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मोखा पोर्ट पर हूतियों का कब्जा, बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचा संकट

Harish Qureshi • 2026-09-11 15:57:52
मोखा पोर्ट पर हूतियों का कब्जा, बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचा संकट

यमन के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर हूतियों के कब्जे से लाल सागर और बाब अल-मंदेब में सुरक्षा संकट बढ़ गया है। सऊदी अरब ने मोखा एयरपोर्ट पर जवाबी हवाई कार्रवाई की है।


मोखा, यमन | 11 सितंबर 2026

By Mohd Haris


मोखा पोर्ट पर हूतियों का कब्जा


यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में पहले से जारी संघर्ष ने समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया हुआ है।


मोखा लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 80 किलोमीटर दूर है। इस जलडमरूमध्य से होकर एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में समुद्री व्यापार होता है।


बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचा हूती नियंत्रण


मोखा पर कब्जे का सबसे बड़ा रणनीतिक पहलू इसकी भौगोलिक स्थिति है। बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के रास्ते एशिया तथा यूरोप के बीच समुद्री आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है।


रिपोर्ट के अनुसार हूतियों की हालिया बढ़त उन्हें बाब अल-मंदेब के आसपास और मजबूत स्थिति दे सकती है। इससे जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।


सऊदी अरब ने की जवाबी कार्रवाई


मोखा पर कब्जे के अगले दिन सऊदी अरब ने मोखा एयरपोर्ट पर हवाई हमले किए। हूती मीडिया ने इन हमलों की जानकारी दी, जबकि तत्काल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी।


यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर है। मोखा लंबे समय से सरकार समर्थक बलों के नियंत्रण में था। हूतियों की अचानक बढ़त ने इस गठबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।


सऊदी अरब के लिए क्यों बड़ा झटका


सऊदी अरब दुनिया का प्रमुख तेल निर्यातक है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट के बीच रियाद ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब के रास्ते को अपने तेल निर्यात के लिए पहले से ज्यादा महत्व दिया है।


ऐसे में मोखा पर हूतियों का नियंत्रण सऊदी समुद्री रणनीति के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक हूती बढ़त से लाल सागर में सऊदी तेल निर्यात के रास्तों पर जोखिम बढ़ा है।


वैश्विक व्यापार पर क्या असर


बाब अल-मंदेब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां से होकर यूरोप और एशिया के बीच सामान तथा ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही होती है। रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 7 प्रतिशत तेल उत्पादन से जुड़ा परिवहन इस जलडमरूमध्य से गुजरता है।


रिपोर्ट के अनुसार मोखा बाब अल-मंदेब से करीब 80 किलोमीटर दूर है और इस समुद्री क्षेत्र से वैश्विक माल ढुलाई का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। अलग-अलग स्रोतों में व्यापार और ऊर्जा प्रवाह के आंकड़ों की गणना अलग तरीके से की गई है, इसलिए इन आंकड़ों को संदर्भ के साथ देखना जरूरी है।


जहाजों पर बढ़ सकता है दबाव


हूतियों ने पहले भी लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाया है। इन हमलों के बाद कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों को लाल सागर से हटाकर अफ्रीका के दक्षिणी सिरे के रास्ते भेजना शुरू किया था।


इससे यात्रा का समय और माल ढुलाई लागत बढ़ी थी। रिपोर्ट के मुताबिक बाब अल-मंदेब से गुजरने वाला समुद्री यातायात हूती हमलों के बाद काफी कम हुआ था।

मोखा पर नियंत्रण हूतियों को तटीय क्षेत्र में अतिरिक्त रणनीतिक लाभ देता है। हालांकि केवल मोखा पर कब्जे से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित नहीं होता। इसके लिए आसपास के अन्य रणनीतिक इलाकों पर भी नियंत्रण जरूरी होगा।


ईरान की भूमिका पर सवाल


रिपोर्ट ने यमनी, ईरानी और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि हूतियों की हालिया तटीय कार्रवाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की मदद और मार्गदर्शन की भूमिका रही हो सकती है। हालांकि ईरान हूतियों को सैन्य रूप से सीधे नियंत्रित करने से इनकार करता है।


