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ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने बंद की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन रियाद और मदीना क्षेत्र में हमलों के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई

Harish Qureshi • 2026-09-12 11:14:40
ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने बंद की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन रियाद और मदीना क्षेत्र में हमलों के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई

सऊदी अरब ने रियाद और मदीना क्षेत्रों में हुए कई ड्रोन हमलों के बाद ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को एहतियाती तौर पर बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन सऊदी तेल को लाल सागर के यनबू बंदरगाह तक पहुंचाने वाला अहम रास्ता है और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भरता घटाने में रणनीतिक भूमिका निभाती है।


रियाद | 12 सितंबर 2026

By Mohd Haris


सऊदी अरब ने अपनी रणनीतिक ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया है। यह फैसला रियाद और मदीना क्षेत्रों में पाइपलाइन से जुड़े ठिकानों पर हुए कई ड्रोन हमलों के बाद लिया गया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक पाइपलाइन को सुरक्षा के मद्देनज़र एहतियाती कदम के तौर पर बंद किया गया है।


इस घटनाक्रम ने पहले से तनावग्रस्त मध्य-पूर्वी ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के एक अहम वैकल्पिक तेल निर्यात मार्ग के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी।


पाइपलाइन पर कई ड्रोन हमले


सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, 10 सितंबर की सुबह रियाद और मदीना क्षेत्रों में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को कई हमलों का निशाना बनाया गया। इन हमलों में कुछ लोग घायल हुए और प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता दी गई।


हमलों के बाद आपातकालीन और तकनीकी विशेषज्ञ टीमों को सक्रिय किया गया। अधिकारियों ने पाइपलाइन की सुरक्षा की समीक्षा शुरू की और नुकसान का आकलन किया। सऊदी अधिकारियों ने कहा है कि आगे की जानकारी घटनाक्रम के मुताबिक जारी की जाएगी।


इराक से ड्रोन आने का सऊदी दावा


सऊदी अधिकारियों ने बाद में कहा कि हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन इराक से लॉन्च किए गए थे। रियाद ने हमलों की निंदा की है, लेकिन फिलहाल सैन्य जवाब नहीं देने का फैसला किया है।


सऊदी विदेश मंत्रालय के मुताबिक इराकी प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार को इराकी क्षेत्र से होने वाले हमलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का मौका देने की अपील की थी। सऊदी अरब ने फिलहाल इस कोशिश का समर्थन करने का फैसला किया है, जबकि अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार बरकरार रखा है।


इराक की भूमिका को लेकर स्वतंत्र स्तर पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए हमले के जिम्मेदार पक्ष के बारे में सऊदी दावे को आधिकारिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।


हॉर्मुज़ का विकल्प क्यों है यह पाइपलाइन


ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के तट पर स्थित यनबू बंदरगाह से जोड़ती है। इसकी रणनीतिक अहमियत इसलिए बढ़ गई है क्योंकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल परिवहन लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव के दबाव में है।


करीब 1,200 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल के एक हिस्से को हॉर्मुज़ से अलग रास्ते से लाल सागर तक पहुंचाता है। हाल के संघर्ष के दौरान इस वैकल्पिक मार्ग की भूमिका और बढ़ी है।


रिपोर्ट के मुताबिक पाइपलाइन से करीब 4 से 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल के परिवहन की क्षमता और इस्तेमाल जुड़ा रहा है। ऐसे में इसके संचालन में रुकावट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।


वैश्विक तेल बाजार पर असर


पाइपलाइन बंद होने की खबर ऐसे समय आई है जब मध्य-पूर्व में तेल आपूर्ति को लेकर पहले से गंभीर चिंता बनी हुई है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भी काफी कम हुई है और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।


ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत हालिया कारोबारी सत्रों में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा चुकी है। बाजार में आशंका है कि अगर ऊर्जा ढांचे और समुद्री परिवहन पर हमले जारी रहे तो आपूर्ति संबंधी जोखिम और बढ़ सकता है।


हालांकि पाइपलाइन बंद होने का मतलब तत्काल वैश्विक तेल आपूर्ति में उतनी ही मात्रा की कमी होना नहीं है। सऊदी अरब के पास भंडार, दूसरे निर्यात मार्ग और उत्पादन प्रबंधन जैसे विकल्प मौजूद हैं। असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि पाइपलाइन कितने समय तक बंद रहती है और क्षतिग्रस्त ढांचे को कितनी जल्दी सुरक्षित किया जाता है।


सऊदी तेल उत्पादन पहले से दबाव में


सऊदी अरब का तेल क्षेत्र पहले से क्षेत्रीय संघर्ष के असर का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में सऊदी कच्चे तेल की आपूर्ति घटकर करीब 6 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई थी, जो तीन दशक से ज्यादा समय में सबसे निचले स्तरों में शामिल है।


ऊर्जा ढांचे, समुद्री परिवहन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर लगातार दबाव के बीच पाइपलाइन का बंद होना सऊदी निर्यात व्यवस्था के लिए एक और चुनौती है।


लाल सागर का मोर्चा भी अहम


इसी दौरान यमन में हूती गतिविधियों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदब क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा की है। रणनीतिक द्वीप और तटीय इलाकों में हूती नियंत्रण बढ़ने की खबरों ने सऊदी तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।


इसका मतलब यह है कि सऊदी अरब के सामने एक साथ दो स्तरों पर जोखिम बढ़ रहे हैं। एक तरफ खाड़ी और हॉर्मुज़ से जुड़ी सुरक्षा चुनौती है, दूसरी तरफ लाल सागर और बाब-अल-मंदब के रास्ते पर बढ़ता दबाव।


आगे क्या होगा


फिलहाल सबसे अहम सवाल पाइपलाइन की बहाली को लेकर है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बंदी की अवधि को लेकर कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की है। तकनीकी टीमों की सुरक्षा जांच और नुकसान के आकलन के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।


अगर पाइपलाइन जल्द बहाल होती है तो वैश्विक बाजार पर इसका असर सीमित रह सकता है। लेकिन लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में सऊदी तेल निर्यात के वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ेगा और बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है।


निष्कर्ष


सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन का बंद होना केवल एक पाइपलाइन से जुड़ा तकनीकी घटनाक्रम नहीं है। यह मध्य-पूर्व में ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और भू-राजनीतिक तनाव के आपस में जुड़ते संकट को सामने लाता है।


रियाद ने फिलहाल सैन्य प्रतिक्रिया से परहेज करते हुए सुरक्षा और कूटनीतिक रास्ते पर जोर दिया है। आने वाले दिनों में पाइपलाइन की बहाली, हमले की जिम्मेदारी और लाल सागर में सुरक्षा स्थिति यह तय करेगी कि इस घटनाक्रम का तेल बाजार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर कितना गहरा होता है।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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