गाज़ा युद्ध पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘नाज़ा’ को वेनिस फिल्म फेस्टिवल में सम्मान मिलने के बाद इज़राइल में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। संस्कृति मंत्री मिकी ज़ोहर ने निर्देशक युवाल अब्राहम और रेचल ज़ोर की नागरिकता रद्द कराने के लिए कार्रवाई करने की बात कही है। इज़राइली सेना ने फिल्म में लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
तेल अवीव | 14 सितंबर 2026
By Mohd Haris
गाज़ा युद्ध पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री को लेकर इज़राइल में नया राजनीतिक और सांस्कृतिक विवाद खड़ा हो गया है। इज़राइल के संस्कृति मंत्री मिकी ज़ोहर ने फिल्म ‘नाज़ा’ के निर्देशकों युवाल अब्राहम और रेचल ज़ोर की इज़राइली नागरिकता रद्द कराने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने फिल्मकारों पर देश के साथ गद्दारी करने का आरोप लगाया।
यह बयान फिल्म के वेनिस फिल्म फेस्टिवल में सम्मान मिलने के तुरंत बाद आया। ‘नाज़ा’ को वेनिस में विशेष ज्यूरी पुरस्कार मिला और फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद करीब 25 मिनट तक तालियां बजती रहीं।
क्या है ‘नाज़ा’ फिल्म
‘नाज़ा’ एक 80 मिनट की डॉक्यूमेंट्री है। इसे इज़राइली फिल्मकार युवाल अब्राहम और रेचल ज़ोर ने निर्देशित किया है। दोनों इससे पहले ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री ‘नो अदर लैंड’ से भी जुड़े रहे हैं।
फिल्म में इज़राइली सैन्य और खुफिया तंत्र से जुड़े 24 लोगों की गुमनाम गवाही शामिल की गई है। फिल्मकारों के मुताबिक इन लोगों ने गाज़ा में सैन्य अभियानों, निगरानी व्यवस्था और लक्षित हमलों से जुड़ी अंदरूनी जानकारी साझा की है।
फिल्म का दावा है कि गाज़ा में सैन्य लक्ष्यों की पहचान और हमलों की प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों तथा बड़े पैमाने की निगरानी का इस्तेमाल किया गया।
इज़राइली मंत्री ने क्या कहा
संस्कृति मंत्री मिकी ज़ोहर ने फिल्म और उसके निर्देशकों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्मकार अपने देश को नुकसान पहुंचाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हासिल करना चाहते हैं।
ज़ोहर ने कहा कि वे दोनों फिल्मकारों की नागरिकता रद्द कराने के लिए कार्रवाई करेंगे। उन्होंने उनके काम को देशद्रोह के रूप में पेश किया।
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने भी दोनों फिल्मकारों की आलोचना की। उन्होंने उन्हें इज़राइल के लिए शर्मिंदगी बताया और उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
क्या नागरिकता वास्तव में रद्द हो गई है
नहीं। यह अंतर महत्वपूर्ण है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मिकी ज़ोहर ने नागरिकता रद्द कराने की कार्रवाई करने की बात कही है। इससे यह साबित नहीं होता कि दोनों फिल्मकारों की नागरिकता तत्काल रद्द हो गई है।
इज़राइल में कुछ परिस्थितियों में नागरिकता रद्द करने का कानूनी प्रावधान मौजूद है। लेकिन इसके लिए निर्धारित सरकारी और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
इज़राइल में नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया
रिपोर्टों के मुताबिक इज़राइल में नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया कई स्तरों से गुजरती है। इसमें गृह मंत्री की पहल, न्याय मंत्री की मंजूरी और न्यायिक सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इसलिए संस्कृति मंत्री की घोषणा अपने आप में नागरिकता समाप्त करने का कानूनी आदेश नहीं है।
यह भी उल्लेखनीय है कि नागरिकता रद्द करने का प्रावधान सामान्य राजनीतिक या कलात्मक असहमति के लिए स्वतः लागू होने वाली व्यवस्था नहीं है। उपलब्ध कानूनी संदर्भों में इसका इस्तेमाल गंभीर सुरक्षा मामलों, आतंकवाद या देशद्रोह जैसे मामलों से जुड़ा रहा है।
फिल्म में क्या आरोप लगाए गए हैं
‘नाज़ा’ में इज़राइली सैन्य और खुफिया अधिकारियों के रूप में प्रस्तुत गुमनाम स्रोतों के हवाले से गाज़ा में हमलों की प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
फिल्म में दावा किया गया है कि कुछ सैन्य प्रणालियां संभावित लक्ष्यों की पहचान में एआई और बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन निगरानी से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल करती थीं। कुछ गवाहों ने
नागरिकों की संभावित मौतों को सैन्य अभियानों में स्वीकार किए जाने का आरोप भी लगाया।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। फिल्म में मौजूद गवाहों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
इज़राइली सेना का जवाब
इज़राइली रक्षा बलों ने फिल्म के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
