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विध्वंस के खतरे के बीच स्कूल लौट रहे फिलिस्तीनी बच्चे, 84 स्कूलों पर कार्रवाई का खतरा

Shah Times 2026-08-27 15:24:24
विध्वंस के खतरे के बीच स्कूल लौट रहे फिलिस्तीनी बच्चे, 84 स्कूलों पर कार्रवाई का खतरा

दक्षिणी वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी बच्चे ऐसे स्कूल लौट रहे हैं जिसका एक हिस्सा 4 अगस्त को गिराया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 84 स्कूल विध्वंस आदेश या कार्रवाई के दायरे में हैं।


मसाफ़र यत्ता, वेस्ट बैंक | 27 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स

By Mohd Haris


स्कूल की इमारत आधी रह गई, डर पूरा बना हुआ है

दक्षिणी अधिकृत वेस्ट बैंक के मसाफ़र यत्ता इलाके में नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत बच्चों के लिए सामान्य वापसी जैसी नहीं है। यहां बच्चे स्कूल लौटने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन जिस इमारत में वे पढ़ते हैं उसका एक हिस्सा पहले ही गिराया जा चुका है और बाकी भवन पर भी विध्वंस की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। शाब अल-बुतुम गांव का प्राथमिक स्कूल स्थानीय बच्चों के लिए शिक्षा का अहम केंद्र है। 4 अगस्त को इजरायली बलों ने स्कूल के दो प्रशासनिक कमरों और एक स्टोर रूम को ध्वस्त कर दिया था। अब स्कूल के बाकी हिस्से को लेकर भी कानूनी और प्रशासनिक अनिश्चितता बनी हुई है।

नए सत्र की शुरुआत चिंता के साथ

फराह, मोहम्मद और जवाद इसी स्कूल में पढ़ते हैं। उनकी उम्र क्रमशः 17, 8 और 7 साल बताई गई है। स्कूल का नया सत्र शुरू होने से पहले बच्चों में पढ़ाई को लेकर उत्साह के साथ यह चिंता भी है कि कहीं उनका एकमात्र स्थानीय स्कूल पूरी तरह खत्म न हो जाए। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल के बाकी हिस्से पर भी विध्वंस का खतरा है और इस मामले में 15 सितंबर को अदालत में सुनवाई निर्धारित है। इसलिए बच्चों की शिक्षा का सवाल केवल इमारत के मौजूदा नुकसान तक सीमित नहीं है। आने वाले महीनों में स्कूल के अस्तित्व पर ही सवाल बना हुआ है।

इजरायल का परमिट संबंधी तर्क

संयुक्त राष्ट्र के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायली पक्ष ने ध्वस्त किए गए ढांचों के लिए इजरायल द्वारा जारी निर्माण अनुमति नहीं होने को कार्रवाई का आधार बताया। यह क्षेत्र वेस्ट बैंक के एरिया सी में आता है, जहां प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण इजरायल के पास है। फिलिस्तीनी पक्ष और मानवीय संगठनों का कहना है कि एरिया सी में फिलिस्तीनियों के लिए ऐसे निर्माण परमिट हासिल करना बेहद मुश्किल है। इसी वजह से परमिट व्यवस्था और उसके इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले में किसी पक्ष के आरोप को दूसरे पक्ष की पुष्टि के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। स्कूल के विध्वंस का कारण बताते समय इजरायली प्रशासन की अनुमति संबंधी स्थिति और फिलिस्तीनी पक्ष की आपत्तियों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

मसाफ़र यत्ता में स्कूलों पर व्यापक दबाव

स्थानीय मसाफ़र यत्ता परिषद के प्रमुख निदाल यूनिस ने अल जज़ीरा को बताया कि व्यापक इलाके के सभी 7 स्कूल विध्वंस के खतरे का सामना कर रहे हैं। उनके मुताबिक, स्कूलों के साथ-साथ विद्यार्थियों के आने-जाने और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी सुरक्षा संबंधी दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट में एक्टिविस्ट और शिक्षक तारिक हथलीन के हवाले से कहा गया है कि स्थानीय समुदायों में स्कूलों और दूसरी इमारतों पर कार्रवाई को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी रहती है। उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष में जॉर्डन घाटी के एक स्कूल में बसने वालों के हमले का भी उल्लेख किया। इन दावों को संबंधित पक्षों के बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।

84 स्कूलों पर विध्वंस या काम रोकने के आदेश

मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के 7 अगस्त 2026 के आकलन के अनुसार, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में लगभग 13,000 विद्यार्थियों को सेवा देने वाले 84 स्कूल विध्वंस आदेशों के दायरे में थे। इसी रिपोर्ट में बताया गया कि एरिया सी में 4 स्कूलों से जुड़े विध्वंस मामलों और मसाफ़र यत्ता में 3 स्कूल ढांचों के ध्वंस ने शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को सामने रखा है। संयुक्त राष्ट्र के आकलन में स्कूलों पर कार्रवाई को शिक्षा तक सुरक्षित और निरंतर पहुंच के लिए गंभीर चुनौती बताया गया है।

बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर

यूनिसेफ के अगस्त 2026 के आकलन के मुताबिक, वेस्ट बैंक में 800,000 से अधिक बच्चे सुरक्षित और निरंतर शिक्षा हासिल करने में बाधाओं का सामना कर रहे हैं। इनमें स्कूल बंद होना, असुरक्षा, आवाजाही पर पाबंदियां और शिक्षा ढांचे को नुकसान जैसे कारण शामिल हैं। यूनिसेफ ने यह भी बताया कि 2026 में शिक्षा से जुड़े 99 घटनाक्रम दर्ज किए गए हैं। इनमें बच्चों के मारे जाने, घायल होने या हिरासत में लिए जाने, स्कूलों के ध्वस्त किए जाने और स्कूल भवनों के सैन्य इस्तेमाल जैसी घटनाएं शामिल हैं। इसका असर केवल कक्षा में पढ़ाई तक सीमित नहीं रहता। जब बच्चों को स्कूल पहुंचने में डर लगे या स्कूल का भविष्य अनिश्चित हो, तो पढ़ाई का नियमित सिलसिला टूटता है। इससे सीखने की क्षमता और बच्चों की मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

वेस्ट बैंक में सुरक्षा हालात भी गंभीर

वेस्ट बैंक में शिक्षा पर संकट व्यापक सुरक्षा स्थिति से जुड़ा है। यूनिसेफ के अनुसार, 2026 के पहले 6 महीनों में क्षेत्र में रोजाना औसतन 6 बसने वालों से जुड़ी हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं। इसी अवधि में 2,300 से अधिक फिलिस्तीनी विस्थापित हुए, जिनमें 1,000 से ज्यादा बच्चे शामिल थे।

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसियों ने घरों और दूसरी नागरिक संरचनाओं के ध्वंस, आवाजाही पर प्रतिबंध और हिंसा के कारण विस्थापन को भी शिक्षा तक पहुंच में बड़ी रुकावट माना है। अगस्त की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र के एक आकलन में बताया गया कि एक सप्ताह के दौरान वेस्ट बैंक में विध्वंस से 22 लोग विस्थापित हुए और 100 से अधिक लोग प्रभावित हुए।

स्कूल क्यों अहम हैं

मसाफ़र यत्ता जैसे दूरदराज के इलाकों में स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं हैं। वे स्थानीय समुदाय के बच्चों को अपने गांव के आसपास शिक्षा जारी रखने का अवसर देते हैं। अगर कोई स्कूल बंद होता है या पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाता है, तो विद्यार्थियों को दूसरे इलाके में जाना पड़ सकता है। संघर्ष और आवाजाही की पाबंदियों वाले क्षेत्र में यह बदलाव बच्चों और परिवारों के लिए अतिरिक्त मुश्किल पैदा कर सकता है।

इसी संदर्भ में यूनिसेफ ने स्कूल और सामुदायिक शिक्षण केंद्रों को बच्चों के लिए सामान्य दिनचर्या, शिक्षा और मनोसामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने वाली अहम जगहों के तौर पर रेखांकित किया है।

फिलिस्तीनी शिक्षा मंत्रालय की आपत्ति

फिलिस्तीनी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्रालय ने 4 अगस्त को शाब अल-बुतुम स्कूल के हिस्से के विध्वंस की निंदा की थी। मंत्रालय के अनुसार, यह स्कूल किंडरगार्टन से लेकर 11वीं कक्षा तक के 59 विद्यार्थियों को सेवा देता है और स्थानीय समुदाय में शिक्षा की बुनियादी जरूरत पूरी करता है।

मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवीय संगठनों से स्कूलों और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उसने कार्रवाई को शिक्षा के अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून से जुड़े सवाल के तौर पर पेश किया। यह फिलिस्तीनी प्रशासन का आधिकारिक रुख है। इसे इजरायली पक्ष की स्थिति से अलग रखते हुए देखना जरूरी है।

सितंबर की सुनवाई पर नजर

शाब अल-बुतुम स्कूल के बचे हुए हिस्से को लेकर 15 सितंबर की प्रस्तावित अदालत की सुनवाई अब अहम पड़ाव बन गई है। इसका नतीजा स्कूल के भविष्य और वहां पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पर असर डाल सकता है। फिलहाल बच्चे नए सत्र के लिए स्कूल लौटने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन उनके सामने सवाल केवल यह नहीं है कि अगली कक्षा में क्या पढ़ना है। सवाल यह भी है कि जिस स्कूल में वे पढ़ते हैं, वह आने वाले समय में मौजूद रहेगा या नहीं।

शिक्षा और मानवीय अधिकार का सवाल

वेस्ट बैंक में स्कूलों पर बढ़ता दबाव एक व्यापक मानवीय मसले की तरफ इशारा करता है। बच्चों को सुरक्षित और लगातार शिक्षा मिलना किसी भी संघर्ष क्षेत्र में सबसे कठिन लेकिन सबसे जरूरी जरूरतों में शामिल है। मसाफ़र यत्ता के बच्चों की स्थिति इस संकट का स्थानीय चेहरा है। एक तरफ नया शैक्षणिक वर्ष शुरू हो रहा है, दूसरी तरफ स्कूल के भविष्य पर कानूनी और प्रशासनिक अनिश्चितता बनी हुई है। आने वाले दिनों में 15 सितंबर की सुनवाई, क्षेत्र में विध्वंस संबंधी आदेश और सुरक्षा हालात इस बात को तय करने में अहम होंगे कि इन बच्चों की पढ़ाई कितनी स्थिर रह पाती है। फिलहाल उनका स्कूल लौटना सामान्य शैक्षणिक शुरुआत से ज्यादा, अनिश्चित हालात में शिक्षा जारी रखने की कोशिश बन गया है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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