मध्य प्रदेश के बैतूल में गर्भवती महिला की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने मृतका के दो मासूम बच्चों की प्रत्यक्षदर्शी गवाही को विश्वसनीय माना। मेडिकल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों ने भी अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत किया।
📍 बैतूल, मध्य प्रदेश
📰 Date: 01 अगस्त 2026
✍️ By Haris
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले में मृतका के दो छोटे बच्चों की प्रत्यक्षदर्शी गवाही को महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साक्ष्य मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 1 जून 2025 को बैतूल बाजार थाना क्षेत्र में हुई थी। आरोपी सोनू उर्फ मनक उइके अपने खेत पर बने मकान में मौजूद था। गेहूं बेचने को लेकर उसकी पत्नी बसंती से विवाद हुआ। अभियोजन के अनुसार आरोपी उस समय शराब के नशे में था।
विवाद बढ़ने पर आरोपी ने लकड़ी के डंडे से पत्नी पर कई वार किए। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें लगने से तीन माह की गर्भवती बसंती की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के समय दंपती के दोनों छोटे बच्चे घर में मौजूद थे। उन्होंने पूरी घटना अपनी आंखों से देखी। घबराए बच्चे अपने नाना गणेश के घर पहुंचे और घटना की जानकारी दी।
सूचना मिलने पर गणेश घटनास्थल पहुंचे। वहां आरोपी घर के बाहर लकड़ी का डंडा लिए खड़ा मिला। घर के भीतर बसंती घायल अवस्था में पड़ी थी और उसके सिर व मुंह से खून बह रहा था।
घटना की सूचना मिलने के बाद बैतूल बाजार पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को जिला अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने उसी दिन आरोपी को हिरासत में ले लिया। मामले की विवेचना उप निरीक्षक रामस्वरूप रघुवंशी ने की। जांच के दौरान घटनास्थल से भौतिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए गए। इन्हीं आधारों पर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
लोक अभियोजक नितिन मिश्रा के अनुसार सुनवाई के दौरान मृतका के दोनों बच्चों के बयान अदालत में दर्ज किए गए। बच्चों ने घटना का प्रत्यक्ष विवरण दिया, जिसे न्यायालय ने विश्वसनीय माना। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने भी अभियोजन पक्ष के दावों की पुष्टि की।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद्र थपलियाल की अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
यह फैसला दर्शाता है कि यदि बाल साक्षी का बयान स्पष्ट, स्वाभाविक और अन्य साक्ष्यों से पुष्ट हो, तो न्यायालय उसे विश्वसनीय मान सकता है। इस मामले में बच्चों की प्रत्यक्षदर्शी गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन के पक्ष को मजबूत किया।
विशेषज्ञ टिप्पणी उपलब्ध नहीं है।
अदालत के फैसले के बाद आरोपी को आजीवन कारावास की सजा का पालन करना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले में आगे की अपील संबंधी कोई सूचना सामने नहीं आई है।
यह मामला घरेलू हिंसा से जुड़े गंभीर अपराधों में प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों की अहमियत को रेखांकित करता है। अदालत ने केवल मौखिक गवाही पर नहीं, बल्कि मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और जांच के दौरान एकत्र वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ बच्चों के बयानों का समग्र मूल्यांकन किया। फैसला यह भी दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्येक साक्ष्य का परीक्षण उसके तथ्यों और विश्वसनीयता के आधार पर किया जाता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।