SYNOPSIS
सहारनपुर की PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने का मामला करीब ₹17 करोड़ तक पहुंच गया है। ₹4.36 लाख की शुरुआती कमी से जांच शुरू हुई। पुलिस ने SIT बनाई है, RBI और बैंक भी जांच कर रहे हैं। तीन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं हुई।
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📍 सहारनपुर, उत्तर प्रदेश | 2 सितंबर 2026 | ✍️ Apurva Choudhary
PNB करेंसी चेस्ट में बढ़ता गया नकली नोटों का मामला
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक यानी PNB की करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों का मामला अब करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की बात सामने आई है। मामला उस समय खुला जब RBI को भेजी गई नकदी की गिनती में करीब ₹4.36 लाख की कमी सामने आई और इसके बाद बैंक ने करेंसी चेस्ट का ऑडिट शुरू कराया।
शुरुआती जांच में नकली नोटों का मूल्य करीब ₹7.40 करोड़ बताया गया था। बाद में करेंसी की गिनती और वेरिफिकेशन आगे बढ़ने के साथ संदिग्ध नकली नोटों की कुल कीमत करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। हालांकि जांच और reconciliation की प्रक्रिया जारी होने के कारण अंतिम रकम को अंतिम आंकड़ा मानना अभी उचित नहीं है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने Special Investigation Team यानी SIT गठित की है। जांच का दायरा सहारनपुर से आगे बढ़ाकर आसपास के जिलों के साथ हरियाणा और उत्तराखंड तक किया जा रहा है।
₹4.36 लाख की कमी से कैसे खुला मामला
मामले की शुरुआत एक अपेक्षाकृत छोटी नकदी कमी से हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, PNB की सहारनपुर करेंसी चेस्ट से RBI के जयपुर कार्यालय भेजी गई नकदी की गिनती के दौरान करीब ₹4.36 लाख का अंतर सामने आया।
रिपोर्टों के अनुसार, करीब ₹11.50 करोड़ की नकदी भेजी गई थी और उसकी reconciliation के दौरान कमी का पता चला। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने आंतरिक जांच शुरू की और करेंसी चेस्ट में रखी नकदी की दोबारा पड़ताल की।
ऑडिट के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध करेंसी सामने आने से मामला अचानक गंभीर हो गया। शुरुआती तौर पर 148 बंडलों में नकली नोट मिलने की जानकारी दी गई थी, जिनमें प्रत्येक बंडल में ₹500 के 1,000 नोट बताए गए। इससे शुरुआती गणना करीब ₹7.40 करोड़ बैठती थी।
इसके बाद गिनती और जांच आगे बढ़ी तो नकली नोटों की अनुमानित रकम करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई। यही वजह है कि इस मामले में अभी अंतिम आंकड़े को लेकर सावधानी जरूरी है।
करेंसी चेस्ट में नकली नोट पहुंचने का सवाल
इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी एक सुरक्षित बैंकिंग परिसर के अंदर कैसे पहुंची। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली नोट कब और किस रास्ते से करेंसी चेस्ट में आए तथा उनके बदले असली नोटों की कथित तौर पर क्या स्थिति हुई।
जांच में CCTV फुटेज, कैश मूवमेंट रिकॉर्ड, ऑडिट लेजर, करेंसी dispatch details, गिनती और reconciliation records की पड़ताल की जा रही है। इन रिकॉर्डों से यह समझने की कोशिश होगी कि करेंसी चेस्ट में नकदी के प्रवेश, भंडारण और बाहर भेजे जाने की प्रक्रिया के दौरान कहां अनियमितता हुई।
पुलिस यह भी देख रही है कि मामला किसी एक व्यक्ति की कथित गतिविधि तक सीमित था या इसमें अधिक लोगों की भूमिका हो सकती है। इसी वजह से जांच का दायरा अन्य कर्मचारियों और करेंसी चेस्ट तक पहुंच रखने वाले लोगों तक बढ़ सकता है।
तीन PNB अधिकारियों पर कार्रवाई
मामले में PNB ने तीन अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें वरिष्ठ मंडलीय प्रबंधक रवि कुमार कसे, करेंसी चेस्ट मैनेजर सुशील शर्मा और अमित कुमार के नाम सामने आए हैं। इनके खिलाफ पुलिस केस भी दर्ज हुआ है।
हालांकि निलंबन या FIR में नाम आना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। जांच एजेंसियों को यह स्थापित करना होगा कि संबंधित व्यक्तियों की वास्तविक भूमिका क्या थी और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।
पुलिस ने करेंसी चेस्ट से जुड़े एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर के खिलाफ भी अलग कार्रवाई की है। CCTV फुटेज के आधार पर उसके द्वारा करेंसी बंडलों से नोट निकालने का आरोप सामने आया है और उसके खिलाफ चोरी से संबंधित मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि हाउसकीपर के खिलाफ दर्ज मामला और बड़ी नकली करेंसी की कथित अदला-बदली किस हद तक एक-दूसरे से जुड़ी है, यह अभी जांच का विषय है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इस संबंध को अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया गया है।
SIT अब किन पहलुओं की जांच करेगी
SIT की जिम्मेदारी केवल नकली नोटों की गिनती तक सीमित नहीं होगी। जांच का प्रमुख केंद्र नकली करेंसी का स्रोत, करेंसी चेस्ट में उसका प्रवेश, असली नोटों की संभावित निकासी और इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की पहचान होगा।
