ऐता अल-जबल के पास बढ़ी इजरायली सेना की हलचल
दक्षिण लेबनान में इजरायली बढ़त से तनाव बढ़ा
ऐता अल-जबल के पास फिर सैन्य दबाव, सीज़फायर पर सवाल
दक्षिणी लेबनान के ऐता अल-जबल के पास इजरायली सेना के आगे बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है। जुलाई में भी इजरायली सैन्य वाहन गांव के बाहरी हिस्से तक पहुंचे थे। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक दक्षिण लेबनान में हिंसा कम हुई है, लेकिन सीज़फायर उल्लंघन लगातार दर्ज किए जा रहे हैं। स्थिति अभी अस्थिर है और संवेदनशील बनी हुई है।
ऐता अल-जबल, दक्षिणी लेबनान | 11 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
दक्षिणी लेबनान के ऐता अल-जबल गांव के आसपास इजरायली सेना की आगे बढ़ने की रिपोर्ट ने इलाके में पहले से कायम तनाव को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, 11 अगस्त 2026 को इसी क्षण सेना की नई बढ़त की स्वतंत्र पुष्टि सीमित उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इस घटनाक्रम को फिलहाल रिपोर्टेड मिलिट्री मूवमेंट के तौर पर पेश करना अधिक मुनासिब है।
ऐता अल-जबल बिंत जबील क्षेत्र में स्थित एक सीमावर्ती गांव है और लंबे समय से इजरायल-लेबनान संघर्ष का संवेदनशील इलाका रहा है। जुलाई के अंत में भी लेबनानी रिपोर्टों में कहा गया था कि इजरायली सैन्य वाहन गांव के बाहरी हिस्से तक पहुंचे और बाद में हदाथा की दिशा में लौट गए। अनादोलु एजेंसी और जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा ने उस घटनाक्रम की अलग-अलग रिपोर्टिंग की थी।
29 जुलाई 2026 को लेबनानी नेशनल न्यूज़ एजेंसी के हवाले से रिपोर्ट किया गया था कि इजरायली सैन्य वाहन ऐता अल-जबल के बाहरी इलाके में थोड़ी देर के लिए आगे बढ़े थे। रिपोर्ट के मुताबिक बाद में वाहन हदाथा की ओर लौट गए थे।
उसी दौरान दक्षिणी लेबनान के दूसरे इलाकों में बुलडोज़िंग, गोलाबारी और मकानों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की भी रिपोर्ट सामने आई थी। पेट्रा ने लेबनानी सुरक्षा सूत्र के हवाले से बताया था कि ऐता अल-जबल के बाहरी हिस्से में इजरायली वाहनों की मौजूदगी के बाद वापसी हुई थी।
इस पृष्ठभूमि में मौजूदा बढ़त की रिपोर्ट को एक अलग घटना मानने के बजाय व्यापक सीमा सुरक्षा हालात के संदर्भ में देखना जरूरी है। सवाल यह है कि क्या यह सीमित सामरिक मूवमेंट है या दक्षिण लेबनान में इजरायली सैन्य तैनाती का दायरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
दक्षिण लेबनान में सीज़फायर के बाद हिंसा का स्तर पहले की तुलना में कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। संयुक्त राष्ट्र की यूएनआईएफआईएल मिशन ने जुलाई में कहा था कि भारी लड़ाई में कमी आई है, लेकिन सीज़फायर उल्लंघन रोजाना दर्ज किए जा रहे हैं।
इजरायल का कहना है कि दक्षिण लेबनान में हिज़्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों और ढांचे को रोकना उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। दूसरी तरफ लेबनानी पक्ष और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सैन्य कार्रवाई और सीज़फायर उल्लंघनों को लेकर चिंता जाहिर करते रहे हैं।
यही मतभेद मौजूदा स्थिति की बुनियादी वजह है। इजरायल अपनी कार्रवाई को सिक्योरिटी जरूरत के तौर पर देखता है, जबकि लेबनान में इसे संप्रभुता और सीज़फायर व्यवस्था के उल्लंघन के रूप में देखा जाता है।
दक्षिण लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल, यानी यूएनआईएफआईएल, सीज़फायर और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। इसका एक प्रमुख काम रेज़ोल्यूशन 1701 के तहत हिंसा की निगरानी करना और दक्षिणी लेबनान में लेबनानी राज्य की सुरक्षा भूमिका मजबूत करने में मदद करना है।
