वॉशिंगटन, अमेरिका | 3 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका की निगरानी क्षमता को लेकर बड़ा दावा किया है। 2 सितंबर 2026 को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान में हो रही गतिविधियों पर बेहद करीबी नजर रखता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरानी लोग अमेरिका की निगरानी से बचकर बाथरूम तक नहीं जा सकते।
ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच आई है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरान पर दोबारा हमला करने के लिए तैयार है।
ट्रंप ने अमेरिकी निगरानी क्षमता का जिक्र करते हुए दावा किया कि अमेरिका ईरान में हो रही गतिविधियों को देख रहा है।
उन्होंने कहा कि ईरान रडार सिस्टम, मिसाइल सिस्टम और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने से जुड़ी क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा था। ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी हमलों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास ईरान द्वारा तैयार किए जा रहे नए सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया।
ट्रंप ने अमेरिकी खुफिया निगरानी को लेकर कहा कि अमेरिका ईरान की गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि ईरानी लोग “बाथरूम तक नहीं जा सकते” बिना अमेरिकी निगरानी के।
यह बयान ट्रंप का दावा है। अमेरिकी खुफिया क्षमताओं की वास्तविक सीमा या ईरान के भीतर हर गतिविधि की निगरानी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण का भी दावा किया। उनके मुताबिक अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों के जरिए हर दिन बड़ी मात्रा में
तेल ले जाने वाले जहाजों को निकाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कभी-कभी ईरान ड्रोन हमला करता है, लेकिन अमेरिकी सेना उन्हें मार गिराती है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम समुद्री मार्ग है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल
आपूर्ति और शिपिंग पर पड़ सकता है।
ट्रंप के मुताबिक ईरान हालिया अमेरिकी हमलों के बाद अपने रडार और मिसाइल सिस्टम को दोबारा तैयार करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी निगरानी तंत्र ने इन गतिविधियों का पता लगाया और कुछ सैन्य उपकरणों को तैयार होने से पहले ही निशाना बनाया।
हालांकि इन दावों में शामिल प्रत्येक सैन्य विवरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे के रूप में ही देखना चाहिए।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान के साथ मौजूदा टकराव फिर बढ़ता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मौजूदा संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर फिर हमला कर सकता है।
इससे अमेरिकी रणनीति में दो समानांतर संदेश दिखाई देते हैं। एक तरफ वॉशिंगटन संघर्ष को लंबा खींचने से बचने की बात कर रहा है, दूसरी तरफ ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने का संकेत भी दे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कुवैत, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरानी पक्ष ने अमेरिकी हमलों को अपने जवाबी सैन्य अभियान का कारण बताया है।
हालांकि दोनों पक्षों की सैन्य क्षमताओं, हमलों के प्रभाव और क्षति से जुड़े दावों को अलग-अलग स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित करना जरूरी है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया के ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय तक सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट से वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
ट्रंप का यह दावा कि अमेरिका इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण रखता है, इसलिए केवल सैन्य बयान नहीं है। इसका सीधा संबंध वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा से भी है। हालांकि “पूर्ण नियंत्रण” की स्थिति को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने के लिए अलग सैन्य और समुद्री स्रोतों की पुष्टि जरूरी है।
मौजूदा घटनाक्रम बताता है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष केवल सैन्य हमलों तक सीमित नहीं है। प्रतिबंध, तेल निर्यात, समुद्री मार्ग और खुफिया निगरानी भी टकराव के प्रमुख हिस्से बन चुके हैं।
वॉशिंगटन ईरान की आर्थिक क्षमता को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं ईरान अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और हमलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
इस बीच ट्रंप का निगरानी संबंधी बयान अमेरिकी खुफिया और तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करने की राजनीतिक कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है। यह एक विश्लेषण है, स्थापित तथ्य नहीं।
सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा सैन्य टकराव किस दिशा में जाता है।
यदि होर्मुज़ क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि दोनों पक्ष कूटनीतिक रास्ता तलाशते हैं तो सैन्य तनाव को सीमित करने की संभावना बनेगी।
फिलहाल ट्रंप के बयान से अमेरिका का संदेश स्पष्ट है कि वॉशिंगटन ईरान की सैन्य गतिविधियों पर दबाव बनाए रखना चाहता है और जरूरत पड़ने पर आगे सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।