प्लास्टिक के रसायनों और माइक्रोप्लास्टिक को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। जानिए प्लास्टिक का इस्तेमाल करते समय किन सावधानियों को अपनाना बेहतर है।
प्लास्टिक का इस्तेमाल सेहत के लिए कितना नुकसानदायक? जानिए पूरा सच
प्लास्टिक ने रोजमर्रा की जिंदगी को काफी आसान बनाया है। पानी की बोतल, खाद्य पदार्थों की पैकिंग, डिब्बे, रैपर और घरेलू सामान से लेकर चिकित्सा उपकरणों तक इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन प्लास्टिक के व्यापक इस्तेमाल के साथ इसके स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक चिंता भी बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक प्लास्टिक के पूरे जीवन-चक्र—उत्पादन, इस्तेमाल, पुनर्चक्रण और निपटान—के दौरान स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम मौजूद हो सकते हैं। खास चिंता माइक्रोप्लास्टिक, नैनोप्लास्टिक और प्लास्टिक में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक पदार्थों को लेकर है। हालांकि, हर तरह के प्लास्टिक को एक समान नुकसानदायक मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा और कई सवालों पर अभी शोध जारी है।
माइक्रोप्लास्टिक क्यों बना चिंता का विषय?
प्लास्टिक समय के साथ छोटे-छोटे कणों में टूट सकता है। बेहद छोटे प्लास्टिक कणों को माइक्रोप्लास्टिक और उससे भी छोटे कणों को नैनोप्लास्टिक कहा जाता है। ये कण पानी, भोजन और हवा के जरिए मानव शरीर तक पहुंच सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पीने के पानी में माइक्रोप्लास्टिक को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों की समीक्षा की है। संगठन ने यह भी माना है कि माइक्रोप्लास्टिक से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए अभी और उच्च गुणवत्ता वाले शोध की जरूरत है। यानी यह कहना अभी सही नहीं होगा कि प्लास्टिक का हर छोटा कण निश्चित रूप से गंभीर बीमारी पैदा करता है। असल सवाल यह है कि शरीर में कितनी मात्रा पहुंच रही है, उसका आकार और रासायनिक स्वरूप क्या है और लंबे समय तक उसके संपर्क का क्या प्रभाव पड़ता है।
प्लास्टिक में मौजूद रसायन भी महत्वपूर्ण
प्लास्टिक केवल एक पदार्थ नहीं है। अलग-अलग प्लास्टिक उत्पादों को मजबूती, लचीलापन, रंग, पारदर्शिता या दूसरी विशेषताएं देने के लिए अलग-अलग रसायनों और योजकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्लास्टिक से जुड़े रसायनों और उनके स्वास्थ्य प्रभावों को सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंता का विषय बताया है। इनमें कुछ ऐसे रसायन भी शामिल हैं जिनमें हार्मोन तंत्र को प्रभावित करने की क्षमता को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन किए जा रहे हैं। खास तौर पर कुछ प्रकार के बिसफेनॉल और फ्थैलेट जैसे रसायन खाद्य संपर्क वाली सामग्रियों के संदर्भ में वैज्ञानिक और नियामकीय जांच का विषय रहे हैं। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने वर्ष २०२६ में खाद्य संपर्क में इस्तेमाल होने वाले कुछ फ्थैलेट की सामूहिक जोखिम जांच की दिशा में नया वैज्ञानिक मूल्यांकन जारी किया है।
क्या प्लास्टिक से हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं?
कुछ प्लास्टिक-संबंधित रसायनों को अंतःस्रावी तंत्र को प्रभावित करने वाले रसायनों की श्रेणी में अध्ययन किया गया है। अंतःस्रावी तंत्र शरीर के हार्मोन और उनसे जुड़ी कई जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अंतःस्रावी तंत्र को प्रभावित करने वाले कुछ रसायनों का संपर्क बच्चों और गर्भावस्था जैसी संवेदनशील अवस्थाओं में विशेष चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर वास्तविक जोखिम का आकलन रसायन, मात्रा, संपर्क की अवधि और व्यक्ति की संवेदनशीलता जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए केवल प्लास्टिक के संपर्क में आने को किसी बीमारी का सीधा कारण बताना उचित नहीं है।
गर्म खाना प्लास्टिक में रखना कितना उचित?
खाद्य पदार्थों के लिए बने सभी प्लास्टिक उत्पाद एक जैसे नहीं होते। अलग-अलग उत्पाद अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल करने के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए गर्म भोजन को किसी भी प्लास्टिक डिब्बे में रखना उचित नहीं माना जाना चाहिए। विशेषकर ऐसे प्लास्टिक उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिन पर खाद्य पदार्थों के संपर्क या गर्म करने संबंधी स्पष्ट निर्देश न हों। निर्माता द्वारा दिए गए उपयोग निर्देशों का पालन करना अधिक सुरक्षित तरीका है। प्लास्टिक कंटेनर को बार-बार अत्यधिक गर्म करने, गलत तरीके से इस्तेमाल करने या ऐसे उत्पाद में गर्म भोजन रखने से बचना बेहतर है जो इसके लिए बनाया ही नहीं गया हो।
प्लास्टिक की बोतल में पानी रखना कितना सुरक्षित?
