स्वरा भास्कर ने ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य पर अपनी पुरानी आपत्ति फिर रखी। बयान पर विवाद बढ़ा तो उन्होंने सफाई दी कि रानी पद्मावती को कायर कहने का दावा गलत है।
नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने पुराने बयान को लेकर चर्चा में हैं। 31 अगस्त को दिल्ली के India International Centre में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य पर अपनी पुरानी आपत्ति दोहराई।
स्वरा ने बताया कि 2018 में फिल्म देखने के बाद उन्होंने भंसाली को खुला पत्र क्यों लिखा था। उनके मुताबिक फिल्म के क्लाइमैक्स में बड़ी संख्या में महिलाओं को जौहर करते दिखाने ने उन्हें परेशान किया था।
स्वरा के मुताबिक उनके सवाल का केंद्र जौहर करने वाली महिलाओं की व्यक्तिगत आलोचना नहीं, बल्कि फिल्म के दृश्य से निकलने वाला संदेश था।
उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि अगर यौन हिंसा की शिकार कोई महिला इस दृश्य को देखे तो वह इसे किस तरह समझेगी। उनका सवाल था कि क्या किसी महिला के साथ यौन हिंसा होने के बाद उसका जीवन खत्म मान लिया जाना चाहिए।
उन्होंने फिल्म के एक दृश्य का भी जिक्र किया, जिसमें गर्भवती महिला के पेट का क्लोज-अप दिखाया गया था। स्वरा ने बताया कि इस दृश्य ने उन्हें खास तौर पर परेशान किया था।
स्वरा ने कहा कि उन्होंने फिल्म देखने के तुरंत बाद प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने अपनी बात लिखने से पहले करीब पांच दिन इंतजार किया, ताकि यह तय कर सकें कि उनकी प्रतिक्रिया केवल तत्काल भावनात्मक असर नहीं है। इसके बाद उन्होंने भंसाली को खुला पत्र लिखा।
2018 में प्रकाशित इस पत्र में उन्होंने जौहर के चित्रण और महिलाओं की गरिमा को लेकर सवाल उठाए थे। पत्र की एक पंक्ति बाद में बड़े विवाद का केंद्र बन गई थी।
स्वरा ने अब कहा कि उनके पूरे तर्क के बजाय एक खास पंक्ति को सुर्खियों में ज्यादा जगह मिली और इससे उनके मूल तर्क की दिशा बदल गई।
31 अगस्त के कार्यक्रम की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्वरा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया शुरू हुई। कुछ लोगों ने उनके नजरिए को जौहर के ऐतिहासिक संदर्भ से अलग बताया।
आलोचकों का तर्क था कि मध्यकालीन युद्ध और महिलाओं की संभावित कैद या यौन दासता के संदर्भ में जौहर को आधुनिक समय की यौन हिंसा के अनुभव से सीधे जोड़ना उचित नहीं है। दूसरी ओर, कुछ लोगों ने स्वरा के सवाल को महिलाओं के जीवन, गरिमा और यौन हिंसा के बाद पुनर्वास के
नजरिए से महत्वपूर्ण बताया।
सोशल मीडिया पर बहस के दौरान कई टिप्पणियां व्यक्तिगत और अपमानजनक भी हो गईं। ऐसे बयानों को तथ्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में नहीं देखा जा सकता।
विवाद बढ़ने के बाद स्वरा भास्कर ने 1 सितंबर को एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी बात स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा। उनके मुताबिक उनके बयान का गलत अनुवाद और गलत अर्थ निकाला गया।
स्वरा ने यह भी कहा कि उनके कार्यक्रम के बयान को संदर्भ से हटाकर एक अलग नैरेटिव बनाया गया। उन्होंने लोगों से पूरी क्लिप सुनने और फिर प्रतिक्रिया देने की अपील की।
संजय लीला भंसाली की ‘पद्मावत’ जनवरी 2018 में रिलीज हुई थी। फिल्म मलिक मुहम्मद जायसी की 16वीं सदी की रचना ‘पद्मावत’ से प्रेरित थी और इसमें दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह प्रमुख भूमिकाओं में थे।
फिल्म रिलीज से पहले ही इसके कथानक और रानी पद्मावती के चित्रण को लेकर विरोध हुआ था। जौहर दृश्य भी फिल्म के सबसे ज्यादा बहस वाले हिस्सों में शामिल रहा।
स्वरा की 2018 की आलोचना ने इसी बहस को एक अलग सामाजिक और लैंगिक दृष्टिकोण दिया था।
स्वरा भास्कर इससे पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय के कारण सुर्खियों में रही हैं। उनके बयानों पर समर्थन और आलोचना दोनों देखने को मिले हैं।
हालिया रिपोर्टों में उनके पुराने बयानों और विवादों में हिजाब, CAA-NRC और दूसरे सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों से जुड़े उनके सार्वजनिक रुख का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन सभी मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग रही हैं और उन्हें एक ही विवाद की कड़ी के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
मौजूदा विवाद दो अलग सवालों को एक साथ ला रहा है। पहला सवाल है कि ‘पद्मावत’ में जौहर को किस तरह प्रस्तुत किया गया और उससे आज के दर्शकों तक क्या संदेश पहुंचता है।
दूसरा सवाल स्वरा के बयान की व्याख्या से जुड़ा है। स्वरा का कहना है कि उनका निशाना रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं पर नहीं था। वह फिल्म के नैरेटिव और महिलाओं के जीवन को यौन हिंसा तथा सम्मान की अवधारणा से जोड़ने के तरीके पर सवाल उठा रही थीं।
यह विवाद एक व्यापक सवाल भी सामने लाता है। ऐतिहासिक घटनाओं या परंपराओं को सिनेमा में पेश करते समय क्या उन्हें उनके दौर के सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में देखना चाहिए, या आधुनिक सामाजिक मूल्यों के आधार पर उनकी समीक्षा भी जरूरी है?
इस सवाल पर कोई एक सर्वमान्य नजरिया नहीं है। ‘पद्मावत’ का जौहर दृश्य इसी वजह से वर्षों बाद भी बहस पैदा करता है।
मौजूदा मामले में इतना स्पष्ट है कि स्वरा भास्कर ने अपनी पुरानी आपत्ति दोहराई है और बाद में अपने बयान की व्याख्या भी दी है। रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को उन्होंने कायर कहा था, यह दावा उन्होंने स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।