युद्धविराम के बाद भी क्यों जारी है संघर्ष?
लेबनान और इज़राइल के बीच युद्धविराम के महीनों बाद भी दक्षिणी लेबनान में संघर्ष पूरी तरह थमा नहीं है। अली अल-ताहिर पहाड़ी के आसपास इज़राइली हवाई हमले और गोलाबारी जारी
रही है, जबकि हिज़्बुल्लाह ने इलाके में इज़राइली सैनिकों के खिलाफ ड्रोन हमले किए हैं। यह इलाका अब युद्धविराम के बाद की सबसे संवेदनशील सैन्य और कूटनीतिक फ्लैशपॉइंट में बदल
गया है।
दक्षिणी लेबनान | 5 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
अली अल-ताहिर पहाड़ी इतनी अहम क्यों है?
अली अल-ताहिर दक्षिणी लेबनान में नबातियेह के पास स्थित एक ऊंचा इलाका है। इसकी ऊंचाई और भौगोलिक स्थिति इसे सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह पहाड़ी इज़राइल की सीमा से करीब 15 किलोमीटर दूर है और लगभग 600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से आसपास के इलाकों और महत्वपूर्ण मार्गों पर
निगरानी रखी जा सकती है।
इज़राइल का आरोप है कि हिज़्बुल्लाह ने इस इलाके में भूमिगत सुरंगें, कमांड सेंटर और हथियारों से जुड़े ठिकाने बनाए थे। इज़राइली सेना ने दावा किया है कि इन भूमिगत ढांचों का इस्तेमाल
लड़ाकों और हथियारों को छिपाने के लिए किया जाता था।
इज़राइल ने पहाड़ी पर नियंत्रण का दावा किया
4 सितंबर को इज़राइली सेना ने कहा कि उसने अली अल-ताहिर पहाड़ी और उसके नीचे मौजूद सुरंग नेटवर्क पर “ऑपरेशनल कंट्रोल” हासिल कर लिया है।
इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज ने इसे दक्षिणी लेबनान में इज़राइल के घोषित सुरक्षा क्षेत्र पर नियंत्रण पूरा होने से जोड़ा। इज़राइली सेना का कहना है कि उसने सुरंगों में मौजूद हिज़्बुल्लाह
लड़ाकों को हटाया और भूमिगत ढांचे को निष्क्रिय करने की कार्रवाई शुरू की।
लेकिन इस दावे की वास्तविक जमीनी सीमा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। AP की रिपोर्ट के अनुसार, उसके फोटोग्राफर ने नजदीकी गांव से पहाड़ी को देखा, लेकिन वहां इज़राइली सैनिकों की
मौजूदगी नजर नहीं आई। हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइल के दावे पर तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।
हिज़्बुल्लाह ने इलाके को क्यों नहीं छोड़ा?
हिज़्बुल्लाह के लिए अली अल-ताहिर केवल एक पहाड़ी नहीं है। इसका स्थान दक्षिणी लेबनान के भीतर उसके सैन्य नेटवर्क और आवाजाही के लिहाज से अहम माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस इलाके से दक्षिणी लेबनान के दूसरे हिज़्बुल्लाह ठिकानों और इक़लीम अल-तुफ्फाह क्षेत्र की दिशा में संपर्क बना रहता है। पहाड़ी पर इज़राइली पकड़ मजबूत होने से
हिज़्बुल्लाह की स्थानीय गतिविधियों और सप्लाई नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि हिज़्बुल्लाह के एक अधिकारी ने इस इलाके की अहमियत को स्वीकार करते हुए भी कहा है कि पहाड़ी खोने का मतलब संगठन का अंत नहीं होगा। यह बयान बताता है कि संगठन इसे
महत्वपूर्ण मानता है, लेकिन इसे निर्णायक सैन्य हार के रूप में पेश नहीं कर रहा।
युद्धविराम के बाद भी हमले क्यों जारी हैं?
