हमास ने मध्य पूर्व में जारी संघर्षों को खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया है और ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार संगठन ने पड़ोसी देशों को निशाना बनाने से बचने की अपील भी की। इससे क्षेत्रीय तनाव कम करने की उसकी सार्वजनिक स्थिति सामने आती है।
गाज़ा / मध्य पूर्व | 13 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच हमास ने क्षेत्र में सभी युद्धों और संघर्षों को खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया है। संगठन का यह रुख ईरान की उस व्यापक मांग से मेल खाता है जिसमें क्षेत्र में जारी सैन्य कार्रवाई रोकने और संघर्ष को बातचीत के जरिए समाप्त करने की बात कही गई है।
हालांकि, उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टिंग में हमास के इस ताज़ा बयान की पूरी शब्दावली की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। मार्च 2026 में हमास ने सार्वजनिक तौर पर ईरान से पड़ोसी देशों पर हमले रोकने की अपील की थी और साथ ही ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया था। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मध्य पूर्व में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए कदम उठाने की मांग की थी।
हमास और ईरान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और सैन्य संबंध रहे हैं। हालांकि मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान हमास का सार्वजनिक रुख पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा।
14 मार्च 2026 को हमास ने ईरान से पड़ोसी देशों को निशाना नहीं बनाने की अपील की थी। साथ ही उसने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया था।
यह रुख महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान के सैन्य अभियानों का दायरा केवल इजरायल तक सीमित नहीं रहा था। संघर्ष के दौरान खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में भी हमलों और सुरक्षा चिंताओं ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया।
इसलिए हमास का पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का आह्वान और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करने की अपील, दोनों को अलग-अलग पहलुओं के रूप में देखना जरूरी है।
ईरान लंबे समय से यह रुख रखता रहा है कि क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई का व्यापक अंत होना चाहिए। हालिया संघर्ष के संदर्भ में तेहरान ने अमेरिका की सैन्य मौजूदगी, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सैन्य हस्तक्षेपों को लेकर कई शर्तें रखी हैं।
अगस्त में ईरान की ओर से सामने आए बयानों में अमेरिका से क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप समाप्त करने और ईरान तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ युद्ध समाप्त करने की मांग शामिल रही है।
इस पृष्ठभूमि में हमास का क्षेत्रीय युद्धों को समाप्त करने का समर्थन ईरान की कूटनीतिक लाइन के साथ कुछ हद तक समानता दिखाता है। लेकिन इसे दोनों पक्षों की पूरी रणनीतिक स्थिति समान होने के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
मध्य पूर्व के मौजूदा संकट में गाज़ा युद्ध और ईरान से जुड़ा संघर्ष अलग-अलग मोर्चे होते हुए भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
ईरान हमास का लंबे समय से समर्थक रहा है। दूसरी ओर, इजरायल ने हमास को अपने प्रमुख सुरक्षा खतरों में रखा है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर लेबनान, यमन, इराक और गाज़ा से जुड़े अलग-अलग मोर्चों पर भी असर पड़ता रहा है।
इस वजह से ईरान और अमेरिका या इजरायल के बीच किसी भी सैन्य टकराव का असर गाज़ा की स्थिति पर भी पड़ सकता है। इसी तरह गाज़ा में युद्ध या संघर्षविराम की स्थिति पूरे क्षेत्रीय जियोपॉलिटिकल समीकरण को प्रभावित करती है।
हमास की मौजूदा सार्वजनिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संगठन ने ईरान के समर्थन के साथ-साथ पड़ोसी देशों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई थी।
यह संदेश खास तौर पर खाड़ी देशों के संदर्भ में महत्वपूर्ण था। हमास ने ईरान से अपने पड़ोसी देशों पर हमले रोकने की अपील की थी, जबकि तेहरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली कार्रवाई की आलोचना जारी रखी थी।
इससे एक ऐसी स्थिति सामने आती है जिसमें हमास ईरान के साथ राजनीतिक निकटता बनाए रखते हुए क्षेत्रीय युद्ध के विस्तार से दूरी का संदेश देता है।
इसे तत्काल किसी बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
The Washington Institute के एक विश्लेषण के अनुसार, 2026 के संघर्ष ने हमास के भीतर ईरान समर्थक और मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े अलग-अलग राजनीतिक रुझानों के बीच संतुलन को प्रभावित किया है। विश्लेषण में कहा गया है कि ईरान के कमजोर होने और क़तर तथा तुर्किये की भूमिका बढ़ने से हमास के भीतर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
