वेस्ट बैंक के तैबेह में बढ़ा डर, ईसाई परिवारों पर दबाव
तैबेह में बसने वालों के हमलों का आरोप, सेना ने लगाया प्रतिबंध
तैबेह में दहशत क्यों? आखिरी पूरी तरह ईसाई कस्बे की कहानी
वेस्ट बैंक के तैबेह में ईसाई परिवारों ने बढ़ते बसने वाले हमलों, आगजनी, जमीन पर दबाव और आवाजाही की पाबंदियों के बीच डर बताया है। 9 अगस्त को इजरायली सेना ने गैर-निवासियों के लिए कस्बे को बंद सैन्य क्षेत्र घोषित किया। चर्च नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की अपील की है।
वेस्ट बैंक के ऐतिहासिक ईसाई कस्बे तैबेह में रहने वाले परिवारों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय निवासियों और चर्च प्रतिनिधियों के मुताबिक, इजरायली बसने वालों की घुसपैठ, आगजनी, जमीन पर कब्जे की कोशिशों और खेती तक पहुंच में रुकावट ने रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। अल जज़ीरा की 14 अगस्त की रिपोर्ट में कई परिवारों ने रात के समय सुरक्षा को लेकर अपने डर का बयान दिया है।
तैबेह को वेस्ट बैंक का आखिरी पूरी तरह ईसाई कस्बा बताया जाता है। वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेज़ के मुताबिक यहां करीब 1,200 लोग रहते हैं और पूरी आबादी ईसाई है। 1980 के दशक में यहां आबादी लगभग 3,000 थी।
यह इलाका धार्मिक और ऐतिहासिक लिहाज़ से भी अहम है। तैबेह में पांचवीं सदी के सेंट जॉर्ज चर्च के अवशेष मौजूद हैं। कस्बे की पहचान बाइबिल में वर्णित एफ्राइम से भी जोड़ी जाती है।
तैबेह के निवासियों ने पिछले एक साल में हमलों में बढ़ोतरी की शिकायत की है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्थानीय परिवारों ने खेतों में बसने वालों की मौजूदगी, आगजनी और निजी जमीन तक पहुंच में रुकावट की घटनाएं बताई हैं।
कस्बे के एक कारोबारी रॉलैंड बसीर ने अल जज़ीरा को बताया कि उनकी पत्थर की खदान और कंक्रीट ब्लॉक फैक्ट्री पर मार्च में दर्जनों बसने वालों ने धावा बोला। उनके मुताबिक मशीनरी को नुकसान पहुंचाया गया, कार्यालय में तोड़फोड़ हुई और निगरानी कैमरे हटाए गए। ये दावे स्थानीय शिकायतों और उपलब्ध तस्वीरों तथा वीडियो पर आधारित हैं।
वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेज़ ने भी तैबेह में गोलीबारी, आगजनी, पेड़ों को नुकसान पहुंचाने और ईसाई परिवारों की संपत्तियों में घुसने की घटनाओं का उल्लेख किया है। संस्था के मुताबिक इन घटनाओं का असर बच्चों पर भी पड़ा है।
जून में तैबेह के नजदीक एक बड़े इलाके में आग लगने की घटना सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पादरी और फिलिस्तीनी सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि इजरायली बसने वालों ने आग बुझाने की कोशिश कर रहे लोगों को रोका और पानी के टैंकर को घटनास्थल तक पहुंचने में बाधा डाली।
रिपोर्ट ने बताया कि आग के दौरान इजरायली सेना ने भी फायरफाइटर्स को कुछ समय के लिए घटनास्थल तक पहुंचने से रोका, जब तक सुरक्षा समन्वय पूरा नहीं हुआ। इजरायली सेना ने उस रिपोर्ट पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
स्थानीय पादरी फादर बशार फवादलेह ने इसे अलग-अलग घटनाओं के बजाय लगातार डर और हिंसा के पैटर्न के रूप में वर्णित किया था। हालांकि आगजनी के जिम्मेदार व्यक्ति की उनकी ओर से स्वतंत्र पहचान नहीं की गई थी।
9 अगस्त को इजरायली सेना ने तैबेह को गैर-निवासियों के लिए बंद सैन्य क्षेत्र घोषित किया। रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने कहा कि यह कदम इलाके में इजरायली नागरिकों की हिंसक गतिविधियों और बसने वालों के हमलों को रोकने के लिए उठाया गया है।