इसलिए ईरान की भूमिका को लेकर उपलब्ध सूचनाओं में दावे और आधिकारिक इनकार दोनों मौजूद हैं। इसे स्थापित तथ्य के बजाय रिपोर्ट किए गए आकलन के रूप में देखना जरूरी है।


हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त


मोखा पर कब्जे से पहले हूतियों ने यमन के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने ताइज प्रांत में महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों पर भी बढ़त हासिल की।


एएफपी के अनुसार हूतियों ने दक्षिणी लाल सागर में जुकर द्वीप पर भी नियंत्रण हासिल करने का दावा किया है। इन गतिविधियों से संकेत मिलता है कि उनका अभियान केवल मोखा शहर तक सीमित नहीं है।


यमन फिर बड़े युद्ध की ओर?


यमन में 2022 में हुए संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर युद्ध में अपेक्षाकृत कमी आई थी। लेकिन हाल की सैन्य बढ़त ने उस नाजुक स्थिति को फिर खतरे में डाल दिया है।

संयुक्त राष्ट्र के यमन दूत हांस ग्रुंडबर्ग ने सुरक्षा परिषद में चेतावनी दी है कि देश एक अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर रहा है। मोखा पर कब्जे से हूतियों की बाब अल-मंदेब के करीब सीधी मौजूदगी बन गई है।


आम लोगों पर भी असर


सैन्य संघर्ष के साथ नागरिक आबादी पर दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक मोखा से कई लोग दक्षिण की ओर अदन जाने लगे हैं। शहर में बाजार बंद होने और हूती लड़ाकों की मौजूदगी की खबरें भी सामने आई हैं।


एएफपी के अनुसार हालिया लड़ाई में 20,000 के करीब लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। एजेंसी ने अलग-अलग स्रोतों के आधार पर 500 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की जानकारी भी दी है, जिनमें अधिकतर लड़ाके बताए गए हैं।


तेल की कीमतों पर असर


लाल सागर और बाब अल-मंदेब में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट के अनुसार मोखा पर कब्जे और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ती आशंका के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में 4 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई और यह 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई।


ऊर्जा बाजार पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि हूती गतिविधियां कितनी देर तक जारी रहती हैं और जहाजों की आवाजाही पर उनका कितना प्रभाव पड़ता है।


आगे क्या होगा


अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल बाब अल-मंदेब के आसपास हूतियों की अगली सैन्य कार्रवाई को लेकर है। यदि हूती बल इस इलाके में अपनी स्थिति और मजबूत करते हैं तो लाल सागर की समुद्री सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है।


दूसरी ओर सऊदी अरब और यमन सरकार समर्थक बलों की प्रतिक्रिया भी संकट की दिशा तय करेगी। मोखा एयरपोर्ट पर सऊदी हमले से संकेत मिलता है कि रियाद हूती बढ़त को बिना जवाब दिए छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।


भारत के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम


लाल सागर और बाब अल-मंदेब में अस्थिरता भारत के लिए भी अहम है। भारत और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी व्यापक समुद्री गलियारे से जुड़ा है।


यदि जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है तो माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और डिलीवरी समय बढ़ सकता है। ऊर्जा कीमतों में लगातार तेजी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आयात बिल पर भी पड़ सकता है।


निष्कर्ष


मोखा पर हूतियों का कब्जा यमन के गृहयुद्ध में एक महत्वपूर्ण सैन्य घटनाक्रम है। इससे हूतियों की लाल सागर तट पर स्थिति मजबूत हुई है और वे बाब अल-मंदेब के करीब पहुंच गए हैं।


सऊदी अरब के लिए यह इसलिए गंभीर चुनौती है क्योंकि होर्मुज में जारी संकट के बीच लाल सागर उसका महत्वपूर्ण वैकल्पिक समुद्री मार्ग बन गया है। अब मोखा के आसपास संघर्ष बढ़ता है या कूटनीतिक रास्ता खुलता है, इसका असर केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक शिपिंग, तेल कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसकी निगाह रहेगी।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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