हरमन सिंघा का सफर ‘द ट्रेटर्स इंडिया-2’ में खत्म
रणविजय के भाई होने का फायदा नहीं, बना निशाना
हरमन बोले, ‘काश भाई रणविजय से और सीखा होता’
हरमन सिंघा ‘द ट्रेटर्स इंडिया-2’ से बाहर हो गए। उन्होंने कहा कि रणविजय सिंघा के भाई होने से शुरुआत में ही वे निशाने पर आए। हरमन ने शो के मजबूत फॉर्मेट की तारीफ की और माना कि रियलिटी टीवी का अनुभव रखने वाले भाई से ज्यादा सलाह लेनी चाहिए थी। उन्होंने ज्यादा समय मिलने की इच्छा जताई।
स्थान: मुंबई
तारीख: 18 अगस्त 2026
By Mohd Naved
‘द ट्रेटर्स इंडिया-2’ से हरमन सिंघा का सफर जल्दी खत्म हो गया है। शो से बाहर होने के बाद अभिनेता ने अपने गेम, भाई रणविजय सिंघा की रियलिटी टीवी विशेषज्ञता और मुनव्वर फारूकी जैसे बड़े नामों के साथ गेम खेलने की मुश्किलों पर खुलकर बात की। हरमन के मुताबिक, रणविजय का भाई होना शुरुआत से ही उनके लिए एक तरह का दबाव बन गया था।
शो का दूसरा सीजन 13 अगस्त 2026 से प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रहा है। इस सीजन में 21 प्रतियोगी शामिल हैं और करण जौहर बतौर होस्ट लौटे हैं। हरमन सिंघा भी घोषित प्रतियोगियों में शामिल थे।
हरमन सिंघा ने आईएएनएस से बातचीत में अपने जल्दी बाहर होने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शो में प्रवेश करते ही उन्हें इस वजह से अतिरिक्त निगाहों का सामना करना पड़ा कि वे मशहूर रियलिटी टीवी होस्ट रणविजय सिंघा के भाई हैं।
हरमन के मुताबिक, चाहे वे इनोसेंट होते या ट्रेटर, खिलाड़ियों के लिए उनका नाम और पारिवारिक पृष्ठभूमि अपने आप में शक पैदा करने वाली वजह बन गई थी। उन्होंने इस स्थिति की तुलना मुनव्वर फारूकी जैसे मजबूत खिलाड़ी से की।
हरमन ने कहा कि अगर रणविजय खुद शो में हिस्सा लेते, तो उनके साथ भी कुछ ऐसा ही होता। उनके मुताबिक, जब कोई बड़ा और अनुभवी खिलाड़ी मैदान में आता है, तो बाकी खिलाड़ी उसे शुरुआती दौर में ही खतरे के तौर पर देखने लगते हैं।
आईएएनएस को दिए बयान में हरमन ने क्रिकेट की मिसाल देते हुए कहा कि अगर कोई ओपनिंग बैट्समैन शुरुआत से तेज रफ्तार से खेलना शुरू कर दे, तो गेंदबाज और फील्डर उसके खिलाफ तुरंत रणनीति बनाने लगते हैं।
‘द ट्रेटर्स इंडिया’ एक मनोवैज्ञानिक रियलिटी फॉर्मेट है, जिसमें प्रतियोगियों को ट्रेटर्स और इनोसेंट्स के दो समूहों में बांटा जाता है। ट्रेटर्स अपनी पहचान छिपाकर गेम में आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, जबकि इनोसेंट्स का मकसद ट्रेटर्स की पहचान करना और उन्हें बाहर करना होता है।
दूसरे सीजन में करण जौहर फिर होस्ट की भूमिका में हैं। शो की शूटिंग राजस्थान के जैसलमेर स्थित सूर्यगढ़ पैलेस में हुई थी। नए सीजन में हरमन सिंघा के अलावा मुनव्वर फारूकी, रिया चक्रवर्ती, मल्लिका शेरावत, श्वेता तिवारी, रणवीर बरार, पारुल गुलाटी और अभिषेक मल्हान जैसे नाम शामिल हैं।
सीजन की शुरुआत से ही मुनव्वर फारूकी और हरमन सिंघा जैसे चर्चित चेहरों पर दर्शकों और खिलाड़ियों की खास निगाह रही। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती एपिसोड में हरमन की ट्रेटर के तौर पर पहचान उजागर हुई और इसके बाद उन्हें गेम से बाहर कर दिया गया।
