न्यूयॉर्क | 26 सितंबर 2026
By Mohd Haris
ईरान ने अमेरिका के सामने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को रोकने और रणनीतिक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर खोलने के लिए सात दिन का प्रस्ताव रखा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बताया कि प्रस्ताव कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। उनके मुताबिक, अमेरिका जरूरी शर्तों को स्वीकार करता है तो सात दिन की टाइमलाइन शुरू होगी।
ईरान के प्रस्ताव के मुताबिक, शुरुआती कदमों के बाद छठे दिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर खोलने की प्रक्रिया होगी और सातवें दिन अमेरिका के साथ व्यापक बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव है। बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत दोनों पक्षों द्वारा सहमति वाले मुद्दे शामिल होंगे।
प्रस्ताव में क्या है
ईरानी पक्ष के मुताबिक, प्रस्ताव के लिए अमेरिका को कुछ अहम कदम उठाने होंगे। इनमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, ईरानी तेल बिक्री पर प्रतिबंधों में राहत और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करना शामिल है। इसके साथ क्षेत्रीय स्तर पर युद्धविराम की शर्त भी प्रस्ताव का हिस्सा बताई गई है।
इसके बदले ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करने और अमेरिका के साथ आगे की बातचीत शुरू करने की बात कर रहा है। यह प्रस्ताव जून में हुए अमेरिका-ईरान समझौते के ढांचे से जुड़ा बताया गया है।
अराघची ने क्या कहा
अराघची ने कहा कि सात दिन की टाइमलाइन अमेरिका द्वारा प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बाद शुरू होगी। उन्होंने इसे एक ठोस योजना बताते हुए कहा कि जरूरी शर्तें पूरी होने पर सामान्य समुद्री आवाजाही सात दिनों में बहाल की जा सकती है।
ईरान का कहना है कि प्रस्ताव में अमेरिका से जिन कदमों की मांग की गई है, वे नई शर्तें नहीं हैं। अराघची ने इन्हें जून में हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू से जुड़ा बताया है।
अमेरिका की स्थिति क्या है
अमेरिका ने अभी ईरान के सात दिन के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत जारी है तथा परमाणु मुद्दे पर भी चर्चा हो रही है।
इससे फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वॉशिंगटन ईरान की सभी शर्तों को स्वीकार करेगा या प्रस्ताव में बदलाव की मांग करेगा। अमेरिकी पक्ष की सार्वजनिक स्थिति और ईरानी प्रस्ताव के बीच अभी महत्वपूर्ण अंतर बने हुए हैं।
होर्मुज़ क्यों अहम है
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और खाड़ी क्षेत्र से तेल तथा गैस के अंतरराष्ट्रीय परिवहन के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है। अल जज़ीरा के अनुसार, युद्ध से पहले दुनिया के कारोबार किए जाने वाले तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इस मार्ग से गुजरता था।
इसी वजह से होर्मुज़ में समुद्री आवाजाही बाधित होने का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा संबंध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, शिपिंग लागत और तेल बाजार से जुड़ जाता है।
सात दिन की टाइमलाइन कैसे काम करेगी
ईरान के बताए रोडमैप के अनुसार, सात दिन की प्रक्रिया अमेरिका की स्वीकृति के बाद शुरू होगी।
पहले चरण में अमेरिका से सैन्य और आर्थिक दबाव कम करने से जुड़े कदमों की अपेक्षा है। इसमें ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाना और तेल से जुड़े प्रतिबंधों में राहत जैसी बातें शामिल हैं।
छठे दिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का प्रस्ताव है। सातवें दिन अमेरिका के साथ व्यापक वार्ता शुरू करने की बात कही गई है। बातचीत में परमाणु कार्यक्रम समेत पारस्परिक रूप से सहमत विषय शामिल होने हैं।
जून के समझौते से क्या संबंध है
ईरान का नया प्रस्ताव जून में हुए एक एमओयू के मॉडल से जुड़ा है। उस समझौते में सैन्य गतिविधियां रोकने और होर्मुज़ में समुद्री आवाजाही बहाल करने के लिए एक व्यापक वार्ता प्रक्रिया की व्यवस्था बताई गई थी।
हालांकि, जून का समझौता बाद में टिक नहीं सका और दोनों पक्षों के बीच फिर सैन्य टकराव बढ़ गया। अब तेहरान उसी ढांचे को कम समय की सात दिन की टाइमलाइन के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
परमाणु मुद्दे पर ईरान का रुख
इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह अपने परमाणु अधिकारों पर दबाव में रियायत देने को तैयार नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका के प्रस्ताव स्वीकार करने की स्थिति में भी तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई रियायत नहीं देगा। खास तौर पर यूरेनियम संवर्धन और अपने संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने जैसे मुद्दों पर ईरानी रुख सख्त बताया गया है।
यह बिंदु आगे की बातचीत में सबसे कठिन मुद्दों में से एक बन सकता है।
कतर की मध्यस्थ भूमिका
अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत सीमित रहने के बीच कतर संदेश पहुंचाने वाले मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरानी प्रस्ताव भी कतर के माध्यम से अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़ा है। हालांकि, अभी इसे अंतिम समझौते की दिशा में निर्णायक सफलता के तौर पर पेश करना जल्दबाजी होगी।
मौजूदा स्थिति
26 सितंबर तक उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान अपने सात दिन के प्रस्ताव पर अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है, लेकिन प्रस्ताव की औपचारिक स्वीकृति की पुष्टि नहीं हुई है।
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रस्ताव खारिज कर दिया है। हालांकि, रॉयटर्स ने यह भी रिपोर्ट किया कि ईरान अमेरिकी आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा था। इसलिए प्रस्ताव की अंतिम स्थिति को लेकर अमेरिकी आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।