यूएनआईएफआईएल ने जुलाई में कहा था कि दक्षिण लेबनान में हिंसा घटने के बावजूद हालात अस्थिर हैं। मिशन के मुताबिक सीज़फायर उल्लंघन लगातार दर्ज किए जा रहे हैं और युद्ध के दौरान छोड़े गए विस्फोटक खतरे स्थानीय आबादी तथा शांति सैनिकों के लिए जोखिम बने हुए हैं।
इसलिए ऐता अल-जबल के आसपास किसी भी नई सैन्य गतिविधि का महत्व केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। यह उस व्यापक सवाल से जुड़ता है कि क्या दक्षिण लेबनान में मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे स्थिर हो रही है या फिर जमीनी स्तर पर तनाव दोबारा बढ़ रहा है।
ऐता अल-जबल इजरायल-लेबनान सीमा के करीब स्थित है और बिंत जबील क्षेत्र का हिस्सा है। इस इलाके में 2024 के युद्ध और उससे पहले के संघर्षों के दौरान भारी सैन्य गतिविधियां हुई हैं।
अप्रैल 2026 में भी इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई गांवों के निवासियों को तत्काल इलाका छोड़ने की चेतावनी दी थी। ऐता अल-जबल उन गांवों की सूची में शामिल था। इजरायली सेना के प्रवक्ता ने उस समय दावा किया था कि चेतावनी हिज़्बुल्लाह की सीज़फायर उल्लंघन संबंधी गतिविधियों के जवाब में दी गई है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि ऐता अल-जबल को इजरायली सिक्योरिटी नैरेटिव में संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है। लेकिन किसी सैन्य गतिविधि को हिज़्बुल्लाह की मौजूदगी या सैन्य ढांचे से जोड़ने वाले दावों को स्वतंत्र पुष्टि के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
इजरायली सेना लगातार यह रुख रखती रही है कि दक्षिणी लेबनान से उसके खिलाफ संभावित हमलों और हिज़्बुल्लाह के सैन्य ढांचे को रोकना जरूरी है। अप्रैल में जारी एक चेतावनी में इजरायली सैन्य प्रवक्ता ने कहा था कि हिज़्बुल्लाह की गतिविधियां सेना को कार्रवाई के लिए मजबूर कर रही हैं।
इजरायल का दृष्टिकोण यह है कि केवल सीज़फायर की घोषणा पर्याप्त नहीं है। उसके मुताबिक सीमा के नजदीक हथियारों और सैन्य ढांचे की मौजूदगी उत्तरी इजरायल के लिए जोखिम पैदा करती है।
लेकिन इस रुख के सामने एक दूसरा सवाल भी है। यदि सुरक्षा के नाम पर दक्षिणी लेबनान में सैन्य गतिविधि लगातार जारी रहती है तो सीज़फायर की व्यावहारिक प्रभावशीलता कमजोर हो सकती है और विस्थापित नागरिकों की सुरक्षित वापसी मुश्किल बनी रह सकती है।
दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती गांवों में बड़ी संख्या में परिवार पहले ही संघर्ष से प्रभावित हो चुके हैं। मकानों, सड़कों, कृषि भूमि और स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान ने सामान्य जीवन की वापसी को कठिन बनाया है।
यूएनआईएफआईएल ने जुलाई में कहा था कि दक्षिणी लेबनान के समुदाय धीरे-धीरे लौट रहे हैं, लेकिन व्यापक तबाही और विस्फोटक अवशेष उनके लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र मिशन ने विस्फोटक खतरे हटाने और स्थानीय समुदायों की मदद के लिए अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं।
ऐसे माहौल में किसी गांव के पास नई सैन्य बढ़त का असर केवल सैन्य नक्शे पर नहीं पड़ता। इसका सीधा संबंध नागरिकों की आवाजाही, घर लौटने की क्षमता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से होता है।
फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों में ऐता अल-जबल के पास 11 अगस्त की नई बढ़त को व्यापक जमीनी अभियान की शुरुआत के तौर पर स्थापित करने वाली पर्याप्त स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है।
