ईरान की न्यायपालिका ने युद्ध से जुड़े मामलों में 262 संपत्तियों की जब्ती की घोषणा की है। न्यायपालिका के मुताबिक संपत्तियों पर कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ हुई जिन्हें दुश्मन के सहयोग का आरोपी बताया गया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान में संपत्ति फ्रीज और जब्ती का दायरा इससे कहीं बड़ा है।
तेहरान | 14 सितंबर 2026
By Mohd Haris
ईरान में युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों के बीच संपत्ति जब्ती का अभियान तेज होने की खबर है। ईरानी न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने मई में बताया था कि अधिकारियों ने ऐसे मामलों में 262 संपत्तियां जब्त की हैं, जिन्हें सरकार ने दुश्मन के सहयोग और सुरक्षा आरोपों से जोड़ा है।
ईरानी अधिकारियों की भाषा में इन लोगों को ‘गद्दार’, ‘दुश्मन के सहयोगी’ और दूसरे कठोर सुरक्षा शब्दों से संबोधित किया गया है। हालांकि इन आरोपों को हर मामले में स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
262 संपत्तियों पर कार्रवाई
ईरानी न्यायपालिका के प्रवक्ता के मुताबिक संपत्ति पंजीकरण प्राधिकरण से 722 मामलों में जानकारी मांगी गई थी। इन जांचों के बाद 262 संपत्तियों को जब्त किए जाने की बात सामने आई।
अधिकारियों के मुताबिक सबसे अधिक जब्ती तेहरान, गिलान, अल्बोर्ज़, मज़ंदरान और इस्फहान प्रांतों में हुई।
केवल तेहरान में 109 संपत्तियों और 16 वाहनों को जब्त किए जाने की जानकारी दी गई थी।
किस कानून के तहत कार्रवाई
ईरानी न्यायपालिका के अनुसार ये कार्रवाई इज़राइल के साथ सहयोग से संबंधित एक कठोर दंड कानून के तहत की गई है।
अधिकारियों ने कहा है कि जब्त संपत्तियां तत्काल स्थायी रूप से सरकार की संपत्ति नहीं बनतीं। न्यायिक प्रक्रिया और अदालत से जब्ती की पुष्टि के बाद इन्हें राज्य के पक्ष में जब्त किया जा सकता है।
इस अंतर को समझना जरूरी है। संपत्ति की जब्ती, संपत्ति की अंतिम सरकारी स्वामित्व में तब्दीली के बराबर नहीं होती। अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
‘गद्दार’ शब्द पर सवाल
ईरानी अधिकारियों ने प्रभावित लोगों के लिए ‘गद्दार’ और ‘दुश्मन के एजेंट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है।
लेकिन यह सरकारी आरोप हैं। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप और अदालत में साबित अपराध के बीच कानूनी अंतर होता है।
इसी वजह से स्वतंत्र रिपोर्टिंग में ऐसे शब्दों को आरोप के रूप में पेश करना जरूरी है, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।
संपत्ति जब्ती का दायरा कितना बड़ा है
262 संपत्तियों का आंकड़ा ईरानी न्यायपालिका की ओर से घोषित एक विशिष्ट आंकड़ा है। लेकिन मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में इससे कहीं व्यापक कार्रवाई का दावा किया गया है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक ईरानी अधिकारियों ने मार्च 2026 में ‘सहम’ नाम की डिजिटल व्यवस्था शुरू की थी। संगठन के अनुसार इसका इस्तेमाल उन लोगों की संपत्ति पहचानने और फ्रीज या जब्त करने के लिए किया गया जिन्हें सरकार ‘आतंकवादी’ या ‘दुश्मन के एजेंट’ बताती है। संगठन ने दावा किया कि इसके बाद 750 से अधिक लोगों की संपत्ति जब्त किए जाने की घोषणा हुई।
इसलिए 262 और 750 से अधिक के आंकड़े विरोधाभासी दिख सकते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग समय और कार्रवाई के दायरे को दर्शा सकते हैं।
विदेश में रहने वाले ईरानी भी निशाने पर
एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि संपत्ति संबंधी कार्रवाई ईरान के भीतर रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रही।
संगठन के अनुसार विदेशों में रहने वाले कुछ पत्रकारों और अन्य लोगों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई है। ईरानी अधिकारियों ने इनमें से कई लोगों को दुश्मन देशों या शत्रुतापूर्ण मीडिया के साथ सहयोग का आरोपी बताया है।
अप्रैल 2026 में तेहरान के अभियोजक ने विदेश में रहने वाले 100 से अधिक प्रमुख लोगों की संपत्ति और बैंक खातों की पहचान, जब्ती और रोक के आदेशों की घोषणा की थी। इनमें ईरान इंटरनेशनल और मनोटो से जुड़े कर्मचारियों के नाम भी बताए गए थे।
मानवाधिकार संगठनों की आपत्ति
