अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प हैं, ईरान के साथ ऐसा समझौता जिसमें वह दोबारा आर्थिक और राजनीतिक रूप से आगे बढ़े, या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को “नष्ट” कर दिया जाए।
ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय गतिविधियों को अमेरिकी कार्रवाई के प्रमुख कारणों के रूप में पेश किया। उन्होंने दूसरे देशों से भी ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने का आह्वान किया।
धमकी के कुछ घंटे बाद बातचीत
ट्रंप के भाषण के बाद घटनाक्रम ने अचानक कूटनीतिक मोड़ लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्रकारों से पुष्टि की कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने न्यूयॉर्क में ईरानी अधिकारियों के साथ लगभग तीन घंटे बैठक की। ट्रंप ने बातचीत को “बहुत अच्छी” और “उत्पादक” बताया, लेकिन बैठक की विस्तृत शर्तें सार्वजनिक नहीं की गईं।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात की। रिपोर्टों के मुताबिक बैठक अमेरिकी पक्ष के अनुरोध पर हुई थी।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य भी बातचीत का अहम मुद्दा
बातचीत के केंद्र में ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के साथ-साथ होर्मुज़ जलडमरूमध्य का मुद्दा भी रहा। अमेरिकी पक्ष ईरान से जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और वार्ता की मेज पर लौटने का दबाव बना रहा है।
ईरानी पक्ष ने अपनी ओर से युद्ध समाप्त करने, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियों पर लगी रोक जैसे मुद्दे उठाए हैं, हालांकि इन शर्तों पर अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भाषण के दौरान सदन छोड़ा
ट्रंप के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के अधिकांश सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा कक्ष से बाहर चले गए। यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब ट्रंप ईरान के खिलाफ अपने सैन्य और कूटनीतिक रुख का बचाव कर रहे थे।
ट्रंप ने समझौते की संभावना भी जताई
धमकी के साथ ट्रंप ने बातचीत की संभावना भी खुली रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के साथ समझौता हो सकता है। उनके बयान में सैन्य दबाव और कूटनीतिक समाधान, दोनों रास्ते एक साथ दिखाई दिए।
अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष कई महीनों से जारी है। इसी बीच दोनों पक्षों के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर बीच-बीच में बातचीत भी होती रही है। सितंबर 2026 में ईरानी शीर्ष अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका ने प्रवेश की अनुमति दी थी, हालांकि उनकी आवाजाही पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे।
इससे पहले भी वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत और सैन्य टकराव समानांतर रूप से चलते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई ताजा बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे सैन्य धमकी के बाद सामने आई।
आगे क्या
अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच अगली बैठक की संभावना जताई गई है। ट्रंप ने कहा है कि बातचीत आगे बढ़ सकती है, लेकिन अभी किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया में युद्धविराम, ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
निष्कर्ष
22 सितंबर का घटनाक्रम अमेरिका-ईरान संबंधों में एक असामान्य विरोधाभास सामने लाता है। संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ विनाश की चेतावनी दी, जबकि उसी दिन अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच कई घंटे बातचीत हुई। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।