हरमन सिंघा ने बताया कि शो में आने से पहले उन्होंने अपने भाई रणविजय से इस फॉर्मेट पर चर्चा की थी। दोनों इस बात से वाकिफ थे कि हरमन के लिए पारिवारिक पहचान एक अहम गेम फैक्टर बनेगी।
रणविजय सिंघा लंबे समय से रियलिटी टीवी से जुड़े रहे हैं। ऐसे में हरमन के लिए यह पहला बड़ा अनुभव था, जबकि उनके भाई के पास ऐसे फॉर्मेट का लंबा अनुभव है।
हरमन ने माना कि उन्हें शो में जाने से पहले रणविजय से ज्यादा सलाह लेनी चाहिए थी। उनका कहना था कि भाई को इस तरह के गेम की रणनीति और खिलाड़ियों की मानसिकता को समझने का बेहतर अनुभव है।
यहां हरमन की टिप्पणी का अहम पहलू यह है कि उन्होंने अपने बाहर होने का पूरा दोष किसी दूसरे खिलाड़ी या शो के फॉर्मेट पर नहीं डाला। उन्होंने अपने अनुभव की कमी को भी स्वीकार किया।
हरमन सिंघा का नजरिया साफ है। उनके मुताबिक, शो में किसी खिलाड़ी की पहचान, लोकप्रियता और पूर्व अनुभव उसके लिए ताकत के साथ कमजोरी भी बन सकता है।
उन्होंने रणविजय के संभावित गेम को मुनव्वर फारूकी से जोड़ते हुए कहा कि बड़े खिलाड़ी अक्सर बाकी प्रतियोगियों के लिए शुरुआती खतरा बन जाते हैं।
मुनव्वर की स्थिति भी इस सीजन में चर्चा का केंद्र रही है। हालांकि हरमन ने अपने बयान में किसी खिलाड़ी पर व्यक्तिगत आरोप लगाने के बजाय पूरे गेम मैकेनिज्म की बात की।
शो के निर्माताओं की तरफ से हरमन के इस इंटरव्यू पर कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनके बयान को उनके व्यक्तिगत अनुभव और आकलन के तौर पर देखना ज्यादा उचित है।
उपलब्ध रिपोर्टों से इतना स्पष्ट है कि हरमन सिंघा दूसरे सीजन के आधिकारिक प्रतियोगियों में शामिल थे। शो का प्रीमियर 13 अगस्त को हुआ और नए एपिसोड हर गुरुवार जारी किए जा रहे हैं।
हरमन के इंटरव्यू की मूल सामग्री में उनकी मुख्य शिकायत कम समय मिलने को लेकर है। साथ ही वे यह भी स्वीकार करते हैं कि रियलिटी टीवी के अपने अनुभवहीन होने के कारण उन्हें रणविजय से ज्यादा रणनीतिक सलाह लेनी चाहिए थी।
यह भी महत्वपूर्ण है कि हरमन ने शो के फॉर्मेट की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उन्हें गेम खेलने में मजा आया और उन्हें इसका मजबूत फॉर्मेट पसंद आया। उनके मुताबिक, ट्रेटर्स और इनोसेंट्स के बीच लगातार चलने वाला शक और मुकाबला शो की सबसे बड़ी ताकत है।
हरमन का बाहर होना इस सीजन की शुरुआती रणनीतिक राजनीति को समझने के लिए अहम है। ऐसे गेम में किसी प्रतियोगी की पहचान जितनी मजबूत होती है, उसके खिलाफ शुरुआती गठजोड़ बनने की संभावना भी उतनी बढ़ सकती है।
लेकिन यह भी जरूरी है कि हर मजबूत खिलाड़ी का जल्दी बाहर होना केवल उसकी लोकप्रियता का नतीजा नहीं माना जाए। ‘द ट्रेटर्स’ जैसे फॉर्मेट में सामाजिक रिश्ते, रणनीतिक गलती, गलत अनुमान और दूसरे खिलाड़ियों की सामूहिक राय एक साथ असर डालते हैं।
हरमन की टिप्पणी इसी जटिलता की तरफ इशारा करती है। उनके लिए रणविजय का भाई होना एक सामाजिक पहचान थी, लेकिन गेम में वही पहचान रणनीतिक बोझ बन गई।
