एर्दोगन का संयुक्त राष्ट्र में इजरायल पर तीखा हमला, ‘नरसंहार की मानसिकता’ का आरोप
Harish Qureshi
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2026-09-23 13:34:41
संयुक्त राष्ट्र महासभा में एर्दोगन ने गाजा की स्थिति पर इजरायल की कड़ी आलोचना की और उसके रवैये को “नरसंहार की मानसिकता” बताया। उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन की अपील की।
न्यूयॉर्क | 22 सितंबर 2026
Mohd Haris
तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में गाजा युद्ध और फिलिस्तीन के मुद्दे पर कड़ा संबोधन दिया। उन्होंने इजरायल की सैन्य कार्रवाई और पश्चिमी तट में बढ़ती हिंसा की आलोचना की तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप बढ़ाने की अपील की।
एर्दोगन ने अपने संबोधन में इजरायल के रवैये को “नरसंहार की मानसिकता” बताया। यह एर्दोगन का आरोप और राजनीतिक आकलन है। इजरायल गाजा में नरसंहार के आरोपों को खारिज करता रहा है।
जरूरी तथ्य
एर्दोगन ने कहा कि गाजा में संघर्षविराम के बावजूद फिलिस्तीनी नागरिकों के सामने गंभीर मानवीय संकट बना हुआ है। उन्होंने गाजा को अपने समय का सबसे अमानवीय और शर्मनाक “एकाग्रता शिविर” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की अपील की।
उन्होंने पश्चिमी तट में इजरायली बस्तियों के विस्तार और बसने वालों की हिंसा पर भी चिंता जताई। एर्दोगन के अनुसार, इन घटनाक्रमों से दो-राष्ट्र समाधान की संभावना प्रभावित हो रही है।
मुख्य घटनाक्रम
एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 81 साल पहले शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से स्थापित संयुक्त राष्ट्र अब अपने मूल दायित्व को पूरा करने में असमर्थ हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी इसी सत्र में गाजा की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि गाजा में हत्या और तबाही का स्तर उनके लंबे कार्यकाल में देखी गई घटनाओं से अलग है। उन्होंने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेशों का पालन करने की अपील की।
इजरायल पर एर्दोगन का आरोप
एर्दोगन ने कहा कि गाजा और पश्चिमी तट में जारी घटनाओं को सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इजरायल पर फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
अपने भाषण में उन्होंने “नरसंहार की मानसिकता” का जिक्र किया और कहा कि मानवीय संवेदना रखने वाला कोई व्यक्ति गाजा की स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
यहां यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि “नरसंहार” का इस्तेमाल एर्दोगन और तुर्किये सरकार की राजनीतिक और कूटनीतिक स्थिति के संदर्भ में हुआ है। इजरायल इन आरोपों को अस्वीकार करता है। अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रिया में गाजा से जुड़े नरसंहार के आरोपों पर अलग कानूनी कार्यवाही और निष्कर्ष मौजूद हैं, इसलिए राजनीतिक बयान और न्यायिक निष्कर्ष को एक ही तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
फिलिस्तीन को मान्यता देने की अपील
एर्दोगन ने उन देशों से फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की अपील की, जिन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है। उन्होंने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की अनुपस्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि अब्बास लगातार दूसरे वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में मौजूद नहीं थे।
एर्दोगन ने फिलिस्तीन के राजनीतिक अधिकारों और स्वतंत्र राज्य की मांग को अपने संबोधन का प्रमुख हिस्सा बनाया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल पर दबाव बढ़ाने की अपील भी की।
संयुक्त राष्ट्र पर भी सवाल
इजरायल की आलोचना के साथ एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 190 से अधिक देशों की इच्छा पांच स्थायी सदस्यों के फैसलों से प्रभावित होती है और यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय भरोसे के लिए समस्या पैदा करती है।
तुर्किये लंबे समय से सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है। एर्दोगन ने अपने ताजा संबोधन में भी इसी रुख को दोहराया।
गाजा का व्यापक संदर्भ
गाजा का मुद्दा इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रमुख विषयों में शामिल रहा। महासचिव गुतारेस ने भी कहा कि तथाकथित संघर्षविराम के बावजूद नागरिकों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने गाजा में मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और लड़ाई रोकने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक बयान में यह भी कहा गया कि पश्चिमी तट में हिंसा, विस्थापन और बस्तियों का विस्तार दो-राष्ट्र समाधान के रास्ते को और कठिन बना रहा है।
इजरायल का पक्ष
एर्दोगन के आरोपों के जवाब में इजरायल का रुख अलग रहा है। इजरायली सरकार गाजा में नरसंहार के आरोपों को खारिज करती है और अपनी सैन्य कार्रवाई को सुरक्षा तथा हमास के खिलाफ अभियान के संदर्भ में रखती है। रॉयटर्स ने भी तुर्किये के आरोपों के साथ इजरायल के इनकार को दर्ज किया है।
इसलिए गाजा संघर्ष पर रिपोर्टिंग में आरोप, राजनीतिक बयान और अंतरराष्ट्रीय कानूनी निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
आगे क्या
एर्दोगन के संबोधन से तुर्किये का मौजूदा कूटनीतिक रुख फिर स्पष्ट हुआ है। अंकारा फिलिस्तीनी राज्य की व्यापक अंतरराष्ट्रीय मान्यता और इजरायल पर ज्यादा कूटनीतिक दबाव की मांग कर रहा है।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र के सामने चुनौती संघर्षविराम को स्थायी राजनीतिक प्रक्रिया में बदलने, मानवीय सहायता पहुंचाने और दो-राष्ट्र समाधान को बनाए रखने की है। महासचिव गुतारेस ने भी इसी दिशा में अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपील की है।
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र महासभा में एर्दोगन ने गाजा की मानवीय स्थिति को केंद्र में रखते हुए इजरायल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इजरायल के रवैये को “नरसंहार की मानसिकता” बताया और दुनिया से फिलिस्तीन के समर्थन तथा इजरायल पर दबाव बढ़ाने की अपील की। इजरायल इन आरोपों को खारिज करता है।
संबोधन में एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और फिलिस्तीनी राज्य की व्यापक मान्यता का मुद्दा भी उठाया। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने गाजा में जारी मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन की जरूरत पर जोर दिया।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।