इज़राइल और लेबनान के बीच अगले सप्ताह रोम में होने वाली वार्ता अक्टूबर तक स्थगित कर दी गई है। अमेरिकी मध्यस्थता के बीच दोनों देशों के राजदूत वॉशिंगटन में मुलाकात करेंगे। यह घटनाक्रम दक्षिणी लेबनान में जारी तनाव और जून में बने ढांचे को लागू करने की कोशिशों के बीच सामने आया है।
रोम | 12 सितंबर 2026
By Mohd Haris
इज़राइल और लेबनान के बीच कूटनीतिक बातचीत को लेकर अहम घटनाक्रम सामने आया है। अगले सप्ताह इटली की राजधानी रोम में प्रस्तावित वार्ता अब अक्टूबर तक टाल दी गई है। अमेरिकी अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक बैठक स्थगित होने के बावजूद दोनों देशों के बीच संपर्क पूरी तरह बंद नहीं होगा। इज़राइली और लेबनानी राजदूत वॉशिंगटन में मुलाकात करेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, रोम में प्रस्तावित बैठक को टालने की जानकारी अमेरिकी अधिकारी के हवाले से सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार यह बदलाव यहूदी धार्मिक अवकाश, पेरिस में लेबनानी सशस्त्र बलों से संबंधित सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र महासभा की तैयारियों से जुड़े कार्यक्रमों के कारण हुआ।
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक औपचारिक वार्ता का अगला दौर अब अक्टूबर में रोम में आयोजित किया जाएगा। इस बीच वॉशिंगटन में दोनों देशों के राजदूत मुलाकात करेंगे और जून में बने ढांचे को लागू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
रोम बैठक के स्थगित होने का मतलब बातचीत की प्रक्रिया का खत्म होना नहीं है। वॉशिंगटन में होने वाली राजदूत स्तर की बैठक इस बात का संकेत है कि अमेरिकी मध्यस्थता के तहत कूटनीतिक चैनल सक्रिय रखने की कोशिश जारी है।
हालांकि, औपचारिक वार्ता के अगले दौर को अक्टूबर तक टालना इस प्रक्रिया की रफ्तार के लिए अहम घटनाक्रम है। दक्षिणी लेबनान में सैन्य तनाव, इज़राइल की सुरक्षा चिंताएं और हिज़्बुल्लाह के हथियारों से जुड़ा विवाद अभी भी बातचीत के प्रमुख पेचीदा मुद्दों में शामिल हैं।
अमेरिका की मध्यस्थता में जून में एक ढांचा तैयार हुआ था, जिसका मकसद दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सैन्य मौजूदगी को चरणबद्ध तरीके से कम करना और संबंधित इलाकों में लेबनानी सेना की तैनाती बढ़ाना था। इसके साथ हिज़्बुल्लाह के हथियारों और उसकी सैन्य क्षमता को लेकर भी व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई।
जुलाई में रोम में हुई बातचीत के दौरान दो इलाकों को शुरुआती तौर पर इस व्यवस्था को लागू करने के लिए मॉडल क्षेत्र के रूप में चिन्हित करने की बात सामने आई थी। इससे बातचीत में सीमित प्रगति की उम्मीद बनी थी।
लेकिन इसके बाद भी जमीनी स्तर पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच दक्षिणी लेबनान को लेकर सुरक्षा विवाद बना हुआ है।
दक्षिणी लेबनान में इज़राइल की सैन्य मौजूदगी और हिज़्बुल्लाह के हथियारों का मुद्दा वार्ता की राह में सबसे संवेदनशील सवालों में है। इज़राइल अपनी सुरक्षा के लिए हिज़्बुल्लाह की सैन्य क्षमता को सीमित करने पर जोर देता रहा है। दूसरी तरफ लेबनान की ओर से इज़राइली सैन्य वापसी और संप्रभुता से जुड़े सवालों को अहम माना जा रहा है।
इज़राइल ने सितंबर में दक्षिणी लेबनान के अली अल-ताहिर क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह से जुड़े भूमिगत ढांचे को नष्ट करने की कार्रवाई की जानकारी दी थी। इज़राइली सेना ने इसे क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने से जोड़ा।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है और दूसरी तरफ दक्षिणी लेबनान में सैन्य गतिविधियां जारी हैं। दोनों प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाना अमेरिकी मध्यस्थता के लिए बड़ी चुनौती है।
लेबनानी पक्ष की ओर से दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सैन्य गतिविधियों को लेकर आपत्तियां सामने आती रही हैं। लेबनानी अधिकारियों का तर्क है कि लगातार सैन्य कार्रवाई बातचीत के लिए जरूरी माहौल को कमजोर करती है। इज़राइल का रुख है कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिज़्बुल्लाह की सैन्य क्षमता पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।
लेबनानी सेना ने हाल में जून में बने ढांचे के बाद इज़राइली उल्लंघनों की संख्या हजारों में होने का दावा किया है। यह लेबनानी पक्ष का दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
रिपोर्टों के मुताबिक अप्रैल से इज़राइल और लेबनान के बीच सीधे संवाद के कई दौर हो चुके हैं। इनमें अधिकांश बैठकें वॉशिंगटन में हुईं, जबकि बाद के दौर रोम में आयोजित किए गए।
रोम को वार्ता के लिए महत्वपूर्ण मंच इसलिए माना गया क्योंकि यहां पहले भी इज़राइल, लेबनान और अमेरिकी मध्यस्थता से जुड़े सुरक्षा संवाद हुए हैं। जुलाई में हुई बातचीत में सीमित प्रगति के संकेत मिले थे, लेकिन प्रमुख राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर अंतिम सहमति अभी बाकी है।
वार्ता की सफलता में हिज़्बुल्लाह की भूमिका एक अहम सवाल बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार संगठन ने इज़राइल और लेबनान के बीच चल रही बातचीत का विरोध किया है और लेबनानी सरकार से वार्ता रोकने की मांग भी की है।
दूसरी ओर, इज़राइल हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण को दक्षिणी लेबनान से अपनी सैन्य वापसी के लिए महत्वपूर्ण शर्त के रूप में देखता है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच अंतर काफी गहरा है।
रोम वार्ता स्थगित होने के बाद वॉशिंगटन में दोनों देशों के राजदूतों की मुलाकात कूटनीतिक प्रक्रिया को बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। इस बैठक में जून के ढांचे को लागू करने, सुरक्षा व्यवस्था और आगे की बातचीत की दिशा पर चर्चा होने की उम्मीद है।
इस बैठक से तत्काल किसी बड़े समझौते की उम्मीद जताना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इसका महत्व इस बात में है कि दोनों पक्ष बातचीत का संपर्क बनाए रखते हैं या नहीं और अक्टूबर की प्रस्तावित औपचारिक वार्ता के लिए कितना आधार तैयार होता है।
अब कूटनीतिक निगाहें अक्टूबर में प्रस्तावित रोम वार्ता पर हैं। अगर दोनों पक्ष तब बातचीत के लिए एक साझा आधार तैयार करते हैं, तो जून में बने ढांचे को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना बनेगी। लेकिन दक्षिणी लेबनान में जारी सैन्य तनाव और हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर मतभेद प्रक्रिया को मुश्किल बनाए रख सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी यह बताती है कि वार्ता स्थगित हुई है, खत्म नहीं। वॉशिंगटन में राजदूतों की बैठक और अक्टूबर में प्रस्तावित रोम वार्ता इस प्रक्रिया के अगले अहम पड़ाव होंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।