इस खबर का सीधा राजनीतिक या नीतिगत असर नहीं है। इसका महत्व मनोरंजन उद्योग और रियलिटी टीवी के गेम डायनेमिक्स तक सीमित है।
फिर भी, यह मामला सेलिब्रिटी रियलिटी शो में पहचान और धारणा की भूमिका को समझने के लिए उपयोगी है। दर्शक और प्रतियोगी किसी व्यक्ति को उसके पिछले काम, लोकप्रियता और रिश्तों के आधार पर आंकते हैं। ऐसे फॉर्मेट में यह धारणा खुद गेम का हिस्सा बन जाती है।
रियलिटी शो का मूल्यांकन केवल विजेता या पुरस्कार राशि से नहीं होता। प्रतियोगियों की लोकप्रियता, सोशल मीडिया चर्चा और शो के आसपास बन रहा नैरेटिव भी उसकी व्यावसायिक अपील का हिस्सा होते हैं।
‘द ट्रेटर्स इंडिया’ के पहले सीजन की सफलता के बाद दूसरा सीजन बड़े और विविध सेलिब्रिटी कास्ट के साथ वापस आया है। द प्रिंट के मुताबिक, पहले सीजन के विजेताओं उर्फी जावेद और निकिता लूथर ने 70.5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि जीती थी।
हरमन का इंटरव्यू भी इसी चर्चा को आगे बढ़ाता है कि रियलिटी शो में खिलाड़ी की स्क्रीन पहचान और निजी पृष्ठभूमि किस तरह उसके गेमप्ले को प्रभावित करती है।
‘द ट्रेटर्स’ मूल रूप से डच फॉर्मेट ‘डी वेर्राडर्स’ पर आधारित है। भारतीय संस्करण में इस फॉर्मेट को स्थानीय सेलिब्रिटी संस्कृति और भारतीय रियलिटी टीवी की दर्शक रुचि के साथ पेश किया गया है।
हरमन ने भी शो के फॉर्मेट की अंतरराष्ट्रीय सफलता का जिक्र किया। उनके मुताबिक, ट्रेटर्स और इनोसेंट्स के बीच लगातार बदलता भरोसा और शक इस फॉर्मेट को प्रभावी बनाता है।
हरमन के बाहर होने के बाद बड़ा सवाल यह है कि बाकी प्रतियोगी उनके गेम से क्या सीख लेते हैं।
क्या खिलाड़ी अब सेलिब्रिटी स्टेटस को ज्यादा महत्व देंगे या वास्तविक गेमप्ले पर ध्यान केंद्रित करेंगे? क्या रियलिटी टीवी का अनुभव आगे चलकर फायदा देगा या वही अनुभव खिलाड़ी को शुरुआती निशाना बनाएगा?
इन सवालों का जवाब आने वाले एपिसोड के गेमप्ले से ही मिलेगा। अभी हरमन की टिप्पणी को पूरे सीजन के नतीजे का संकेत मानना उचित नहीं होगा।
‘द ट्रेटर्स इंडिया-2’ का गेम हरमन सिंघा के बाहर होने के बाद नए समीकरणों की तरफ बढ़ चुका है। मुनव्वर फारूकी जैसे चर्चित नामों के साथ शुरू हुआ यह सीजन पहले ही शुरुआती दौर में कई रणनीतिक मोड़ देख चुका है।
हरमन के लिए हालांकि इस अनुभव का निष्कर्ष अलग है। उन्होंने कहा कि उन्हें शो में और ज्यादा समय मिलता तो बेहतर होता। इसके बावजूद उन्होंने फॉर्मेट की तारीफ की और इसे मनोरंजन के लिहाज से मजबूत बताया।
हरमन सिंघा का ‘द ट्रेटर्स इंडिया-2’ से बाहर होना सिर्फ एक एलिमिनेशन की खबर नहीं है। उनके बयान से रियलिटी टीवी के एक अहम पहलू की तस्वीर सामने आती है, जहां पहचान, प्रतिष्ठा और पिछले अनुभव कभी ताकत बनते हैं तो कभी शक की पहली वजह।
हरमन ने अपने अनुभव को लेकर आत्ममंथन किया और माना कि उन्हें रणविजय सिंघा से ज्यादा सीखना चाहिए था। साथ ही उन्होंने शो के मजबूत फॉर्मेट की तारीफ की और ज्यादा समय मिलने की इच्छा जताई। यही उनके इंटरव्यू का सबसे स्पष्ट संदेश है, खेल छोटा रहा, लेकिन अनुभव उनके लिए अहम रहा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।