ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स पर संभावित प्रहार को लेकर पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि भारत का वहां हमला करने का पूर्व निर्धारित इरादा नहीं था।
नई दिल्ली
27 अगस्त 2026
Mohd Naved
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सर्गोधा इलाके के पास स्थित किराना हिल्स को लेकर मई 2025 में कई तरह के दावे सामने आए थे। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में इसे पाकिस्तान के परमाणु ढांचे से जोड़ते हुए दावा किया गया कि भारतीय कार्रवाई में इस इलाके को निशाना बनाया गया था। उस समय भारतीय वायुसेना ने इन दावों को खारिज किया था। अब पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की हालिया टिप्पणी ने इस घटनाक्रम को एक अलग संदर्भ दे दिया है।
जनरल अनिल चौहान के मुताबिक भारत ने किराना हिल्स को लक्ष्य बनाकर हमला नहीं किया था। उनके अनुसार सर्गोधा के आसपास रडार तलाशने और उन्हें निशाना बनाने के लिए भेजा गया एक लोइटरिंग म्यूनिशन अपने निर्धारित ऑपरेशनल समय के बाद अनजाने में किराना हिल्स इलाके में गिर गया होगा। इस बयान के बाद बहस का केंद्र अब यह बन गया है कि वहां जानबूझकर हमला हुआ था या अभियान के दौरान हथियार के मार्ग और ईंधन से जुड़ी परिस्थितियों के कारण असर वहां पहुंचा।
किराना हिल्स को लेकर विवाद ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती दिनों में सामने आया था। भारत ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इस अभियान को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया।
12 मई 2025 को भारतीय वायुसेना के तत्कालीन महानिदेशक वायु अभियान एयर मार्शल ए.के. भारती से किराना हिल्स को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि भारतीय वायुसेना ने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया। उस समय भारतीय पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया था कि अभियान के निशाने सैन्य और आतंकी ढांचे से जुड़े लक्ष्य थे।
यही बयान उस समय सामने आए उन दावों के विपरीत था जिनमें किराना हिल्स को पाकिस्तान के कथित परमाणु भंडारण ढांचे से जोड़कर देखा जा रहा था। इसलिए घटना के तत्काल बाद उपलब्ध आधिकारिक बयान और बाद की चर्चाओं में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
पूर्व सीडीएस अनिल चौहान की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अभियान की सैन्य योजना और उसके संचालन से जुड़े शीर्ष स्तर के अधिकारी रहे हैं। उनके बयान के मुताबिक किराना हिल्स भारत का पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं था।
उनकी व्याख्या के अनुसार सर्गोधा के पास रडार तलाशने के लिए इस्तेमाल किया गया लोइटरिंग म्यूनिशन अपने ऑपरेशनल समय के अंत तक पहुंच गया और उसके बाद वह किराना हिल्स क्षेत्र में गिरा हो सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि वहां कोई प्रहार हुआ भी, तो उसे पहले से तय रणनीतिक लक्ष्य मानना सही नहीं होगा।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम सावधानी जरूरी है। हथियार के किराना हिल्स तक पहुंचने, वहां किसी विशिष्ट संरचना को नुकसान पहुंचने और किसी भूमिगत सुविधा के भीतर असर होने संबंधी कई विवरण सार्वजनिक तौर पर स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हैं। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के बजाय उपलब्ध बयानों और विशेषज्ञ आकलन के रूप में देखना चाहिए।
सेवानिवृत्त मेजर जनरल और रक्षा विशेषज्ञ ध्रुव कटोच ने जनरल चौहान के बयान को महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि इस स्पष्टीकरण से यह बात सामने आती है कि भारत का किराना हिल्स को निशाना बनाने का इरादा नहीं था। उन्होंने इस घटनाक्रम को भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना।
कटोच के मुताबिक घटना का असर केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं रहा। उनके आकलन में किराना हिल्स से जुड़ी संवेदनशीलता के कारण अमेरिका की दिलचस्पी और कूटनीतिक सक्रियता बढ़ी। उन्होंने पाकिस्तान की परमाणु कमांड संरचना को लेकर सामने आई कुछ खबरों का भी जिक्र किया, हालांकि पाकिस्तान ने उस समय ऐसी खबरों का खंडन किया था।
यहां भी तथ्य और आकलन के बीच फर्क रखना जरूरी है। अमेरिका की सक्रियता, पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और उनके बीच सीधा कारण संबंध एक विशेषज्ञ का विश्लेषण है। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित सरकारी निष्कर्ष के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
किराना हिल्स पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सर्गोधा के नजदीक स्थित इलाका है। यह क्षेत्र लंबे समय से पाकिस्तान के रणनीतिक और सैन्य ढांचे से जुड़ी चर्चाओं में रहा है।