सेना का कहना है कि डॉक्यूमेंट्री में इस्तेमाल किए गए गुमनाम स्रोतों की पहचान और उनकी सैन्य भूमिका स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकती। सेना ने यह भी कहा कि फिल्म में सैन्य और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े दावों में गलतियां और विरोधाभास हैं।
इज़राइली सेना ने खास तौर पर इस दावे को चुनौती दी है कि गाज़ा में हमलों के फैसले कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियां खुद लेती थीं। उसके मुताबिक हमले से जुड़े निर्णय इंसानी सैन्य अधिकारियों द्वारा लिए जाते हैं।
वेनिस फिल्म फेस्टिवल में मिली बड़ी प्रतिक्रिया
‘नाज़ा’ का वर्ल्ड प्रीमियर वेनिस फिल्म फेस्टिवल में हुआ। फिल्म को दर्शकों से करीब 25 मिनट की स्टैंडिंग ओवेशन मिली। इसके बाद इसे विशेष ज्यूरी पुरस्कार भी मिला।
वेनिस फिल्म फेस्टिवल के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक फिल्म का निर्देशन युवाल अब्राहम और रेचल ज़ोर ने किया है। इसकी अवधि 80 मिनट है और यह प्रतियोगिता वर्ग में शामिल थी।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान ने फिल्म को वैश्विक राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।
दोनों निर्देशक पहले भी विवादों में रहे
युवाल अब्राहम और रेचल ज़ोर ऑस्कर विजेता फिल्म ‘नो अदर लैंड’ के सह-निर्देशकों में शामिल रहे हैं। इस फिल्म में पश्चिमी तट पर इज़राइली बस्तियों और फिलिस्तीनी समुदाय पर उनके प्रभाव को दिखाया गया था।
अब ‘नाज़ा’ के जरिए दोनों ने गाज़ा युद्ध के दौरान सैन्य अभियानों और नागरिकों पर पड़ने वाले असर को केंद्र में रखा है।
इसी वजह से फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना के साथ-साथ इज़राइल के भीतर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है
इस मामले का असर फिल्म से आगे जाता है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़ा सवाल भी उठाता है।
एक तरफ इज़राइली सरकार के मंत्री फिल्म को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताते हैं। दूसरी तरफ फिल्मकारों का कहना है कि उन्होंने युद्ध के दौरान सैन्य व्यवस्था और नागरिकों पर उसके प्रभाव की पड़ताल की है।
पत्रकारिता और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण के लिहाज़ से गुमनाम स्रोतों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण रहती है। इसी तरह सरकार या सेना की आपत्तियों को भी रिपोर्टिंग में शामिल करना जरूरी है।
गाज़ा युद्ध की व्यापक पृष्ठभूमि
‘नाज़ा’ की कहानी गाज़ा युद्ध की पृष्ठभूमि में सामने आई है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इज़राइल ने गाज़ा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया।
गाज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार इस संघर्ष में अब तक 73,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इन आंकड़ों में नागरिक और लड़ाके अलग-अलग वर्गों में पूरी तरह विभाजित नहीं हैं।
इज़राइल का कहना है कि उसके सैन्य अभियान हमास के खिलाफ हैं और वह नागरिक हताहतों को कम करने की कोशिश करता है। इज़राइल यह भी आरोप लगाता है कि हमास घनी आबादी वाले इलाकों में काम करता है और नागरिकों को मानवीय ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है। हमास इन आरोपों से इनकार करता है।
सबसे अहम सवाल
इस पूरे विवाद में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या संस्कृति मंत्री की घोषणा आगे औपचारिक कानूनी कार्रवाई में बदलती है।
दूसरा सवाल फिल्म में लगाए गए गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच से जुड़ा है। इज़राइली सेना ने आरोपों को खारिज किया है, जबकि फिल्मकारों ने अपने दावों के समर्थन में गुमनाम सैन्य और खुफिया स्रोतों की गवाही पेश की है।
इसलिए इस समय फिल्म के आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उन्हें फिल्म में शामिल गवाहियों और निर्देशकों के दावों के रूप में रिपोर्ट करना अधिक सटीक है।
आगे क्या होगा
मिकी ज़ोहर के बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि क्या नागरिकता रद्द करने की कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू होती है।
साथ ही ‘नाज़ा’ को लेकर इज़राइली सरकार, सेना और फिल्मकारों के बीच सार्वजनिक टकराव बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल तथ्य यही है कि फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फिल्म मंच पर सम्मान मिला है, इज़राइली मंत्री ने निर्देशकों की नागरिकता रद्द कराने की कार्रवाई की बात कही है और इज़राइली सेना ने डॉक्यूमेंट्री के मुख्य आरोपों को खारिज किया है। यही तीनों पहलू इस विवाद की वास्तविक तस्वीर समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।