जून में युद्धविराम की व्यवस्था के बाद दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से में हिंसा कम हुई। लेकिन अली अल-ताहिर और उसके आसपास सैन्य गतिविधियां जारी रहीं।
UNIFIL ने भी दक्षिणी लेबनान में हिंसा और Blue Line के आसपास उल्लंघनों की निगरानी जारी रखी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, स्थायी स्थिरता के लिए Resolution 1701 का पूर्ण पालन और
लेबनानी राज्य की सुरक्षा भूमिका मजबूत होना जरूरी है।
इसका मतलब है कि युद्धविराम ने व्यापक स्तर पर लड़ाई की तीव्रता कम की है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य नियंत्रण से जुड़े मूल विवाद अभी खत्म नहीं हुए हैं।
अगस्त में संघर्ष फिर तेज हुआ
अगस्त में अली अल-ताहिर के आसपास तनाव बढ़ा। इज़राइल ने एक हिज़्बुल्लाह ड्रोन हमले के जवाब में दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले किए। AP के अनुसार, अगस्त के मध्य में हुए इन हमलों
में 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। यह जून के युद्धविराम के बाद उस समय तक का सबसे घातक इज़राइली हमला बताया गया।
27 अगस्त को भी इज़राइल ने इलाके में हवाई हमले किए। इज़राइली सेना ने कहा कि हिज़्बुल्लाह ने उसके सैनिकों को निशाना बनाकर विस्फोटक ड्रोन भेजे थे। उस हमले की जिम्मेदारी
हिज़्बुल्लाह ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं की थी।
लेबनानी सेना की भूमिका पर भी विवाद
इस संघर्ष का एक अहम पहलू लेबनानी सेना की भूमिका है। अमेरिका की मध्यस्थता वाले प्रयासों में यह प्रस्ताव सामने आया कि अली अल-ताहिर का नियंत्रण लेबनानी सेना को दिया जाए।
लेबनानी सरकार की ओर से कहा गया है कि सेना इलाके की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार है। लेकिन लेबनान के उपप्रधानमंत्री तारिक मित्री ने आरोप लगाया कि इज़राइल इस प्रक्रिया में
बाधा डाल रहा है। इज़राइल ने अपनी सुरक्षा चिंताओं और हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण को दक्षिणी लेबनान से अपनी वापसी के साथ जोड़ा है।
यही विवाद युद्धविराम को स्थायी राजनीतिक समझौते में बदलने की राह में बड़ी रुकावट है।
हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण का सवाल
दक्षिणी लेबनान में असली विवाद केवल एक पहाड़ी पर नियंत्रण का नहीं है। बड़ा सवाल हिज़्बुल्लाह के हथियारों और सैन्य ढांचे का है।
अमेरिका और इज़राइल चाहते हैं कि लेबनानी राज्य पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करे। हिज़्बुल्लाह ने दक्षिण में कुछ व्यवस्थाओं पर चर्चा की है, लेकिन उसके हथियारों और
व्यापक सैन्य ढांचे को लेकर उसकी स्थिति इज़राइल की मांगों से अलग है।
Resolution 1701 भी Blue Line और लितानी नदी के बीच के इलाके को ऐसे क्षेत्र के रूप में देखता है जहां लेबनानी सरकार और UNIFIL के अलावा सशस्त्र बलों, हथियारों और सैन्य संपत्तियों
की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए।
क्या यह फिर बड़े युद्ध में बदल सकता है?
अली अल-ताहिर पर जारी संघर्ष को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सीमित सैन्य टकराव फिर व्यापक युद्ध में बदल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पहाड़ी पर पूर्ण सैन्य संघर्ष दक्षिणी लेबनान के दूसरे इलाकों में भी तनाव बढ़ा सकता है। साथ ही, लेबनान में जारी राजनीतिक और सैन्य खींचतान क्षेत्रीय कूटनीति को और कठिन बनाती है।
रिपोर्ट ने भी इस इलाके को इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच प्रमुख फ्लैशपॉइंट बताया है। पहाड़ी पर इज़राइली नियंत्रण मजबूत होता है तो हिज़्बुल्लाह की सैन्य स्थिति पर दबाव बढ़ेगा और
भविष्य की बातचीत में इज़राइल को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
अमेरिका की मध्यस्थता और आगे की बातचीत
अमेरिका लेबनान और इज़राइल के बीच समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में इज़राइल की वापसी को हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और लेबनानी सेना के
दक्षिण में नियंत्रण से जोड़ा गया है।
इसी बीच लेबनान और इज़राइल के अधिकारियों के बीच आगे बातचीत की तैयारी जारी है। अली अल-ताहिर पर नियंत्रण का विवाद इन वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
युद्धविराम की असली परीक्षा
अली अल-ताहिर की लड़ाई दिखाती है कि युद्धविराम और स्थायी शांति दो अलग-अलग स्थितियां हैं। गोलीबारी कम होना अपने आप में सैन्य विवाद खत्म होने का प्रमाण नहीं है।
जब तक दक्षिणी लेबनान में नियंत्रण, हिज़्बुल्लाह के हथियार, इज़राइली सैन्य मौजूदगी और लेबनानी सेना की भूमिका पर स्पष्ट सहमति नहीं बनती, तब तक छोटे इलाकों में टकराव की गुंजाइश
बनी रहेगी।
फिलहाल अली अल-ताहिर इसी बड़े विवाद का केंद्र बना हुआ है। इज़राइल इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी सैन्य स्थिति मान रहा है, जबकि हिज़्बुल्लाह और लेबनानी पक्ष इसके नियंत्रण को
लेकर अलग रणनीतिक और राजनीतिक नजरिया रखते हैं। इसलिए इस पहाड़ी पर होने वाला अगला घटनाक्रम केवल स्थानीय सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे युद्धविराम की दिशा का संकेत भी दे
सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।