सोमवार, 22 जून 2026 को भारत में सोने के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जहां 24 कैरेट सोना ₹43 बढ़कर ₹14,651 प्रति ग्राम पहुंच गया। 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने में भी क्रमशः ₹40 और ₹32 की तेजी आई। पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद निवेशकों की खरीदारी लौटने से यह उछाल देखा गया। हालांकि, अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की आशंका के चलते कीमतों में बड़ी तेजी पर ब्रेक लगा हुआ है। चांदी की कीमतें इस दौरान स्थिर बनी रहीं।
सोने की कीमतों में सुधार की शुरुआत
पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारतीय सर्राफा बाजार के लिए राहत भरी रही। सोमवार, 22 जून 2026 को सोने की कीमतों में हल्की लेकिन महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेशकों के बीच फिर से भरोसा लौटता दिखाई दिया, जिससे बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला।
यह बढ़ोतरी भले ही बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह संकेत देती है कि सोना अब गिरावट के दौर से धीरे-धीरे बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर मिले-जुले संकेतों के बीच यह रिकवरी अहम मानी जा रही है।
क्या बदले आज के ताज़ा रेट
भारत में आज 24 कैरेट सोने की कीमत ₹14,651 प्रति ग्राम तक पहुंच गई, जो पिछले सत्र की तुलना में ₹43 अधिक है। वहीं 22 कैरेट सोना ₹13,430 प्रति ग्राम पर पहुंच गया है, जिसमें ₹40 की बढ़त देखी गई। 18 कैरेट सोने की कीमत भी बढ़कर ₹10,988 प्रति ग्राम हो गई।
दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह ₹250 प्रति ग्राम और ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम पर स्थिर बनी रही। यह स्थिरता बाजार में संतुलन और निवेशकों के सावधानीपूर्ण रुख को दर्शाती है।
क्यों बढ़े सोने के दाम
सोने की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण है पिछले सप्ताह की भारी गिरावट के बाद निवेशकों की वापसी। जब कीमतें नीचे आती हैं, तो कई निवेशक इसे खरीदारी के मौके के रूप में देखते हैं, जिसे “बार्गेन बाइंग” कहा जाता है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर रही। ऊर्जा की कीमतों में गिरावट से महंगाई के दबाव में कमी आती है, जिससे निवेशकों का रुझान सोने की ओर फिर से बढ़ सकता है।
ग्लोबल मार्केट का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में हल्की रिकवरी देखी गई। स्पॉट गोल्ड करीब 0.4% बढ़कर $4,176.34 प्रति औंस तक पहुंच गया। हालांकि, अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में गिरावट दर्ज की गई, जो यह दिखाता है कि बाजार अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा है। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसे गैर-इंटरेस्ट एसेट की मांग घट जाती है, जिससे इसकी कीमतों पर असर पड़ता है।
निवेशकों का बदलता रुख
पिछले कुछ दिनों में निवेशकों का रुख काफी बदलता हुआ नजर आया है। जहां पहले बिकवाली का दबाव था, वहीं अब धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ने लगी है। इसका मुख्य कारण है बाजार में स्थिरता की उम्मीद और सस्ते स्तर पर खरीदारी का मौका।
हालांकि, बड़े निवेशक अभी भी सतर्क हैं और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। यही वजह है कि तेजी सीमित बनी हुई है और बाजार में कोई बड़ी छलांग देखने को नहीं मिल रही।
विश्लेषकों की राय
कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, सोने की कीमतें अभी एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के पास हैं। यदि यह स्तर मजबूत रहता है, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और सुधार देखा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ₹1,42,700 से ₹1,44,700 का स्तर सोने के लिए मजबूत सपोर्ट है, जबकि ₹1,49,300 से ₹1,52,000 के बीच रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है। इसका मतलब है कि कीमतें इस दायरे में उतार-चढ़ाव कर सकती हैं।
चांदी क्यों स्थिर रही
जहां सोने में हल्की तेजी आई, वहीं चांदी की कीमतें स्थिर बनी रहीं। इसके पीछे एक कारण यह है कि चांदी का उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों में अधिक होता है, जिससे इसकी कीमतें अलग कारकों से प्रभावित होती हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि चांदी ने हालिया गिरावट के बावजूद बेहतर मजबूती दिखाई है और भविष्य में यह सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
क्या यह तेजी टिकेगी?
यह सवाल निवेशकों के मन में सबसे ज्यादा है कि क्या यह बढ़ोतरी स्थायी है या सिर्फ एक अस्थायी सुधार। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कहा जा सकता है कि बाजार अभी भी अनिश्चितता के दौर में है।
अगर वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है, तो सोने की कीमतों पर फिर से दबाव आ सकता है। वहीं अगर महंगाई बढ़ती है या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सोने की मांग में तेजी आ सकती है।
आम लोगों पर असर
सोने की कीमतों में यह बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है, खासकर उन लोगों के लिए जो शादी या निवेश के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि, कीमतों में अभी बड़ी तेजी नहीं आई है, इसलिए यह खरीदारी के लिए एक संतुलित समय माना जा सकता है। लेकिन निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा जरूरी होता है।
आगे का रास्ता
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेंगी। इसमें अमेरिका की मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमतें, और वैश्विक आर्थिक स्थिति प्रमुख भूमिका निभाएंगी।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार के रुझानों पर नजर रखें और जल्दबाजी में निर्णय न लें।
सोने की कीमतों में 22 जून को आई यह बढ़ोतरी बाजार में स्थिरता की ओर एक संकेत है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह से ट्रेंड रिवर्सल नहीं माना जा सकता।
निवेशकों की वापसी और वैश्विक संकेतों के बीच संतुलन बनता दिख रहा है, जिससे आने वाले समय में सोने के बाजार में और स्पष्ट दिशा सामने आ सकती है। फिलहाल, बाजार सतर्क आशावाद की स्थिति में है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।