यमन में हूती और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष तेज हो गया है। सऊदी शहरों में हमले की चेतावनी के बीच Red Sea और बाब अल-मंदब की सुरक्षा को लेकर क्षेत्रीय चिंता बढ़ी है।
सना, यमन | 10 सितंबर 2026
By Mohd Haris
यमन में संघर्ष फिर गंभीर दौर में
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच लड़ाई ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। 10 सितंबर को कई इलाकों में संघर्ष जारी रहा और सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों में संभावित हमलों को लेकर सुरक्षा चेतावनियां जारी की गईं। Al Jazeera के मुताबिक यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती हमले में बच्चों की मौत का आरोप लगाया है, जबकि हूती पक्ष ने सऊदी हवाई हमलों का दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में नहीं हुई है।
सऊदी अरब में लगातार सुरक्षा अलर्ट
सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी खमीस मुशैत में 24 घंटे के भीतर चौथी बार आपात सुरक्षा चेतावनी जारी हुई। बाद में सऊदी नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी। Reuters के अनुसार सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि हालिया हूती हमलों में दक्षिणी सऊदी शहरों में कम से कम 73 लोग घायल हुए हैं।
खमीस मुशैत और आसपास का इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। हूती पक्ष ने यहां एक एयरबेस और आसपास के तेल ढांचे को निशाना बनाने का दावा किया है। सऊदी पक्ष ने अपने राष्ट्रीय ढांचे पर लगातार हमलों का आरोप लगाया है।
यमन में भीषण जवाबी कार्रवाई के दावे
हूती पक्ष ने आरोप लगाया है कि सऊदी बलों ने 12 घंटे के दौरान यमन के अलग-अलग हिस्सों में दर्जनों हवाई हमले किए। रिपोर्ट के अनुसार हूती पक्ष ने 54 हवाई हमलों का दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार हूती पक्ष ने इससे पहले 12 घंटे में जौफ, मारिब, होदेदा, ताइज़, बैदा और सादा प्रांतों में 48 हवाई हमलों की जानकारी दी थी। अलग-अलग समय और स्रोतों में हमलों की संख्या अलग बताई गई है, इसलिए इन आंकड़ों को हूती पक्ष के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बच्चों की मौत और मानवीय संकट
यमन की सरकारी समाचार एजेंसी ने मारिब में हूती गोलाबारी में कम से कम 3 बच्चों के मारे जाने और 6 अन्य लोगों के घायल होने का दावा किया है। Al Jazeera के अनुसार इससे पहले हुए एक हमले में 2 बच्चों की मौत और 15 लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई थी। इन घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इससे कुछ दिन पहले जौफ प्रांत के हज़्म में एक जेल पर हुए हवाई हमले में मौतों की संख्या 23 तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी। AP के अनुसार हूती अधिकारियों ने हमले के लिए सऊदी विमान को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन सऊदी सरकार ने तत्काल इस आरोप पर प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
संघर्ष का मानवीय असर तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया था कि 23 अगस्त से 5 सितंबर के बीच यमन में हिंसा से कम से कम 194 लोगों की मौत और 880 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना थी। इसी अवधि में 21,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।
2022 की शांति व्यवस्था पर बड़ा खतरा
यमन में व्यापक स्तर की लड़ाई 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाली एक संघर्षविराम व्यवस्था के बाद काफी हद तक थम गई थी। मौजूदा संघर्ष ने उस अपेक्षाकृत शांत स्थिति को गंभीर चुनौती दी है। Reuters ने भी मौजूदा घटनाक्रम को 2022 की व्यवस्था के बाद व्यापक संघर्ष की वापसी की आशंका से जोड़ा है।
यमन में संघर्ष की जड़ें 2014 तक जाती हैं, जब हूती आंदोलन ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। AP के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के अनुमान में युद्ध के दौरान कम से कम 150,000 लोगों की मौत हुई है।
बाब अल-मंदब क्यों बना अहम केंद्र
मौजूदा संघर्ष का एक महत्वपूर्ण पहलू बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य है। यह मार्ग Red Sea को Gulf of Aden से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम है।
रिपोर्ट के अनुसार हूती समूह ने जुलाई में सऊदी शिपिंग के खिलाफ नाकाबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद Red Sea में सऊदी से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आईं। इसी दौरान हूती बलों और सऊदी समर्थित सरकारी सैनिकों के बीच यमन के पश्चिमी हिस्सों में लड़ाई बढ़ी।
