।
सुनील गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर समेत भारत के पूर्व कप्तानों ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए। उनके साथ माइकल एथर्टन, एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ, ग्रेग चैपल, इयान चैपल, एडम गिलक्रिस्ट, क्लाइव लॉयड, अर्जुना रणतुंगा और दूसरे पूर्व कप्तान भी शामिल हैं। इनमें से कई खिलाड़ी अपने दौर में विश्व क्रिकेट के प्रमुख चेहरे रहे हैं। इसलिए उनका सामूहिक बयान क्रिकेट से बाहर भी अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर रहा है। फिर भी इसे किसी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पत्र का फोकस इमरान खान के स्वास्थ्य, मेडिकल जांच और अदालत के निर्देशों पर है।
यह पहली बार नहीं है जब पूर्व क्रिकेट कप्तानों ने इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर पाकिस्तान सरकार को लिखा है। अगस्त की अपील से पहले 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने करीब छह महीने पहले भी पत्र भेजा था। नई अपील इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हालिया सुप्रीम कोर्ट आदेश और अस्पताल घटनाक्रम के बाद आई है। यानी पूर्व कप्तानों ने पहले की चिंता को दोहराने के साथ मौजूदा कानूनी विवाद को भी अपने पत्र में शामिल किया है। यह भी बताता है कि मुद्दा केवल सोशल मीडिया चर्चा तक सीमित नहीं रहा। पूर्व खिलाड़ियों ने इसे औपचारिक पत्र के माध्यम से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सामने रखा है।
इमरान खान का राजनीतिक प्रभाव समझने के लिए उनका क्रिकेट करियर महत्वपूर्ण है। उन्होंने 1992 में पाकिस्तान को उसका पहला पुरुष क्रिकेट विश्व कप जिताया था और बाद में देश की राजनीति में प्रवेश किया। वह 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उनकी सरकार सत्ता से बाहर हुई। अगस्त 2023 से वह जेल में हैं और उनके खिलाफ कई मामलों में सजा तथा मुकदमे चल चुके हैं। खान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं, जबकि सरकार इन आरोपों से इनकार करती है। यही क्रिकेट और सियासत का संगम इस मौजूदा विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा संवेदनशील बनाता है। दुनिया के कई पूर्व क्रिकेट कप्तानों के लिए खान पहले उनके खेल के साथी और प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, जबकि पाकिस्तान में वह एक प्रमुख राजनीतिक शख्सियत भी हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इमरान खान की चिकित्सा जांच किस प्रक्रिया से आगे बढ़ती है। क्या अदालत द्वारा निर्देशित मेडिकल बोर्ड पूरी तरह सक्रिय होगा, क्या उनके निजी चिकित्सक इसमें शामिल होंगे और क्या परिवार को निर्धारित मुलाकातों की सुविधा मिलती रहेगी, ये अगले अहम बिंदु हैं। दूसरा सवाल पाकिस्तान सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच इस मामले में कानूनी स्थिति का है। सरकार ने अदालत के आदेश को चुनौती दी है, जबकि खान के समर्थक इसे पूरी तरह लागू कराने की मांग कर रहे हैं। तीसरा पहलू राजनीतिक है। इमरान खान की सेहत से जुड़ा हर घटनाक्रम पाकिस्तान में उनके समर्थकों, सरकार और विपक्षी राजनीति के बीच तनाव को प्रभावित कर सकता है।
इमरान खान का मामला अब केवल क्रिकेट की खबर नहीं है। उनकी सेहत, जेल की परिस्थितियां और अदालत के आदेश पाकिस्तान की न्यायिक और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े सवाल बन चुके हैं। फिर भी पूर्व क्रिकेट कप्तानों की अपील का महत्व अलग है। उन्होंने राजनीतिक समर्थन की भाषा के बजाय चिकित्सा देखभाल और मानवीय व्यवहार पर जोर दिया है। यही वजह है कि इस अपील को क्रिकेट की दुनिया और पाकिस्तान की राजनीति के बीच एक संवेदनशील संपर्क बिंदु के रूप में देखा जा रहा है।
इमरान खान की चिकित्सा देखभाल को लेकर 21 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों की अपील ने पाकिस्तान में चल रहे स्वास्थ्य और कानूनी विवाद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत तक पहुंचा दिया है। गावस्कर, कपिल देव और वेंगसरकर जैसे भारतीय दिग्गजों के साथ कई अन्य देशों के पूर्व कप्तानों ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अदालत के निर्देशों के मुताबिक स्वतंत्र मेडिकल जांच और उचित इलाज सुनिश्चित करने को कहा है।
सरकार का कहना है कि खान की जांच विशेषज्ञ डॉक्टरों ने की और उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया। दूसरी ओर खान का परिवार और पीटीआई अदालत द्वारा तय प्रक्रिया और उनकी चिकित्सा जरूरतों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इन दावों में कुछ हिस्सों की स्वतंत्र चिकित्सा पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। अब इस मामले की असली कसौटी यह होगी कि पाकिस्तान की सरकार और संबंधित संस्थाएं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को किस तरह लागू करती हैं। क्रिकेट दिग्गजों की अपील ने एक स्पष्ट संदेश दिया है, इमरान खान के राजनीतिक रुख पर बहस अलग हो सकती है, लेकिन जेल में उनकी चिकित्सा सुरक्षा और उचित इलाज का सवाल मानवीय और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।