जुलाई की घटना में भी इजरायली वाहन गांव के बाहरी हिस्से तक पहुंचे थे और फिर पीछे हटने की रिपोर्ट आई थी। इसलिए किसी सीमित सैन्य मूवमेंट को स्थायी कब्जे या बड़े ऑपरेशन का संकेत मानना बिना अतिरिक्त सबूत के सही नहीं होगा।
आगे की स्थिति को समझने के लिए सैन्य तैनाती की अवधि, वाहनों की संख्या, इलाके में पैदल सैनिकों की मौजूदगी, गोलाबारी या हवाई हमलों की स्थिति और लेबनानी सेना तथा यूएनआईएफआईएल की प्रतिक्रिया जैसे संकेत महत्वपूर्ण होंगे।
दक्षिण लेबनान में मौजूदा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सीज़फायर के बावजूद दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाते हैं। अप्रैल में इजरायली सेना ने हिज़्बुल्लाह पर गतिविधियां जारी रखने का आरोप लगाया था, जबकि बाद में यूएनआईएफआईएल ने भी लगातार उल्लंघन दर्ज किए जाने की बात कही।
ऐसे हालात में किसी एक घटना को अलग करके देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। सैन्य कार्रवाई, जवाबी गतिविधि, स्थानीय विस्थापन और राजनयिक दबाव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
यदि ऐता अल-जबल के आसपास सैन्य मौजूदगी बढ़ती है और दूसरे सीमावर्ती इलाकों में भी ऐसी गतिविधियां दिखाई देती हैं तो यह सीज़फायर के कमजोर पड़ने का संकेत हो सकता है। इसके उलट यदि सेना सीमित अवधि के बाद पीछे हटती है और इलाके में हिंसा नहीं बढ़ती तो इसे सीमित सामरिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा सकता है।
आने वाले घंटों और दिनों में ऐता अल-जबल के आसपास इजरायली सेना की मौजूदगी सबसे महत्वपूर्ण संकेत होगी। इसके साथ लेबनानी सेना, हिज़्बुल्लाह, इजरायली सेना और यूएनआईएफआईएल के आधिकारिक बयानों की तुलना करना जरूरी होगा।
यूएनआईएफआईएल पहले ही कह चुका है कि दक्षिण लेबनान में हिंसा का स्तर कम हुआ है, लेकिन रेज़ोल्यूशन 1701 से जुड़े उल्लंघन जारी हैं। इसलिए नई जमीनी गतिविधि की पुष्टि होने पर उसका मूल्यांकन सीज़फायर की व्यापक स्थिति के संदर्भ में किया जाएगा।
सबसे अहम सवाल यह होगा कि क्या यह गतिविधि कुछ समय की सामरिक कार्रवाई तक सीमित रहती है या इजरायली सेना इलाके में स्थायी रूप से अपनी मौजूदगी बढ़ाती है। अभी उपलब्ध प्रमाण पहले विकल्प और दूसरे विकल्प के बीच निर्णायक फैसला करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
ऐता अल-जबल के पास इजरायली सेना के आगे बढ़ने की मौजूदा रिपोर्ट दक्षिण लेबनान की नाजुक सुरक्षा स्थिति की ओर इशारा करती है, लेकिन 11 अगस्त की इस विशिष्ट सैन्य बढ़त की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। जुलाई के अंत में इसी इलाके के बाहरी हिस्से तक इजरायली सैन्य वाहन पहुंचने की पुष्टि कई क्षेत्रीय रिपोर्टों में हुई थी।
जो बात स्पष्ट है, वह यह कि दक्षिण लेबनान में सीज़फायर के बावजूद सैन्य और सुरक्षा तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यूएनआईएफआईएल लगातार उल्लंघनों और अस्थिर हालात की बात कर चुका है।
आगे की तस्वीर इस बात से तय होगी कि ऐता अल-जबल के आसपास सैन्य मौजूदगी कितनी देर रहती है और क्या इलाके में नई गोलाबारी या जवाबी कार्रवाई होती है। फिलहाल इसे बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत बताना उपलब्ध साक्ष्यों से आगे जाना होगा। सही एडिटोरियल रुख यही है कि रिपोर्टेड मूवमेंट, आधिकारिक दावे और स्वतंत्र रूप से सत्यापित घटनाक्रम को अलग-अलग रखा जाए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।