इस समुद्री मार्ग की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि क्षेत्र में Hormuz Strait से जुड़ा तनाव पहले से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और शिपिंग बाजार पर दबाव डाल रहा है। ऐसे में बाब अल-मंदब में अस्थिरता Red Sea के समुद्री यातायात के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा करती है। रिपोर्ट ने भी मौजूदा लड़ाई को वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए संभावित खतरे से जोड़ा है।
सऊदी तेल ढांचे पर हमलों से चिंता
8 सितंबर को हूती हमलों के बाद सऊदी अधिकारियों ने दक्षिणी क्षेत्रों में ऊर्जा ढांचे और अन्य आर्थिक प्रतिष्ठानों पर नुकसान की जानकारी दी थी। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने कुछ स्थानों पर आग लगने और कुछ संचालन अस्थायी रूप से रुकने की बात कही थी।
सऊदी गठबंधन के अनुसार हमलों में अब नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठान भी प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर हूती पक्ष का कहना है कि उसकी कार्रवाई सऊदी सैन्य अभियानों के जवाब में है। दोनों पक्ष अपने सैन्य कदमों को जवाबी कार्रवाई के रूप में पेश कर रहे हैं।
पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की नई सुरक्षा व्यवस्था
मौजूदा घटनाक्रम का एक और अहम पहलू पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हाल में हुआ मक्का संयुक्त रक्षा समझौता है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि सऊदी अरब पर हमला जारी रहता है या यमन का संघर्ष सऊदी क्षेत्र में फैलता है, तो समझौता सक्रिय हो सकता है। इस बयान से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण पर अतिरिक्त दबाव की आशंका बढ़ी है।
हालांकि समझौते की वास्तविक सैन्य सक्रियता और उसके व्यावहारिक प्रावधानों को लेकर कई विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए इसे तत्काल सैन्य हस्तक्षेप की पुष्टि के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
क्षेत्रीय तनाव का व्यापक संदर्भ
यमन का मौजूदा संघर्ष अलग-थलग घटना नहीं है। यह ऐसे समय में बढ़ा है जब मध्य पूर्व में पहले से कई मोर्चों पर सैन्य तनाव मौजूद है। रिपोर्ट ने मौजूदा घटनाक्रम को अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ युद्ध से पैदा हुए व्यापक क्षेत्रीय तनाव से जोड़ा है।
ईरान ने हूती गतिविधियों पर बाहरी नियंत्रण के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि हूती अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेते हैं। दूसरी ओर सऊदी और उसके सहयोगी हूती आंदोलन को ईरान समर्थित समूह मानते हैं। इस मतभेद ने यमन संघर्ष को व्यापक क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता से जोड़ दिया है।
अब सबसे बड़ी चिंता क्या है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा सैन्य टकराव सीमित रहेगा या फिर 2022 के बाद बनी अपेक्षाकृत शांत स्थिति पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
दूसरी चिंता Red Sea और बाब अल-मंदब में समुद्री सुरक्षा की है। अगर हमले और जवाबी कार्रवाई बढ़ती है, तो जहाजरानी कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। इसका
असर बीमा लागत, माल ढुलाई और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
तीसरी चिंता मानवीय मोर्चे की है। यमन पहले से लंबे संघर्ष, विस्थापन और कमजोर बुनियादी ढांचे से जूझ रहा है। नई सैन्य कार्रवाई नागरिक आबादी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
आगे की राह
फिलहाल जमीन पर सैन्य गतिविधियां तेज हैं और दोनों पक्ष अपनी कार्रवाई को जवाबी कदम के तौर पर पेश कर रहे हैं। सऊदी अरब ने अपने क्षेत्र और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का संकल्प दोहराया है, जबकि हूती पक्ष ने सऊदी सैन्य कार्रवाई के जवाब में हमले जारी रखने की बात कही है।
यमन में स्थायी स्थिरता के लिए केवल सैन्य दबाव पर्याप्त नहीं होगा। संघर्षविराम, राजनीतिक संवाद और समुद्री मार्गों की सुरक्षा एक साथ महत्वपूर्ण होंगे। मौजूदा स्थिति में सबसे अहम संकेत यह होगा कि क्या दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई की तीव्रता घटाने की दिशा में कोई कदम उठाते हैं।
निष्कर्ष
यमन में फिर बढ़ती लड़ाई ने 2022 के बाद बनी शांति व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है। सऊदी शहरों में सुरक्षा अलर्ट, ऊर्जा ढांचे पर हमलों के दावे और यमन में लगातार हवाई कार्रवाई इस संकट की गंभीरता दिखाते हैं।
इस संघर्ष का असर यमन और सऊदी अरब तक सीमित रहने की गारंटी नहीं है। बाब अल-मंदब और Red Sea की रणनीतिक अहमियत इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ती है। इसलिए आने वाले दिनों में सैन्य गतिविधियों के साथ कूटनीतिक पहल और नागरिक सुरक्षा की स्थिति पर भी करीबी नजर रखना जरूरी होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।