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ट्रंप की गुप्त उड़ान, ईरानी खतरे में एयर फोर्स वन बना डिकॉय

Shah Times 2026-08-11 11:44:34
ट्रंप की गुप्त उड़ान, ईरानी खतरे में एयर फोर्स वन बना डिकॉय

ट्रंप की गुप्त उड़ान, ईरानी खतरे में एयर फोर्स वन बना डिकॉय

ईरान के डर से ट्रंप को कैटरिंग ट्रक से कराया गया शिफ्ट

एयर फोर्स वन में ट्रंप नहीं थे, पत्रकारों को भी नहीं थी खबर


ईरानी हत्या की धमकी के बाद डोनाल्ड ट्रंप को तुर्किये से गुप्त सैन्य विमान में ब्रिटेन ले जाया गया। पुराने एयर फोर्स वन को डिकॉय के तौर पर इस्तेमाल किया गया। पत्रकार और कुछ व्हाइट हाउस कर्मचारी विमान में ट्रंप के होने की गलतफहमी में रहे। व्हाइट हाउस ने सुरक्षा कारणों की पुष्टि की।


वॉशिंगटन | 11 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स 
By Mohd Haris


ट्रंप की गुप्त उड़ान ने अमेरिकी राष्ट्रपति सुरक्षा पर उठाए सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जुलाई में तुर्किये से वापसी के दौरान एक ऐसी गुप्त उड़ान भरी, जिसकी जानकारी सार्वजनिक तौर पर मौजूद उनके साथ चल रहे पत्रकारों और कुछ व्हाइट हाउस कर्मचारियों को भी नहीं थी। द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़ी एक विश्वसनीय हत्या की धमकी के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने ऐसा ऑपरेशन तैयार किया, जिसमें पुराने एयर फोर्स वन को डिकॉय के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

ट्रंप ने अंकारा में कैमरों के सामने पुराने एयर फोर्स वन में सवार होने का दृश्य दिया। इसके बाद उन्हें विमान के दूसरे हिस्से से एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक के जरिए बाहर निकाला गया और एक छोटे सी-32ए सैन्य विमान तक पहुंचाया गया। इस विमान से उन्होंने ब्रिटेन के रॉयल एयर फोर्स मिल्डेनहॉल बेस तक यात्रा की।

असल ऑपरेशन क्या था

घटनाक्रम 8 जुलाई 2026 को हुआ, जब ट्रंप तुर्किये में नाटो समिट के बाद अमेरिका लौट रहे थे। इससे एक दिन पहले वह कतर से मिले नए और रेट्रोफिट किए गए बोइंग 747 विमान से अंकारा पहुंचे थे। वापसी के लिए उन्होंने अचानक पुराने बेबी-ब्लू एयर फोर्स वन का इस्तेमाल करने की घोषणा की।

उस समय ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि नया विमान ब्रिटेन के मिल्डेनहॉल बेस पर जाएगा, ताकि वहां तैनात अमेरिकी सैनिक उसे देख सकें। उन्होंने पुराने विमान से उड़ान भरने को पुराने समय की याद से जोड़ा था। बाद में सामने आया कि यह पूरी तस्वीर नहीं थी।

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रंप पुराने एयर फोर्स वन पर चढ़े, लेकिन कुछ ही देर बाद एक कैटरिंग ट्रक को विमान के दूसरे दरवाजे तक लाया गया। ट्रक को हाइड्रोलिक सिस्टम के जरिए विमान के दरवाजे की ऊंचाई तक उठाया गया और ट्रंप तथा उनके कुछ सहयोगियों को उसी रास्ते से बाहर निकाला गया।

इसके बाद ट्रंप सी-32ए पर सवार हुए। यह विमान एयर फोर्स का छोटा सैन्य परिवहन विमान है, जिसका इस्तेमाल वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की यात्रा के लिए भी होता है। दूसरी तरफ पुराने एयर फोर्स वन पर पत्रकार और कुछ कर्मचारी मौजूद रहे। उन्हें बताया गया कि विमान में राष्ट्रपति मौजूद हैं।

एयर फोर्स वन डिकॉय क्यों बना

इस ऑपरेशन का केंद्रीय मकसद राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन छिपाना था। अगर किसी संभावित हमलावर को यह पता हो कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं, तो विमान और उसके रूट को निशाना बनाने का जोखिम बढ़ सकता है।

द वॉशिंगटन पोस्ट ने अमेरिकी अधिकारियों और उसके द्वारा देखी गई सामग्री के आधार पर बताया कि यह कदम ट्रंप के खिलाफ ईरानी हत्या की धमकी से जुड़ा था। एसोसिएटेड प्रेस ने रिपोर्ट की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की, लेकिन उसने व्हाइट हाउस से सुरक्षा संबंधी प्रतिक्रिया हासिल की और ऑपरेशन से जुड़े कई घटनाक्रमों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग की।