इस आकलन से संकेत मिलता है कि हमास का ईरान के साथ रिश्ता महत्वपूर्ण है, लेकिन संगठन की पूरी राजनीतिक रणनीति केवल तेहरान पर निर्भर नहीं है।
मध्य पूर्व में एक युद्ध खत्म होने के बाद दूसरे मोर्चे पर संघर्ष जारी रहने की स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
गाज़ा, ईरान, लेबनान और लाल सागर से जुड़े मोर्चों के बीच तनाव बढ़ने पर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव ने इस जोखिम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान के साथ बातचीत और युद्ध समाप्त करने की कोशिशें इसी व्यापक संदर्भ में चल रही हैं। हालिया रिपोर्टिंग में अमेरिकी और ईरानी पक्षों के बीच बातचीत को लेकर गतिरोध और होर्मुज़ को फिर से खोलने से जुड़ी शर्तों का उल्लेख हुआ है।
हमास की ओर से क्षेत्रीय युद्धों के अंत की अपील एक राजनीतिक संदेश भी है।
एक तरफ संगठन ईरान के साथ अपनी निकटता और तेहरान के आत्मरक्षा के दावे का समर्थन करता है। दूसरी तरफ पड़ोसी देशों पर हमले रोकने की अपील करके वह व्यापक क्षेत्रीय युद्ध के विस्तार से दूरी का संकेत देता है।
यह अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर क्षेत्रीय शक्तियां युद्ध के विस्तार को रोकने और अलग-अलग मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करने की दिशा में सहमति बनाती हैं, तो गाज़ा में किसी स्थायी राजनीतिक व्यवस्था पर बातचीत की गुंजाइश बढ़ सकती है।
लेकिन यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी। गाज़ा के भविष्य के शासन, हमास के हथियारों, इजरायली सुरक्षा चिंताओं और फिलिस्तीनी राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे अभी भी विवाद के केंद्र में हैं। Al Jazeera ने भी क्षेत्रीय डी-एस्केलेशन के बावजूद गाज़ा में हमास के हथियारों और भविष्य के शासन को लेकर गतिरोध को बड़ी चुनौती बताया है।
इजरायल की सरकार ने हमास को लेकर अब तक सख्त सुरक्षा रुख अपनाया है। हालिया अमेरिकी प्रस्तावों के संदर्भ में भी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास के निरस्त्रीकरण को महत्वपूर्ण शर्त के तौर पर रखा है।
इसलिए हमास का युद्ध खत्म करने का आह्वान अपने आप में युद्धविराम या स्थायी शांति समझौते के बराबर नहीं है।
दोनों पक्षों के बीच मूल राजनीतिक और सुरक्षा विवाद अभी मौजूद हैं। यही वजह है कि किसी बयान को अंतिम कूटनीतिक समझौते के संकेत के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी।
क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने की मांग और वास्तविक युद्धविराम के बीच बड़ा अंतर है।
युद्ध खत्म करने के लिए केवल एक संगठन का बयान पर्याप्त नहीं होता। इसमें इजरायल, ईरान, अमेरिका, फिलिस्तीनी पक्ष, अरब देश और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका होती है।
इसके अलावा युद्धविराम की घोषणा और उसके टिकाऊ होने के बीच भी अंतर है। सैन्य गतिविधियों की निगरानी, कैदियों और बंधकों से जुड़े मुद्दे, मानवीय सहायता, सीमा नियंत्रण और राजनीतिक व्यवस्था जैसे सवाल किसी भी समझौते को जटिल बनाते हैं।
अगर हमास क्षेत्रीय युद्ध समाप्त करने की अपनी मांग को लगातार दोहराता है, तो यह संगठन के सार्वजनिक कूटनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बन सकता है।
ईरान की तरफ से भी क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई समाप्त करने और अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को लेकर मांगें जारी रहती हैं, तो दोनों पक्षों के बयानों में कुछ समानता दिखाई दे सकती है। लेकिन इससे किसी औपचारिक गठबंधन या संयुक्त कूटनीतिक पहल का निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा।
आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण संकेत अमेरिका-ईरान बातचीत, गाज़ा की स्थिति और इजरायल की सैन्य रणनीति से मिलेंगे। अगर इन तीनों मोर्चों पर तनाव कम होता है, तो क्षेत्रीय डी-एस्केलेशन की गुंजाइश बढ़ेगी।
हमास ने क्षेत्र में जारी संघर्षों को समाप्त करने की मांग का समर्थन किया है और ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार को लेकर भी समर्थन जताया है। मार्च में संगठन ने ईरान से पड़ोसी देशों पर हमले रोकने की अपील की थी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्रीय युद्ध खत्म करने के लिए कदम उठाने को कहा था।
मौजूदा हालात में यह बयान महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे स्थायी शांति समझौते या हमास-ईरान की नई संयुक्त रणनीति के प्रमाण के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टिंग से इतना स्पष्ट है कि हमास सार्वजनिक तौर पर क्षेत्रीय युद्ध के विस्तार को रोकने और संघर्ष खत्म करने की बात कर चुका है। इसके आगे के राजनीतिक और कूटनीतिक असर का आकलन आने वाले बयानों और वास्तविक सैन्य गतिविधियों के आधार पर करना होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।