यमन में हौथी विद्रोहियों के हमलों में कई सैनिक मारे गए और सऊदी में नागरिक घायल हुए। यह घटनाएं ईरान-सऊदी तनाव और व्यापक मिडिल ईस्ट संकट को और गहरा कर रही हैं।
यमन में हौथी विद्रोहियों ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 30 सैनिक मारे गए, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 50 से अधिक बताई जा रही है।
इसी के साथ सऊदी अरब के नजऱान क्षेत्र में भी हमले हुए, जहां कम से कम 11 नागरिक घायल हुए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है।
हौथी समूह ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया। हमले यमन के मारिब और हदरमौत प्रांतों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए।
सऊदी अधिकारियों का दावा है कि नागरिक इलाकों को जानबूझकर निशाना बनाया गया, जो इंटरनेशनल ह्यूमैनिटेरियन लॉ का उल्लंघन है।
यमन का सिविल वॉर 2014 में शुरू हुआ, जब हौथी विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 2015 में सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने हस्तक्षेप किया।
2022 में एक अस्थायी युद्धविराम के बाद हालात कुछ शांत हुए थे, लेकिन हालिया हमलों ने उस स्थिरता को तोड़ दिया है।
हालिया हमले अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में हुए।
सुबह के समय यमन में सैन्य ठिकानों पर हमले हुए। कुछ घंटों बाद सऊदी सीमा पर भी हमले की खबर आई।
दिन के अंत तक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया सामने आने लगी।
यह सिर्फ यमन का संघर्ष नहीं है। यह पूरे मिडिल ईस्ट की जियोपॉलिटिक्स को प्रभावित करता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी जैसे अहम समुद्री रास्ते इस तनाव से सीधे जुड़े हैं।
सऊदी अरब का कहना है कि यह हमले ईरान समर्थित नेटवर्क का हिस्सा हैं।
हौथी पक्ष इसे जवाबी कार्रवाई बताता है, जो कथित सैन्य दबाव के खिलाफ है।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि यह एक प्रॉक्सी वॉर का विस्तार है, जहां क्षेत्रीय ताकतें सीधे टकराव से बचते हुए अप्रत्यक्ष लड़ाई लड़ रही हैं।
सऊदी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ईरान इन हमलों के पीछे रणनीतिक सपोर्ट दे रहा है।
हालांकि, ईरान ने सीधे तौर पर इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन क्षेत्रीय बयानबाजी से तनाव बढ़ा है।
यमन में पहले से ही मानवीय संकट गहरा है।
इन हमलों से सैन्य नुकसान के साथ-साथ नागरिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
सऊदी सीमा क्षेत्रों में डर और अनिश्चितता का माहौल है।
यह घटनाक्रम सऊदी अरब पर सैन्य प्रतिक्रिया का दबाव बढ़ा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अब संभावित जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जिसमें समुद्री और जमीनी ऑपरेशन शामिल हो सकते हैं।
रेड सी और होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम हैं।
यदि संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
अमेरिका ने हौथी हमलों की निंदा की है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
ग्लोबल पावर इस संकट को कूटनीतिक तरीके से हल करने की अपील कर रही हैं।
आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
यदि जवाबी कार्रवाई होती है, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
हौथी हमले मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का संकेत हैं।
यह सिर्फ एक सैन्य टकराव नहीं, बल्कि जियोपॉलिटिक्स, इकोनॉमी और ग्लोबल सिक्योरिटी का जटिल संकट बन चुका है।
आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि क्षेत्रीय ताकतें टकराव बढ़ाती हैं या कूटनीति का रास्ता चुनती हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।