रॉयटर्स ने भी वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के आधार पर बताया कि खतरे के चलते ट्रंप को सी-32ए में गुप्त रूप से स्थानांतरित किया गया था। व्हाइट हाउस ने इस ऑपरेशन के हर विवरण की पुष्टि नहीं की, लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए ऐसे उपाय किए जाने की बात कही।

पत्रकारों को क्यों रखा गया अनजान

इस घटनाक्रम का सबसे असामान्य पहलू यह है कि राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को भी पूरी जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयर फोर्स वन के प्रेस केबिन में मौजूद पत्रकारों से उड़ान के दौरान खिड़कियों के शेड बंद रखने को कहा गया था।

ट्रंप के गुप्त रूप से विमान बदलने के बाद पत्रकारों को यही धारणा रही कि राष्ट्रपति उसी विमान में हैं। सी-32ए पहले मिल्डेनहॉल पहुंच गया, जबकि पुराने एयर फोर्स वन ने कुछ मिनट बाद वहां लैंड किया। इसके बाद ट्रंप को पुराने एयर फोर्स वन से उतरते हुए कैमरों ने देखा, जिससे बाहर से यही लगा कि उन्होंने उसी विमान से यात्रा की थी।

यहां एक अहम सवाल उठता है कि सुरक्षा के लिहाज से सूचना को सीमित रखना कितना जरूरी था और प्रेस पूल के सदस्यों को किस स्तर तक जानकारी दी जानी चाहिए थी। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में ऑपरेशनल गोपनीयता जरूरी होती है, लेकिन राष्ट्रपति यात्रा की पारदर्शिता और पत्रकारों की सुरक्षा भी अलग मुद्दे हैं।

ईरान का खतरा कितना गंभीर था

इस ऑपरेशन का संदर्भ अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव से जुड़ा है। ट्रंप की तुर्किये यात्रा ऐसे समय हुई जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ था।

अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से ईरान को अमेरिकी हितों और अमेरिकी कर्मियों के लिए सुरक्षा चुनौती के रूप में पेश करता रहा है। फरवरी 2026 में व्हाइट हाउस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमताओं और क्षेत्रीय गतिविधियों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था।

जुलाई में ट्रंप ने खुद पत्रकारों से कहा था कि वह ईरान के लिए एक प्रमुख हत्या लक्ष्य हैं। उसी समय उन्होंने पुराने एयर फोर्स वन से ब्रिटेन जाने का फैसला किया था। उस समय ट्रंप ने सुरक्षा कारणों को सीधे तौर पर विमान बदलने की वजह नहीं माना था।

अब सामने आई जानकारी से संकेत मिलता है कि सुरक्षा चिंताएं उस फैसले के पीछे पहले सार्वजनिक रूप से बताए गए कारणों से अधिक गंभीर थीं।

नया कतर वाला विमान भी चर्चा में क्यों आया

इस पूरे मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कतर की ओर से मिले नए बोइंग 747 विमान की सुरक्षा व्यवस्था है। अमेरिका ने इसे अस्थायी राष्ट्रपति विमान के तौर पर तैयार किया है। इसके रेट्रोफिट पर करीब 400 मिलियन डॉलर खर्च किए गए।

रिपोर्टों में पहले ही सवाल उठ चुके थे कि इस विमान में पुराने एयर फोर्स वन में मौजूद कुछ मिसाइल डिटेक्शन और काउंटरमेजर सिस्टम शामिल नहीं हैं। अमेरिकी एयर फोर्स ने कहा था कि तेज रेट्रोफिट के दौरान कुछ जटिल इंजीनियरिंग बदलाव जानबूझकर नहीं किए गए, जबकि सुरक्षा और सुरक्षित कम्युनिकेशन से समझौता नहीं किया गया।

व्हाइट हाउस ने नए विमान को उच्च स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल से लैस बताया। कम्युनिकेशंस डायरेक्टर स्टीव च्युंग ने कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए उपलब्ध हर उपाय का इस्तेमाल किया जाता है।

इसलिए यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि कतर से मिला विमान असुरक्षित था। उपलब्ध रिकॉर्ड इतना जरूर दिखाता है कि राष्ट्रपति की तुर्किये से वापसी के दौरान अमेरिकी सुरक्षा तंत्र ने पुराने विमान और एक अलग सैन्य विमान का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित समझा।

यह तरीका पहली बार नहीं अपनाया गया

राष्ट्रपति की यात्रा को छिपाने के लिए डिकॉय विमान का इस्तेमाल अमेरिकी इतिहास में बिल्कुल नया तरीका नहीं है। रॉयटर्स के अनुसार, साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी एक ऐसा ऑपरेशन किया गया था, जिसमें आधिकारिक एयर फोर्स वन को डिकॉय के रूप में इस्तेमाल किया गया था और क्लिंटन ने अलग विमान से यात्रा की थी।