सेना ने स्पष्ट किया कि यह आदेश इजरायलियों पर लागू है, फिलिस्तीनी निवासियों पर नहीं। इजरायली सेना के मुताबिक, आदेश के उल्लंघन की सूचना मिलने पर सैनिकों को इलाके में भेजा जाएगा और संदिग्धों को हिरासत में लेने तथा भीड़ को तितर-बितर करने की कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले का एक अहम पहलू यह है कि सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली इजरायली सेना ने खुद तैबेह को बंद सैन्य क्षेत्र घोषित किया है। इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि सभी आरोप न्यायिक या स्वतंत्र जांच में साबित हो चुके हैं, लेकिन यह बताता है कि इलाके में हिंसा और सुरक्षा की स्थिति को इजरायली प्रशासन ने भी गंभीर माना है।
तैबेह वेस्ट बैंक के उस हिस्से में स्थित है जहां प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकार अलग-अलग व्यवस्थाओं में बंटे हुए हैं। रॉयटर्स के मुताबिक कस्बे के कुछ हिस्से एरिया बी में आते हैं, जहां फिलिस्तीनी प्राधिकरण सिविल प्रशासन संभालता है, जबकि सुरक्षा मामलों में इजरायल के साथ समन्वय आवश्यक रहता है।
जून की आग के दौरान इसी व्यवस्था का असर आपातकालीन सेवाओं पर पड़ा। फिलिस्तीनी सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा समन्वय पूरा होने तक उनके कर्मचारियों की पहुंच रोक दी गई थी।
यही व्यवस्था तैबेह के लोगों के लिए एक जटिल सुरक्षा मुआमला पैदा करती है। स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं मौजूद हैं, लेकिन सुरक्षा नियंत्रण की अलग व्यवस्था के कारण संकट के समय कार्रवाई में देरी हो सकती है।
तैबेह में मौजूदा तनाव का असर केवल जमीन और कारोबार तक सीमित नहीं है। वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेज़ के मुताबिक, बच्चों को स्कूल आने-जाने के दौरान सुरक्षा की चिंता रहती है। चर्च अधिकारियों ने बताया कि बसने वालों की मौजूदगी की खबर मिलने पर परिवार बच्चों को लेने के लिए भी तुरंत गांव नहीं पहुंच पाते।
रिपोर्ट में एक स्थानीय परिवार ने बताया कि उनका सात साल का बेटा बाहर खेलना छोड़ चुका है और पिता के काम पर जाने को लेकर चिंतित रहता है। परिवार ने घर में आग बुझाने के उपकरण तक रखे हैं क्योंकि उन्हें आसपास आगजनी की आशंका रहती है।
इन बयानों को पूरे कस्बे की स्थिति का सांख्यिकीय प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता, लेकिन वे स्थानीय परिवारों की सुरक्षा संबंधी चिंता का एक प्रत्यक्ष मानवीय चित्र पेश करते हैं।
तैबेह के आसपास इजरायली बस्तियों और आउटपोस्ट की मौजूदगी भी विवाद का अहम हिस्सा है। वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेज़ के मुताबिक कस्बा कई बस्तियों और दर्जनों आउटपोस्ट से घिरा हुआ है।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट में तैबेह के मेयर सुलेमान खौरीह के हवाले से कहा गया है कि कस्बे के आसपास करीब सात बसने वाले आउटपोस्ट हैं। स्थानीय निवासियों ने निजी कृषि भूमि पर पशु चराने और खेतों तक पहुंच सीमित होने की शिकायत की है।
जमीन पर नियंत्रण का यह विवाद तैबेह के लिए आर्थिक सवाल भी है। जैतून की खेती, कृषि भूमि और स्थानीय कारोबारी गतिविधियां समुदाय की आजीविका से जुड़ी हैं। जमीन तक पहुंच में लगातार रुकावट लंबे वक्त में आबादी के पलायन का दबाव बढ़ा सकती है।
तैबेह की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए फिलिस्तीनी ईसाई आबादी में लंबे समय से जारी कमी को भी देखना जरूरी है। अल जज़ीरा के मुताबिक वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी ईसाइयों की आबादी करीब 40,000 रह गई है।
तैबेह में भी पलायन का असर दिखाई देता है। अल जज़ीरा ने स्थानीय पादरी के हवाले से बताया कि पिछले दो वर्षों में 15 परिवार कस्बा छोड़ चुके हैं। कई लोग अमेरिका और यूरोप चले गए हैं।
यह आंकड़ा किसी एक घटना के कारण हुए पलायन को नहीं दर्शाता। इसमें आर्थिक दबाव, आवाजाही की पाबंदियां, जमीन तक पहुंच, सुरक्षा और व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता जैसे कई कारक शामिल हैं।
तैबेह में हिंसा का मामला व्यापक वेस्ट बैंक संकट से जुड़ा हुआ है। रॉयटर्स के मुताबिक, जून में एक संयुक्त राष्ट्र जांच में आरोप लगाया गया था कि इजरायली अधिकारी वेस्ट बैंक में बसने वालों के ऐसे हमलों में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं जिनमें फिलिस्तीनियों की मौत, चोट और विस्थापन हुआ।
इजरायल के जिनेवा मिशन ने इस निष्कर्ष को खारिज किया। इजरायल का कहना है कि उसके सैन्य और पुलिस बल वेस्ट बैंक में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हैं और फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हैं।
तैबेह के मामले में भी इसी अंतर को समझना जरूरी है। स्थानीय निवासियों और चर्च प्रतिनिधियों ने बसने वालों पर हमलों के आरोप लगाए हैं, जबकि इजरायली सेना ने अगस्त में तैबेह को बंद सैन्य क्षेत्र घोषित कर हिंसा रोकने के लिए कार्रवाई का दावा किया है।
तैबेह की कहानी केवल एक स्थानीय सुरक्षा विवाद नहीं है। यह फिलिस्तीनी ईसाई समुदाय के भविष्य से भी जुड़ी है। कस्बे की आबादी करीब 1,200 रह गई है और धार्मिक तथा ऐतिहासिक विरासत के बावजूद लगातार असुरक्षा पलायन का दबाव बढ़ा रही है।
अगर परिवारों को खेती, कारोबार, स्कूल और रोजमर्रा की आवाजाही में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ता है, तो लंबे समय में आबादी का और कम होना संभव है। लेकिन इसे भविष्य की निश्चित स्थिति के तौर पर पेश करना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का है। क्या इजरायली सेना का बंद सैन्य क्षेत्र वाला फैसला बसने वालों की हिंसा को स्थायी रूप से रोक पाएगा, या यह केवल अस्थायी सुरक्षा उपाय बनकर रह जाएगा।
तैबेह में आने वाले दिनों में तीन पहलू अहम रहेंगे। पहला, इजरायली सेना बंद सैन्य क्षेत्र के आदेश को कितनी प्रभावी तरह लागू करती है। दूसरा, बसने वालों की गतिविधियों और स्थानीय संपत्तियों तथा कृषि भूमि पर दबाव में कमी आती है या नहीं। तीसरा, स्थानीय ईसाई परिवारों का पलायन रुकता है या जारी रहता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्च संस्थाएं और कुछ पश्चिमी सरकारें बसने वालों की हिंसा के खिलाफ दबाव बढ़ाने की मांग कर रही हैं। लेकिन स्थानीय लोगों के लिए असली पैमाना बयान नहीं, बल्कि जमीन पर सुरक्षा, स्वतंत्र आवाजाही और संपत्ति की हिफाज़त होगी।
तैबेह आज वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी ईसाई समुदाय की मुश्किल स्थिति का अहम उदाहरण बन गया है। कस्बे में रहने वाले लोगों की शिकायतें बसने वालों की हिंसा, आगजनी, जमीन पर दबाव और आवाजाही की पाबंदियों से जुड़ी हैं। कई घटनाओं की रिपोर्ट स्वतंत्र मीडिया और चर्च संस्थाओं ने भी की है।
9 अगस्त को इजरायली सेना का तैबेह को गैर-निवासियों के लिए बंद सैन्य क्षेत्र घोषित करना इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है। सेना का कहना है कि कदम इजरायली बसने वालों के हमले रोकने के लिए है। दूसरी तरफ, स्थानीय चर्च नेता और निवासी ज्यादा प्रभावी सुरक्षा और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
तैबेह के लिए आने वाला दौर केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि अस्तित्व, जमीन, विरासत और आबादी को बनाए रखने का भी सवाल है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।