कई खुली स्रोत रिपोर्टों और विश्लेषणों में किराना हिल्स को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी संभावित सुविधाओं के संदर्भ में देखा गया है। लेकिन सार्वजनिक स्रोतों में वहां मौजूद किसी विशिष्ट परमाणु सुविधा, उसके वर्तमान इस्तेमाल या मई 2025 में उसके कथित नुकसान की पूर्ण स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इसी वजह से इस मामले में शब्दों का चयन महत्वपूर्ण है। किराना हिल्स को सीधे तौर पर पाकिस्तान का निश्चित परमाणु भंडारण केंद्र बताना, बिना पर्याप्त स्वतंत्र प्रमाण के, पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं होगा।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सर्गोधा में स्थित पाकिस्तानी सैन्य ठिकाना भारतीय कार्रवाई के संदर्भ में सामने आया था। खुले स्रोतों के अनुसार सर्गोधा एयरबेस और किराना हिल्स भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के नजदीक हैं। इसी निकटता ने बाद में दोनों घटनाओं को लेकर अटकलों को बढ़ावा दिया।
मई 2025 में भारतीय वायुसेना ने सर्गोधा एयरबेस को लेकर अपनी कार्रवाई की जानकारी दी थी, लेकिन किराना हिल्स को लक्ष्य बनाए जाने से साफ इनकार किया था।
इसलिए सर्गोधा पर हमले और किराना हिल्स पर संभावित असर को एक ही घटना मानना सही नहीं है। दोनों के बीच भौगोलिक निकटता है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि किराना हिल्स अभियान का पूर्व निर्धारित लक्ष्य था।
किराना हिल्स को लेकर सबसे संवेदनशील सवाल परमाणु सुरक्षा का था। अगर किसी सैन्य कार्रवाई में परमाणु ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जाता, तो भारत-पाकिस्तान तनाव का स्तर काफी गंभीर हो सकता था।
हालांकि मई 2025 में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने पाकिस्तान में किसी परमाणु सुविधा से रेडिएशन लीक या परमाणु दुर्घटना की रिपोर्ट नहीं मिलने की जानकारी दी थी। इससे उस समय सोशल मीडिया पर चल रहे रेडियोधर्मी रिसाव संबंधी दावों को आधार नहीं मिला।
स्टिमसन सेंटर के एक विस्तृत विश्लेषण ने भी किराना हिल्स पर परमाणु सुविधा को निशाना बनाए जाने की तत्कालीन अफवाहों के प्रमाण को कमजोर बताया था और भारतीय वायुसेना के इनकार का उल्लेख किया था।
ध्रुव कटोच ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में चीन-पाकिस्तान रक्षा संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि भविष्य में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव की स्थिति में पाकिस्तान को चीन से उपग्रह और खुफिया सहयोग मिलने की संभावना को भारत को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों का भी उल्लेख किया।
यह टिप्पणी एक रक्षा विशेषज्ञ का आकलन है। इसे किसी नए सरकारी खुलासे के रूप में देखना उचित नहीं होगा। चीन और पाकिस्तान के बीच व्यापक रक्षा सहयोग सार्वजनिक रूप से ज्ञात है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी विशिष्ट कार्रवाई में किस स्तर का खुफिया सहयोग मिला, इसकी पूरी स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
किराना हिल्स विवाद का सबसे अहम पहलू भारत की मंशा और सैन्य कार्रवाई के वास्तविक परिणाम के बीच अंतर है। पूर्व सीडीएस अनिल चौहान के बयान के अनुसार भारत ने किराना हिल्स को जानबूझकर लक्ष्य नहीं बनाया था। वहीं मई 2025 में भारतीय वायुसेना ने भी इस क्षेत्र पर हमला करने से इनकार किया था।
नया बयान इस बात की संभावना सामने रखता है कि अभियान के दौरान इस्तेमाल किया गया एक हथियार अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने में नाकाम रहने के बाद दूसरे इलाके में गिरा हो सकता है। लेकिन इस संभावना को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्वतंत्र तकनीकी प्रमाण सीमित हैं।
इसलिए इस घटना को पाकिस्तान की परमाणु क्षमता पर जानबूझकर किया गया भारतीय हमला बताना उपलब्ध प्रमाणों से आगे निकल जाना होगा। इसी तरह यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि किराना हिल्स में किसी खास परमाणु सुविधा को निश्चित तौर पर नुकसान पहुंचा।
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी कई घटनाओं पर आने वाले समय में और सैन्य विवरण सार्वजनिक हो सकते हैं। सैटेलाइट तस्वीरें, आधिकारिक दस्तावेज और स्वतंत्र रक्षा विश्लेषण इस विवाद को समझने में अधिक ठोस आधार दे सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी का सबसे सावधान निष्कर्ष यही है कि भारत ने किराना हिल्स को पूर्व निर्धारित लक्ष्य के तौर पर नहीं चुना था। पूर्व सीडीएस का नया बयान इस स्थिति को और स्पष्ट करता है, जबकि रक्षा विशेषज्ञ ध्रुव कटोच ने इसके व्यापक रणनीतिक असर पर अपना आकलन दिया है। घटना से जुड़े नुकसान और परमाणु ढांचे पर असर संबंधी दावों को अभी भी प्रमाणित और अप्रमाणित सूचनाओं के बीच अलग-अलग रखकर देखना जरूरी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।