अंतर यह है कि इस बार ऑपरेशन ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव का जोखिम मौजूद था। तुर्किये की भौगोलिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह ईरान के साथ सीमा साझा करता है।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ईरान के पास ऐसे मिसाइल और ड्रोन सिस्टम हैं जिनकी पहुंच तुर्किये तक हो सकती है। हालांकि, ब्रिटेन तक उसी तरह के हमले की क्षमता का आकलन अलग है। इसलिए ट्रंप को तुर्किये से ब्रिटेन तक सी-32ए में गुप्त रूप से ले जाना मुख्य रूप से राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन छिपाने की सुरक्षा रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या इस ऑपरेशन पर राजनीतिक विवाद बढ़ेगा

इस घटनाक्रम ने अमेरिकी राजनीति में पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बहस शुरू कर दी है। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने घटना की कांग्रेस जांच की मांग की है और इसे असामान्य तथा गंभीर बताया है।

दूसरी तरफ प्रशासन का तर्क है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा किसी राजनीतिक बहस से ऊपर है। अगर खुफिया एजेंसियों के पास वास्तविक खतरे की जानकारी थी, तो राष्ट्रपति की लोकेशन को गुप्त रखना ऑपरेशनल सिक्योरिटी का हिस्सा माना जा सकता है।

लेकिन सवाल यह भी है कि क्या पत्रकारों और राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे कर्मचारियों को पूरी तरह अनजान रखना जरूरी था। यदि किसी आपात स्थिति में विमान पर हमला होता, तो प्रेस पूल और अन्य कर्मचारी भी जोखिम में होते। यही पहलू इस घटना को केवल राष्ट्रपति सुरक्षा से आगे ले जाकर प्रेस सेफ्टी और संस्थागत जवाबदेही का मामला बनाता है।

क्या एयर फोर्स वन सच में राष्ट्रपति के लिए खतरे में था

यहां तथ्य और निष्कर्ष के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के आधार पर एक विश्वसनीय ईरानी हत्या की धमकी का हवाला दिया गया है, लेकिन सार्वजनिक रिकॉर्ड में उस खुफिया जानकारी का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।

इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि ईरान ने निश्चित तौर पर एयर फोर्स वन को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। इतना स्थापित है कि अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति के लिए खतरे को गंभीरता से लिया और ट्रंप की वास्तविक उड़ान को छिपाने के लिए असाधारण सुरक्षा उपाय अपनाए।

यही distinction इस खबर की क्रेडिबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में जिस खुफिया खतरे का जिक्र है, उसकी पूरी प्रकृति अभी सार्वजनिक नहीं है।

आगे क्या बदल सकता है

इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेशी यात्राओं में सुरक्षा प्रोटोकॉल पर नए सवाल उठना तय है। खासकर नए कतर-प्रदत्त विमान की भूमिका, उसके डिफेंस सिस्टम और भविष्य में उसके इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त समीक्षा हो सकती है।

अमेरिकी प्रशासन के सामने दो समानांतर जरूरतें हैं। पहली, राष्ट्रपति की लोकेशन और यात्रा रूट को संभावित दुश्मनों से छिपाना। दूसरी, राष्ट्रपति के साथ यात्रा करने वाले पत्रकारों और कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा जानकारी देना।

कांग्रेस यदि इस मामले की समीक्षा करती है, तो जांच का केंद्र यह हो सकता है कि खतरे का आकलन किस स्तर पर हुआ, विमान बदलने का निर्णय किसने लिया और प्रेस पूल को सूचना न देने का फैसला किस सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

निष्कर्ष

ट्रंप की गुप्त उड़ान अमेरिकी राष्ट्रपति सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का एक असाधारण उदाहरण सामने लाती है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, ईरानी हत्या की धमकी के बाद ट्रंप को तुर्किये से सी-32ए सैन्य विमान में गुप्त रूप से ब्रिटेन ले जाया गया, जबकि पुराने एयर फोर्स वन को डिकॉय के रूप में इस्तेमाल किया गया।

इस ऑपरेशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल कैटरिंग ट्रक या विमान बदलना नहीं है। असली सवाल यह है कि अमेरिकी सुरक्षा तंत्र ने राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन को छिपाने के लिए किस स्तर की deception strategy अपनाई और उस प्रक्रिया में पत्रकारों तथा कुछ कर्मचारियों को भी अनजान रखा।

व्हाइट हाउस का रुख स्पष्ट है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेकिन इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक पारदर्शिता के बीच संतुलन पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है।

सबसे अहम तथ्य फिलहाल यही है कि ट्रंप पुराने एयर फोर्स वन में सार्वजनिक रूप से सवार हुए, लेकिन असल में एक छोटे सैन्य विमान से तुर्किये से बाहर निकले। बाकी सवाल, खासकर खतरे की खुफिया प्रकृति और निर्णय प्रक्रिया, आने वाले समय में अधिक जानकारी सामने आने पर ही स्पष्ट होंगे।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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