करेले का जूस पोषण का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। मधुमेह की दवा लेने वालों को ब्लड शुगर कम होने के जोखिम के कारण सावधानी रखनी चाहिए.
करेले का जूस पीने से क्या मिलते हैं फायदे? जानिए क्या कहती है रिसर्च
करेले का जूस और सेहत: ब्लड शुगर से लेकर पोषण तक, जानें जरूरी बातें
करेले का जूस रोज पीना कितना सही? फायदे के साथ इन सावधानियों का रखें ध्यान
करेले का जूस पीना हमारी सेहत के लिए कैसे होता है फायदेमंद, आइए जानते हैं
करेला अपने कड़वे स्वाद के बावजूद भारतीय खान-पान में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कई पोषक तत्व और जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इसी वजह से करेले के जूस को भी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताया जाता है। हालांकि, इसके औषधीय फायदों को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण हर मामले में एक जैसे नहीं हैं। खासकर ब्लड शुगर पर इसके प्रभाव को लेकर मानव अध्ययनों के परिणाम मिश्रित रहे हैं।
ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ सकता है?
करेले यानी मोमोर्डिका चरैंटिया पर मधुमेह और ब्लड ग्लूकोज से संबंधित कई अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोधों में करेले से रक्त शर्करा के स्तर में कमी देखी गई, जबकि अन्य अध्ययनों में इसका प्रभाव स्पष्ट या महत्वपूर्ण नहीं पाया गया। 2024 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में उपलब्ध यादृच्छिक नियंत्रित अध्ययनों के आधार पर ब्लड ग्लूकोज और एचबीए1सी सहित कई मेटाबॉलिक मानकों पर स्पष्ट लाभ साबित नहीं हो सका। वहीं, 2019 की एक व्यवस्थित समीक्षा में कुछ अध्ययनों में करेले से फास्टिंग और भोजन के बाद के ग्लूकोज स्तर में कमी देखी गई, लेकिन शोधकर्ताओं ने प्रमाण की गुणवत्ता को कम से बहुत कम बताया और बेहतर अध्ययन की जरूरत पर जोर दिया। इसलिए करेले के जूस को मधुमेह की दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
पोषण के लिहाज से क्यों लिया जाता है?
करेला एक सब्जी है और संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। जूस के रूप में लेने पर लोग इसे अपने आहार में शामिल करते हैं, लेकिन केवल करेले का जूस पीने से शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिल जाएंगे, ऐसा मानना सही नहीं है।विशेषज्ञ दृष्टिकोण से किसी एक खाद्य पदार्थ या पेय को संपूर्ण स्वास्थ्य का समाधान मानने के बजाय विविध और संतुलित आहार पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
वजन घटाने में कितना मददगार?
करेले को वजन घटाने से भी जोड़ा जाता है, लेकिन इस संबंध में उपलब्ध मानव शोध अभी पर्याप्त मजबूत नहीं है। 2024 के मेटा-विश्लेषण में करेले के सेवन और शरीर के वजन या बीएमआई में स्पष्ट महत्वपूर्ण बदलाव का प्रमाण नहीं मिला। इसलिए सिर्फ करेले का जूस पीकर वजन कम होने की उम्मीद करना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा।
मधुमेह की दवा लेने वाले रहें सावधान
करेले में रक्त शर्करा कम करने की संभावित क्षमता पर अध्ययन हुए हैं। ऐसे में जो लोग पहले से ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं, उनके लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के बड़ी मात्रा में करेले का जूस या इसके सप्लीमेंट लेना उचित नहीं हो सकता। NCCIH भी बताता है कि ऐसे हर्बल उत्पादों की प्रभावशीलता और सुरक्षा के बारे में प्रमाण सीमित हैं तथा इन्हें मधुमेह की दवाओं के साथ लेने पर सावधानी जरूरी है।
जूस को इलाज समझना क्यों सही नहीं?
करेले को लेकर कई स्वास्थ्य दावे प्रचलित हैं, लेकिन हर दावे के समर्थन में मजबूत मानव वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। अलग-अलग अध्ययनों में करेले की मात्रा, तैयारी और इस्तेमाल की अवधि भी अलग रही है। यही वजह है कि शोध से मिले परिणामों को सीधे हर व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता।
किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?
निष्कर्ष
करेला संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है और इसके स्वास्थ्य संबंधी संभावित प्रभावों पर वैज्ञानिक शोध जारी है। हालांकि, उपलब्ध मानव अध्ययनों के आधार पर करेले के जूस को किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज कहना सही नहीं होगा। खासकर मधुमेह के मरीज इसे दवा के विकल्प के रूप में न लें और नियमित सेवन शुरू करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।