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरान ने युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा की परिस्थितियों का इस्तेमाल राजनीतिक असहमति पर दबाव बढ़ाने के लिए किया है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों, मुकदमों और संपत्ति फ्रीज करने की कार्रवाई पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि पत्रकारों, वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, प्रदर्शनकारियों और दूसरे नागरिक समूहों को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
ईरानी सरकार इन कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा और दुश्मन से सहयोग रोकने के उपाय के तौर पर पेश करती है।
संपत्ति जब्ती की पुरानी पृष्ठभूमि
ईरान में संपत्ति जब्ती की व्यवस्था नई नहीं है।
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पूर्व शाही शासन से जुड़े लोगों और उनके सहयोगियों की संपत्तियों की जब्ती शुरू हुई थी। बाद के दशकों में इसका दायरा अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों तक बढ़ा।
ईरान के संविधान का अनुच्छेद 49 ऐसी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई का कानूनी आधार देता है जिसे राज्य ‘अवैध’ या अनुचित तरीके से अर्जित मानता है।
हाल के वर्षों में यही व्यवस्था राजनीतिक और सुरक्षा मामलों में भी चर्चा का विषय बनी है।
व्यवसायी के खिलाफ हालिया कार्रवाई
सितंबर 2026 में ईरानी कैफे कारोबारी सादिक सईदीनिया का मामला भी सामने आया। यूरोन्यूज़ के अनुसार उन्हें जनवरी के प्रदर्शनों के समर्थन से जुड़े आरोपों में 12 साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई गई और उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया गया।
ईरानी अधिकारियों ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकार विरोधी प्रचार से जुड़े आरोप लगाए।
मानवाधिकार और स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों में इस तरह के मामलों को राजनीतिक दबाव के उदाहरण के रूप में देखा गया है। हालांकि प्रत्येक मामले के आरोपों और न्यायिक रिकॉर्ड को अलग-अलग देखना जरूरी है।
युद्ध ने कार्रवाई क्यों तेज की
ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष के दौरान तेहरान ने आंतरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
सरकार का दावा है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां और उनके सहयोगी ईरान के भीतर सक्रिय हैं। इसी आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई की है।
दूसरी ओर मानवाधिकार संगठन कहते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर शांतिपूर्ण असहमति और अभिव्यक्ति पर भी कार्रवाई की जा रही है। यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा विवादित पहलू है।
कानूनी प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है
किसी व्यक्ति की संपत्ति जब्त करना उसके आर्थिक जीवन पर सीधा असर डालता है। घर, बैंक खाता, कारोबार और दूसरी परिसंपत्तियां प्रभावित हो सकती हैं।
इसलिए आरोप, अस्थायी जब्ती और अंतिम संपत्ति जब्ती के बीच कानूनी अंतर महत्वपूर्ण है।
ईरानी न्यायपालिका ने खुद कहा है कि जब्त संपत्तियों को अंतिम रूप से राज्य के पक्ष में लेने के लिए अदालत से पुष्टि जरूरी है।
आगे क्या होगा
आने वाले समय में सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि कितनी जब्त संपत्तियों के मामलों में अदालतें अंतिम आदेश देती हैं।
दूसरा सवाल यह है कि ईरान संपत्ति जब्ती की इस व्यवस्था को केवल युद्धकालीन सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित रखता है या इसका इस्तेमाल राजनीतिक और सामाजिक विरोध के मामलों में भी जारी रहता है।
मानवाधिकार संगठनों की निगाहें गिरफ्तारियों, मुकदमों और संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया पर बनी रहेंगी। वहीं ईरानी सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी हस्तक्षेप से निपटने की नीति के रूप में पेश करती रहेगी।
निष्कर्ष
ईरान में करीब 250 संपत्तियों की जब्ती की खबर को केवल आर्थिक कार्रवाई के रूप में देखना अधूरा होगा। यह देश में चल रहे व्यापक सुरक्षा अभियान, राजनीतिक असहमति और युद्धकालीन दमन के विवाद से जुड़ी हुई है।
ईरानी न्यायपालिका ने 262 संपत्तियों की जब्ती की पुष्टि की है। मानवाधिकार संगठनों के आंकड़े इससे काफी बड़े हैं। इसलिए सबसे सटीक तस्वीर यही है कि संपत्ति जब्ती का अभियान व्यापक है, लेकिन अलग-अलग संस्थाओं के आंकड़ों का दायरा और समय अलग है।
इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया यह तय करेगी कि जब्त संपत्तियों में से कितनी स्थायी रूप से राज्य के नियंत्रण में जाती हैं और कितने मामलों में आरोप अदालत में साबित होते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।