सोमवार, 19 October 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
🔔 Google पर Shah Times की खबरें पाने के लिए क्लिक करें
EDITION:
BREAKING
Advertisement Advertisement
World

नेतन्याहू का बड़ा दावा, ‘ईरान का इस्लामी गणराज्य जल्द गिर सकता है’

Harish Qureshi • 2026-09-04 12:32:50
नेतन्याहू का बड़ा दावा, ‘ईरान का इस्लामी गणराज्य जल्द गिर सकता है’

अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव के बीच नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान का इस्लामी गणराज्य पहले से कमजोर है और उसका सत्ता से हटना अब पहुंच के भीतर है।


यरुशलम | 4 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris


अमेरिका के हमलों के बीच नेतन्याहू का बड़ा बयान


अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज होने के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया है।


नेतन्याहू ने कहा कि ईरान का इस्लामी गणराज्य पहले से कमजोर है और उसे सत्ता से हटाना अब “पहुंच के भीतर” है। उनके बयान को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने ईरान के शासन परिवर्तन को लेकर इजरायली नेतृत्व के बढ़ते दबाव के संकेत के तौर पर रिपोर्ट किया है।


हालांकि, यह नेतन्याहू का आकलन है। ईरान की सरकार के जल्द गिरने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


अमेरिका ने फिर शुरू किए ईरान पर हमले


नेतन्याहू का बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का नया दौर शुरू किया है।


रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी हमलों में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े ठिकाने, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, संचार सुविधाएं और समुद्री क्षमताओं से जुड़े ठिकाने निशाने पर रहे।


यह कार्रवाई जुलाई के बाद लगभग एक महीने तक चले अपेक्षाकृत शांत दौर के बाद हुई। इसके बाद ईरान ने भी अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की।


नेतन्याहू ने ईरान को ‘पहले से कमजोर’ बताया


नेतन्याहू ने अपने बयान में ईरानी शासन को पहले की तुलना में कमजोर बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सैन्य दबाव के बीच ईरान की इस्लामी गणराज्य व्यवस्था को हटाने का लक्ष्य अब हासिल करने के करीब है।


उनका बयान लंबे समय से चले आ रहे इजरायली रुख के अनुरूप है, जिसमें ईरान की सैन्य क्षमता और उसके राजनीतिक नेतृत्व को इजरायल के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बताया जाता रहा है।


लेकिन यहां एक अहम फर्क है। ईरानी सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचना और ईरान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था का गिरना दो अलग-अलग घटनाक्रम हैं।


ईरान में सत्ता परिवर्तन अभी स्थापित तथ्य नहीं


ईरानी शासन के भविष्य को लेकर नेतन्याहू का दावा राजनीतिक और रणनीतिक आकलन है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं है जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि ईरान की सरकार तत्काल गिरने वाली है।


रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी दबाव और गंभीर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद ईरान का नेतृत्व अभी भी संघर्ष जारी रखने के संकेत दे रहा है। सत्ता के भीतर कट्टरपंथी सैन्य और धार्मिक धड़े प्रभावशाली बने हुए हैं।


इसलिए मौजूदा स्थिति को “शासन परिवर्तन की पुष्टि” के बजाय “शासन परिवर्तन को लेकर इजरायली दावा” कहना ज्यादा सटीक है।


अमेरिका-ईरान टकराव फिर क्यों बढ़ा


नए हमलों की पृष्ठभूमि में होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति अहम है।


यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाल के तनाव के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और ईरान ने कुछ जहाजों पर प्रतिबंध बढ़ाए हैं।


अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान की ओर से वाणिज्यिक शिपिंग पर हमले और जलडमरूमध्य में गतिविधियां सैन्य कार्रवाई की वजहों में शामिल हैं। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति अपनाई है।


ईरान दूसरी ओर अमेरिकी कार्रवाई का विरोध कर रहा है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है।


तेल बाजार पर भी असर


मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।


रिपोर्ट के अनुसार 4 सितंबर को Brent crude करीब 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। सप्ताह के दौरान Brent में लगभग 7.6 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई, जबकि अमेरिकी WTI में करीब 10.4 फीसदी की वृद्धि हुई।


होर्मुज़ जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान बना रहा तो इसका असर एशिया और यूरोप समेत कई बड़े ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।


भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है। हालांकि तेल की अंतिम कीमत पर असर कई कारकों, जैसे आपूर्ति, स्टॉक, शिपिंग लागत और वैश्विक मांग पर निर्भर करेगा।


ईरान की प्रतिक्रिया भी अहम


ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में सैन्य कार्रवाई की है। Reuters के अनुसार ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और इराक में अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। कई हमलों को स्थानीय सुरक्षा बलों ने रोकने की बात कही है।


ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी हमलों का जवाब देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।


इससे संघर्ष का दायरा बढ़ने का खतरा बना हुआ है। खास चिंता यह है कि सैन्य कार्रवाई अगर ऊर्जा प्रतिष्ठानों या समुद्री मार्गों तक और फैलती है तो उसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा से बाहर जाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।


नागरिक नुकसान ने बढ़ाई चिंता


नए अमेरिकी हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ नागरिक इलाकों को लेकर भी सवाल उठे हैं।


जांच के मुताबिक 1 सितंबर को दक्षिणी ईरान के कुहस्तक में एक शादी समारोह के पास हुआ हमला अमेरिकी हथियार से हुआ प्रतीत होता है। इस घटना में कई नागरिकों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की रिपोर्ट है। अमेरिकी सेना ने मामले की जांच की बात कही है।


ऐसे घटनाक्रम संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा रहे हैं।


आगे क्या होगा


अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और इजरायल ईरान पर सैन्य दबाव कितना बढ़ाते हैं और तेहरान किस स्तर तक जवाब देता है।


अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि अमेरिका ईरान से बातचीत के लिए तैयार नहीं है, जब तक वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रुक नहीं जाते। 

दूसरी ओर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि अमेरिका अपने समझौते से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे तो तेहरान भी जवाबी कदम उठाने के लिए तैयार है।


इससे संकेत मिलता है कि सैन्य टकराव के साथ कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी गंभीर है।


नेतन्याहू के बयान का असल मतलब


नेतन्याहू का बयान केवल ईरान की मौजूदा स्थिति का आकलन नहीं है। यह इजरायल की रणनीतिक प्राथमिकताओं का भी संकेत देता है।


लेकिन किसी सरकार के सैन्य रूप से कमजोर होने और उसके राजनीतिक ढांचे के टूटने के बीच लंबी दूरी होती है। इसलिए ईरानी इस्लामी गणराज्य 

के “जल्द गिरने” को अभी संभावित राजनीतिक परिदृश्य के रूप में देखना चाहिए, स्थापित घटनाक्रम के रूप में नहीं।


फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव जारी है। इजरायल खुले तौर पर ईरान पर दबाव बढ़ाने के पक्ष में है। होर्मुज़ की स्थिति, तेल बाजार और नागरिक नुकसान इस संघर्ष के अगले चरण को तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।

वीडियो देखें

ADVERTISEMENT
Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर