संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को लेकर फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा की एकजुटता
Harish Qureshi
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2026-09-23 12:03:23
फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा ने फिलिस्तीन को मान्यता देने के बाद दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया। गाजा संकट और पश्चिमी तट की बस्तियों को लेकर तीनों देशों ने चिंता जताई है।
न्यूयॉर्क | 23 सितंबर 2026
Mohd Haris
गाजा में जारी मानवीय संकट और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के बीच फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता को लेकर पश्चिमी देशों की कूटनीतिक नीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा अब फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले प्रमुख पश्चिमी देशों में शामिल हैं और तीनों दो-राष्ट्र समाधान को क्षेत्रीय शांति का आधार बताते रहे हैं।
इस संदर्भ में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फ्रांस ने फिलिस्तीनी राज्य के समर्थन से दूरी नहीं बनाई थी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 22 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र में आयोजित उच्चस्तरीय सम्मेलन के दौरान फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देने की घोषणा की थी।
जरूरी तथ्य
फ्रांस ने 22 सितंबर 2025 को फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दी। उसी दौर में ब्रिटेन और कनाडा ने भी अपनी औपचारिक मान्यता की घोषणा की। ब्रिटेन ने 21 सितंबर 2025 को फिलिस्तीन को मान्यता देने की पुष्टि की थी।
कनाडा ने जुलाई 2025 में ही घोषणा कर दी थी कि वह सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देगा। कनाडाई सरकार ने इस फैसले को दो-राष्ट्र समाधान को संरक्षित करने और गाजा की बिगड़ती मानवीय स्थिति के बीच अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई से जोड़ा था।
मुख्य घटनाक्रम
फ्रांस की मान्यता की घोषणा उस सम्मेलन में हुई जिसकी सह-अध्यक्षता फ्रांस और सऊदी अरब ने की थी। फ्रांस के अनुसार, फिलिस्तीन की मान्यता का उद्देश्य इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दो-राष्ट्र समाधान की संभावना को बनाए रखना था। फ्रांस ने साथ ही इजरायल की सुरक्षा और उसके अस्तित्व के अधिकार के समर्थन को भी दोहराया।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 12 सितंबर 2025 को महासभा ने न्यूयॉर्क घोषणा का समर्थन 142 मतों से किया था। घोषणा में गाजा में तत्काल युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और एक संप्रभु तथा व्यवहार्य फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना जैसे मुद्दे शामिल थे।
फ्रांस का रुख
फ्रांस ने फिलिस्तीन की मान्यता को इजरायल के अधिकारों के विरोध के रूप में पेश नहीं किया। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा था कि फिलिस्तीनी जनता के वैध अधिकारों की मान्यता इजरायली जनता के अधिकारों को कम नहीं करती। फ्रांस ने इजरायल की सुरक्षा और दोनों देशों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को अपने कूटनीतिक रुख का हिस्सा बताया।
फ्रांस ने साथ ही यह भी कहा कि फिलिस्तीनी राज्य का भविष्य असैन्यीकरण और इजरायल की स्वीकृति जैसे प्रावधानों से जुड़ा होना चाहिए।
ब्रिटेन का रुख
ब्रिटेन ने 21 सितंबर 2025 को फिलिस्तीनी राज्य को औपचारिक मान्यता दी। ब्रिटिश सरकार ने इसे दो-राष्ट्र समाधान की व्यवहारिक संभावना को बचाने और इजरायल तथा फिलिस्तीनियों के लिए स्थायी शांति की दिशा में कदम बताया।
ब्रिटेन ने साथ ही कहा कि हमास की भविष्य के फिलिस्तीनी शासन में कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए और उसके कब्जे में मौजूद बंधकों की रिहाई जरूरी है। ब्रिटिश सरकार ने मान्यता के साथ गाजा की मानवीय स्थिति और पश्चिमी तट में बस्तियों के विस्तार को भी अपने निर्णय के संदर्भ में रखा।
कनाडा का रुख
कनाडा ने जुलाई 2025 में फिलिस्तीन को मान्यता देने की अपनी मंशा घोषित की थी। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार ने गाजा में बिगड़ते मानवीय संकट और दो-राष्ट्र समाधान को बचाए रखने को निर्णय का प्रमुख संदर्भ बताया।
कनाडा ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण से शासन में सुधार, 2026 में आम चुनाव कराने और फिलिस्तीनी राज्य के असैन्यीकरण जैसी शर्तों से जुड़े कदम उठाने की अपेक्षा भी जताई थी।
व्यापक संदर्भ
फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता को लेकर पश्चिमी देशों का रुख लंबे समय से एक जैसा नहीं रहा है। अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों ने इस सवाल को इजरायल और फिलिस्तीन के बीच प्रत्यक्ष वार्ता तथा अंतिम राजनीतिक समझौते से जोड़ा है।
दूसरी ओर, फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा का तर्क रहा है कि दो-राष्ट्र समाधान की संभावना कमजोर होने से पहले फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता राजनीतिक प्रक्रिया को समर्थन देने का माध्यम हो सकती है।
सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में न्यूयॉर्क घोषणा के समर्थन और कई देशों द्वारा फिलिस्तीन की मान्यता ने इस कूटनीतिक बदलाव को व्यापक अंतरराष्ट्रीय संदर्भ दिया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उस समय दस देशों ने फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की घोषणा की थी।
2026 में तीनों देशों की स्थिति
सितंबर 2026 में फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा ने दो-राष्ट्र समाधान पर संयुक्त बयान जारी किया। तीनों देशों ने कहा कि पश्चिमी तट में इजरायली बस्तियों का विस्तार और बसने वालों की हिंसा दो-राष्ट्र समाधान के लिए गंभीर चुनौती हैं।
तीनों देशों ने बस्तियों से संबंधित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने और बस्तियों तथा उनसे लाभ उठाने वाले लोगों के खिलाफ लक्षित कदम उठाने की बात भी कही। साथ ही बयान में इजरायल की सुरक्षा और इजरायली जनता के साथ साझेदारी के समर्थन को दोहराया गया।
महत्वपूर्ण तारीखें
जुलाई 2025 में कनाडा ने फिलिस्तीन को मान्यता देने की योजना घोषित की।
12 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने न्यूयॉर्क घोषणा को 142 मतों के समर्थन से मंजूरी दी।
21 सितंबर 2025 को ब्रिटेन ने फिलिस्तीनी राज्य को औपचारिक मान्यता दी।
22 सितंबर 2025 को फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देने की घोषणा की।
8 सितंबर 2026 को फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा ने दो-राष्ट्र समाधान की रक्षा के लिए संयुक्त कदमों की घोषणा की।
आगे क्या
फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा का मौजूदा रुख फिलिस्तीन की मान्यता से आगे बढ़कर दो-राष्ट्र समाधान को व्यवहारिक रूप देने पर केंद्रित है। लेकिन जमीन पर गाजा की स्थिति, इजरायल की सुरक्षा, हमास की भूमिका, बंधकों का मुद्दा, पश्चिमी तट में बस्तियों का विस्तार और फिलिस्तीनी शासन से जुड़े सवाल अब भी कूटनीतिक प्रक्रिया के प्रमुख मुद्दे हैं।
मान्यता अपने आप में संघर्ष का समाधान नहीं करती। ब्रिटेन ने भी अपनी आधिकारिक घोषणा में स्पष्ट किया था कि केवल मान्यता से जमीन पर हालात नहीं बदलेंगे।
निष्कर्ष
फिलिस्तीन के सवाल पर फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा का रुख अब एक साझा कूटनीतिक दिशा में दिखाई देता है। तीनों देश फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दे चुके हैं और इजरायल तथा फिलिस्तीन के साथ-साथ अस्तित्व वाले दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन कर रहे हैं। सितंबर 2026 का संयुक्त बयान इस नीति को और स्पष्ट करता है, हालांकि गाजा और पश्चिमी तट की जमीनी परिस्थितियां इस कूटनीतिक लक्ष्य के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।