पुलिस ने जांच को सहारनपुर के बाहर भी फैलाया है। हरियाणा और उत्तराखंड में संभावित संपर्कों तथा संबंधित लोगों की गतिविधियों की जांच की जा रही है। दो नामित बैंक अधिकारियों के हरियाणा से जुड़े होने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है।
जांचकर्ताओं के लिए यह स्थापित करना अहम होगा कि संदिग्ध नोट बैंक के अंदर कब पहुंचे। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि क्या नकली नोट पहले से किसी cash movement के दौरान सिस्टम में आए या करेंसी चेस्ट के अंदर ही कथित तौर पर असली और नकली नोटों की अदला-बदली हुई।
RBI और बैंक की अलग-अलग जांच
मामले में पुलिस जांच के साथ बैंक की departmental inquiry भी चल रही है। RBI की तरफ से भी करेंसी चेस्ट की जांच किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। 2 सितंबर को RBI की टीम के करेंसी चेस्ट पहुंचने और रिकॉर्ड तथा कर्मचारियों से पूछताछ करने की जानकारी भी प्रकाशित हुई है।
यह समानांतर जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि करेंसी चेस्ट बैंकिंग सिस्टम में नकदी के सुरक्षित भंडारण और movement का अहम हिस्सा होते हैं। इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध करेंसी मिलने से cash handling, access control और internal reconciliation mechanisms पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लेकिन इन सवालों का जवाब केवल नकली नोट मिलने से नहीं मिलता। जांच को यह भी निर्धारित करना होगा कि सिस्टम में कौन-सी प्रक्रिया टूटी, किस स्तर पर निगरानी विफल हुई और क्या किसी व्यक्ति ने जानबूझकर प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।
₹7.40 करोड़ और ₹17 करोड़ के आंकड़े में फर्क क्यों?
इस मामले की रिपोर्टिंग में दो अलग आंकड़े दिखाई दे रहे हैं—शुरुआत में ₹7.40 करोड़ और बाद में करीब ₹17 करोड़। यह विरोधाभास जरूरी नहीं कि दो अलग घटनाओं को दर्शाता हो; उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बाद की गिनती और verification के दौरान संदिग्ध नकली करेंसी की मात्रा बढ़ती गई।
इसलिए खबर को “₹17 करोड़ अंतिम रूप से साबित हो गए” की भाषा में पेश करना अभी जल्दबाजी होगी। ज्यादा सटीक स्थिति यह है कि चल रही जांच में नकली करेंसी का अनुमानित मूल्य करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जबकि अंतिम reconciliation अभी बाकी है।
यह अंतर आगे की जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर अतिरिक्त नोटों की जांच के बाद रकम बदलती है, तो FIR, बैंक की departmental inquiry और संभावित आर्थिक नुकसान का आकलन भी उसी के अनुसार प्रभावित हो सकता है।
क्या नकली नोट बाजार में पहुंच चुके थे?
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सुरक्षित नहीं है कि करेंसी चेस्ट में मिले सभी संदिग्ध नोट आम बाजार में circulation के लिए जारी हो चुके थे। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना भी है कि ये नोट केवल चेस्ट में मौजूद थे या उनका कोई हिस्सा बैंकिंग सिस्टम के जरिए आगे गया।
इसीलिए cash movement records और विभिन्न शाखाओं से आने-जाने वाली करेंसी की जांच की जा रही है। यदि किसी नोट का circulation स्थापित होता है, तो जांच का दायरा और गंभीर हो सकता है। फिलहाल इसे जांच के एक सवाल के रूप में देखना चाहिए, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।
बैंकिंग सिस्टम के लिए क्या संदेश?
यह मामला बैंकिंग सिस्टम में internal controls और cash security की अहमियत को सामने लाता है। करेंसी चेस्ट में नकदी की बड़ी मात्रा संभाली जाती है और उसकी counting, packing, storage तथा dispatch प्रक्रिया में कई स्तरों पर रिकॉर्ड तैयार होते हैं।
ऐसे में किसी बड़े mismatch का लंबे समय तक सामने नहीं आना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। CCTV और cash records की समीक्षा से यह पता लगाया जा सकता है कि कथित अनियमितता किस समय और किस प्रक्रिया में हुई।
हालांकि इस घटना के आधार पर पूरे बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि सहारनपुर के मामले में वास्तव में क्या हुआ और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
जांच में आगे क्या होगा
अब SIT के सामने सबसे बड़ा काम घटनाक्रम की पूरी कड़ी तैयार करना है। इसमें करेंसी चेस्ट में नकदी के आने से लेकर उसकी counting, storage, packing और RBI को भेजे जाने तक के records को मिलाना शामिल होगा।
जांचकर्ता CCTV फुटेज और कर्मचारियों की access details को cash records से cross-check कर सकते हैं। इसके साथ बैंक अधिकारियों के बयान, दस्तावेज़ और संभावित बाहरी संपर्कों की भी पड़ताल की जाएगी।
यदि जांच में पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर, जिन आरोपों की पुष्टि नहीं होती, उन्हें तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। यही इस मामले में निष्पक्ष रिपोर्टिंग की सबसे अहम कसौटी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।