जी7 का ईरान को संदेश, हूतियों की हथियार और सैन्य मदद तुरंत रोकें
Harish Qureshi
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2026-09-22 13:32:03
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जी7 ने ईरान से हूतियों को हथियार और समर्थन रोकने की मांग की। समूह ने सऊदी अरब पर हमलों और लाल सागर में नागरिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
न्यूयॉर्क, अमेरिका | 21 सितंबर 2026
By Mohd Haris
जी7 ने ईरान से हूतियों का समर्थन रोकने को कहा
जी7 देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से यमन के हूती समूह को हथियार और अन्य समर्थन देना बंद करने की मांग की है। यह अपील संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। जी7 ने हूतियों की ओर से सऊदी अरब के खिलाफ जारी हमलों और नागरिक जहाजों को निशाना बनाने की धमकियों पर गंभीर चिंता जताई।
जी7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। विदेश मंत्रियों ने कहा कि हूतियों की सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक स्थिरता के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं।
सऊदी अरब पर हमलों की निंदा
जी7 विदेश मंत्रियों ने यमन में और सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों की जारी सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की। बयान में इन हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए हूतियों से सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग की गई।
जी7 ने हूतियों से नागरिक जहाजों के खिलाफ सभी धमकियां और हमले तुरंत रोकने को कहा। साथ ही राजनीतिक प्रक्रिया में गंभीरता के साथ लौटने की अपील की गई।
ईरान पर क्या कहा गया
जी7 का मुख्य संदेश ईरान की भूमिका को लेकर था। विदेश मंत्रियों ने तेहरान से हूतियों को हथियार देने और अन्य समर्थन बंद करने को कहा।
बयान में ईरान के समर्थन को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के एक खतरनाक पैटर्न से जोड़ा गया और कहा गया कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा वैश्विक स्थिरता पर असर पड़ने का खतरा है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जी7 का यह बयान ईरान की भूमिका को लेकर समूह का आधिकारिक आकलन है। ईरान हूतियों को हथियार देने के आरोपों से इनकार करता रहा है और अपने समर्थन को राजनीतिक समर्थन के रूप में पेश करता है।
लाल सागर की जहाजरानी पर चिंता
लाल सागर दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां नागरिक और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने की आशंका रहती है।
जी7 ने हूतियों से नागरिक जहाजों पर सभी हमले और धमकियां रोकने की मांग इसी व्यापक समुद्री सुरक्षा चिंता के बीच की है।
जी7 पहले भी लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बता चुका है। मार्च 2025 के जी7 समुद्री सुरक्षा बयान में हूती हमलों को समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा बताया गया था तथा ईरान के सैन्य, वित्तीय और खुफिया समर्थन का उल्लेख किया गया था।
बाब अल-मंदब का बढ़ता महत्व
मौजूदा क्षेत्रीय तनाव में बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत भी बढ़ गई है। यह लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, यमन के पश्चिमी तट पर हूतियों की सैन्य बढ़त ने इस समुद्री क्षेत्र को लेकर सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ाया है। रॉयटर्स ने सितंबर में रिपोर्ट किया था कि मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों की स्थिति बाब अल-मंदब के आसपास मजबूत हुई।
इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। लाल सागर से गुजरने वाला समुद्री यातायात वैश्विक आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा व्यापार से जुड़ा है। इसलिए लंबे समय तक असुरक्षा रहने पर जहाजों के मार्ग, परिवहन लागत और ऊर्जा बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
जी7 की मांग दो स्तरों पर
जी7 के बयान में दो अलग लेकिन आपस में जुड़े संदेश दिखाई देते हैं।
पहला संदेश ईरान के लिए है। समूह चाहता है कि तेहरान हूतियों को हथियार और समर्थन देना बंद करे।
दूसरा संदेश हूतियों के लिए है। उनसे सैन्य अभियान, नागरिक जहाजों के खिलाफ हमले और धमकियां रोकने तथा राजनीतिक प्रक्रिया में लौटने को कहा गया है।
इससे जी7 ने क्षेत्रीय संघर्ष के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा को भी अपने बयान के केंद्र में रखा है।
यमन में संघर्ष का व्यापक संदर्भ
यमन में हूती आंदोलन और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से संघर्ष में अपेक्षाकृत शांति का दौर आया था, लेकिन हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रम ने तनाव फिर बढ़ाया है।
सितंबर 2026 में हूतियों की सैन्य गतिविधियों और यमन के पश्चिमी तट पर उनके विस्तार ने सऊदी अरब तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा की हैं। रॉयटर्स के अनुसार, इस घटनाक्रम ने व्यापक मध्य पूर्व संघर्ष में यमन को एक और सक्रिय मोर्चे के रूप में सामने ला दिया है।
महत्वपूर्ण तारीख और घटनाक्रम
21 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक हुई।
बैठक के बाद जारी बयान में हूतियों से सैन्य गतिविधियां और नागरिक जहाजों पर हमले रोकने की मांग की गई।
इसी बयान में ईरान से हूतियों को हथियार और समर्थन देना बंद करने को कहा गया।
जी7 ने सऊदी अरब के खिलाफ हूती हमलों की भी कड़ी निंदा की।
आगे क्या होगा
अब निगाह ईरान और हूती समूह की प्रतिक्रिया पर रहेगी। जी7 के बयान के बाद मुख्य सवाल यह है कि क्या हूती सैन्य गतिविधियों में कमी लाते हैं और क्या क्षेत्र में राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोई नई पहल होती है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा है। यदि हमले और धमकियां जारी रहती हैं, तो समुद्री यातायात और वैश्विक व्यापार पर इसका असर बना रह सकता है।
हालांकि मौजूदा बयान के आधार पर किसी भविष्य के सैन्य या कूटनीतिक कदम का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
निष्कर्ष
जी7 ने ईरान से हूती समूह को हथियार और समर्थन रोकने की मांग करते हुए यमन तथा सऊदी अरब के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव पर चिंता जताई है। समूह ने हूतियों से नागरिक जहाजों के खिलाफ हमले और धमकियां रोकने तथा राजनीतिक प्रक्रिया में लौटने की अपील की है।
बयान का महत्व केवल ईरान और हूतियों तक सीमित नहीं है। लाल सागर और बाब अल-मंदब से जुड़ी समुद्री सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक आपूर्ति शृंखला से सीधे जुड़ी हुई है।
मामले में आगे की दिशा ईरान और हूतियों की प्रतिक्रिया तथा लाल सागर में समुद्री सुरक्षा की स्थिति पर निर्भर करेगी।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।