बाजार में उपलब्ध खाद्य और पेय पदार्थों के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक उत्पादों के लिए अलग-अलग सुरक्षा मानक और उपयोग निर्देश होते हैं। इसलिए यह कहना कि हर प्लास्टिक की बोतल खतरनाक है, सही नहीं है। लेकिन एक ही बोतल को लंबे समय तक इस्तेमाल करना, उसे अत्यधिक गर्मी में रखना या उसके निर्धारित उपयोग से अलग तरीके से इस्तेमाल करना उचित नहीं है। खासकर ऐसी बोतलें जो एक बार इस्तेमाल के लिए बनाई गई हों, उन्हें लगातार दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय निर्माता के निर्देशों का पालन करना बेहतर है।
प्लास्टिक को जलाना क्यों खतरनाक हो सकता है?
प्लास्टिक कचरे को खुले में जलाना पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। प्लास्टिक के जलने से धुआं और विभिन्न प्रदूषक निकल सकते हैं, जिनका सांस के जरिए शरीर में प्रवेश होना नुकसानदायक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्लास्टिक के निपटान और जलाने से जुड़े वायु प्रदूषण को स्वास्थ्य संबंधी चिंता के रूप में रेखांकित किया है। इसलिए घर के आसपास प्लास्टिक कचरा जलाने के बजाय स्थानीय कचरा प्रबंधन व्यवस्था के जरिए उसका उचित निपटान करना चाहिए।
क्या प्लास्टिक पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?
व्यावहारिक रूप से प्लास्टिक को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है। चिकित्सा क्षेत्र में भी प्लास्टिक का इस्तेमाल पैकेजिंग, संक्रमण नियंत्रण, उपकरणों और कई जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं में होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि कुछ स्वास्थ्य उत्पादों में प्लास्टिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए मुद्दा केवल प्लास्टिक को पूरी तरह छोड़ने का नहीं, बल्कि अनावश्यक प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, सुरक्षित उपयोग करने और सही तरीके से निपटान करने का है।
रोजमर्रा की जिंदगी में क्या सावधानी बरतें?
प्लास्टिक से संभावित जोखिम को कम करने के लिए कुछ व्यावहारिक कदम अपनाए जा सकते हैं—
* गर्म भोजन को ऐसे प्लास्टिक में न रखें जो गर्म पदार्थों के लिए निर्धारित न हो।
* प्लास्टिक कंटेनर को गर्म करने से पहले उसके उपयोग संबंधी निर्देश जरूर देखें।
* प्लास्टिक को खुले में न जलाएं।
* एक बार इस्तेमाल के लिए बने उत्पादों का अनावश्यक दोबारा इस्तेमाल न करें।
* भोजन और पानी के लिए निर्धारित गुणवत्ता वाले कंटेनर का इस्तेमाल करें।
* जहां व्यावहारिक हो, भोजन रखने के लिए कांच या स्टील के बर्तनों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
* प्लास्टिक के बर्तनों को अत्यधिक गर्मी और लंबे समय तक धूप में रखने से बचें।
* प्लास्टिक कचरे को अलग करके उचित कचरा प्रबंधन व्यवस्था में दें।
पूरा सच क्या है?
प्लास्टिक को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर प्लास्टिक उत्पाद समान नहीं होता और हर संपर्क से बीमारी होना साबित नहीं हुआ है। वैज्ञानिक समुदाय की चिंता मुख्य रूप से कुछ रसायनों, माइक्रोप्लास्टिक और लंबे समय तक होने वाले संपर्क के संभावित प्रभावों को लेकर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्लास्टिक के जीवन-चक्र के विभिन्न चरणों में स्वास्थ्य जोखिमों पर अधिक शोध और बेहतर जोखिम प्रबंधन की जरूरत बताई है। माइक्रोप्लास्टिक को लेकर भी उपलब्ध प्रमाणों में कई महत्वपूर्ण ज्ञान-अंतर अभी मौजूद हैं। इसलिए घबराने के बजाय समझदारी से इस्तेमाल करना ज्यादा जरूरी है। अनावश्यक प्लास्टिक कम करना, गर्म भोजन के लिए उपयुक्त बर्तन चुनना, प्लास्टिक न जलाना और कचरे का सही निपटान करना ऐसे कदम हैं जिन्हें आम लोग आसानी से अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं।
निष्कर्ष
प्लास्टिक आधुनिक जीवन का उपयोगी हिस्सा है, लेकिन इसका अंधाधुंध और गलत इस्तेमाल पर्यावरण के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी चिंता पैदा कर सकता है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण सावधानी और बेहतर शोध की जरूरत की ओर इशारा करते हैं—न कि हर प्लास्टिक उत्पाद को अपने आप जहरीला घोषित करने की ओर।