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यमन में जंग का महंगाई पर असर, ईंधन महंगा होते ही खाद्य और परिवहन लागत बढ़ी

Harish Qureshi 2026-09-18 15:10:35
यमन में जंग का महंगाई पर असर, ईंधन महंगा होते ही खाद्य और परिवहन लागत बढ़ी

यमन में घरेलू संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के बीच ईंधन की कीमत बढ़ी है। महंगे परिवहन और आपूर्ति बाधित होने से खाद्य वस्तुओं की लागत बढ़ रही है, जिससे परिवारों पर दबाव बढ़ा है।


सना, यमन | 18 सितंबर 2026

By Mohd Haris


यमन में महंगाई का नया दबाव


यमन में वर्षों से जारी घरेलू संघर्ष अब रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था पर और गहरा असर डाल रहा है। हाल के क्षेत्रीय तनाव और लड़ाई बढ़ने के बीच ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है, जिसके बाद खाद्य पदार्थों और परिवहन की लागत बढ़ने लगी है।


सना और हूती नियंत्रण वाले इलाकों में पेट्रोल की कीमत में करीब 10% वृद्धि दर्ज की गई। यमन पेट्रोलियम कंपनी ने इस बढ़ोतरी को वैश्विक ईंधन कीमतों में इजाफे से जोड़ा और इसे अस्थायी बताया है।


लेकिन स्थानीय अर्थव्यवस्था में इसका असर पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है। ईंधन महंगा होने के साथ माल ढुलाई, टैक्सी किराया, पानी और बिजली जैसी सेवाओं की लागत पर भी दबाव बढ़ रहा है।


पेट्रोल महंगा, परिवारों का बजट बिगड़ा


सना में टैक्सी चालक अहमद याह्या के मुताबिक पहले 10 लीटर पेट्रोल के लिए उन्हें 4,750 यमनी रियाल चुकाने पड़ते थे। हालिया वृद्धि के बाद यही मात्रा 5,250 रियाल हो गई।


उनका कहना है कि ईंधन की कीमत बढ़ने के बाद परिवार के भोजन का मासिक खर्च भी बढ़ रहा है।


यह स्थिति यमन के लाखों परिवारों के लिए गंभीर है। विश्व बैंक के अनुसार देश की करीब तीन-चौथाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहने का अनुमान है और बड़ी आबादी के पास पर्याप्त भोजन तक पहुंच नहीं है।


लड़ाई ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया


यमन में संघर्ष बढ़ने का एक सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ा है। कई ट्रक चालक अग्रिम मोर्चों के आसपास की सड़कों से बच रहे हैं। इससे सामान को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।


सना के एक दुकानदार के मुताबिक दक्षिण से उत्तर या उत्तर से दक्षिण जाने वाले ट्रकों को अब करीब एक सप्ताह तक लग सकता है, जबकि संघर्ष तेज होने से पहले यही यात्रा तीन दिन या उससे कम समय में पूरी हो जाती थी।


लंबी दूरी, ज्यादा ईंधन और बढ़े जोखिम का खर्च आखिरकार उपभोक्ता तक पहुंचता है।

इसका असर आटा, चावल, खाना पकाने के तेल, सब्जियों और बच्चों के दूध जैसे जरूरी सामान पर पड़ रहा है।


खाद्य कीमतों में पहले से बढ़ोतरी


यमन में महंगाई की समस्या नई नहीं है। युद्ध, मुद्रा संकट, कमजोर उत्पादन और आयात पर निर्भरता ने लंबे समय से घरेलू बाजार को दबाव में रखा है।


यमन रिव्यू के अनुसार हूती नियंत्रण वाले इलाकों में फरवरी से 2026 के मध्य तक सना में प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में करीब 13% वृद्धि दर्ज की गई। सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों में न्यूनतम खाद्य टोकरी की कीमत फरवरी से मई के बीच 3% बढ़ी।


सेव द चिल्ड्रन के 2026 के बाजार आकलन में भी जरूरी वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। अदन और लहज में प्याज की कीमत 65% और ताइज़ में चावल की कीमत 30% बढ़ी। ताइज़ में डीजल की कीमत में 56% वृद्धि दर्ज की गई।


क्षेत्रीय युद्ध का भी असर


यमन की अर्थव्यवस्था आयात पर काफी निर्भर है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन और खाद्य कीमतों में बदलाव का असर सीधे घरेलू बाजार तक पहुंचता है।


विश्व बैंक ने कहा है कि मध्य पूर्व के व्यापक संघर्ष ने यमन के लिए वैश्विक कीमतों, आपूर्ति बाधाओं और शिपिंग लागत के जोखिम को बढ़ाया है। इससे महंगाई बढ़ने और परिवारों की क्रय शक्ति कमजोर होने का खतरा है।


अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी यमन को तेल और खाद्य कीमतों के बाहरी झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील बताया है। संगठन के आकलन में 2026 के दौरान तेल कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि और खाद्य कीमतों पर भी अतिरिक्त दबाव का अनुमान लगाया गया था।


ईंधन का असर पूरे बाजार पर


ईंधन किसी भी अर्थव्यवस्था में परिवहन और उत्पादन की लागत का अहम हिस्सा होता है। यमन जैसे संघर्ष प्रभावित देश में इसका असर और व्यापक हो जाता है।


डीजल का इस्तेमाल कृषि सिंचाई, परिवहन और कई जगहों पर बिजली उत्पादन के लिए होता है। इसलिए ईंधन महंगा होने पर खाद्य उत्पादन, माल ढुलाई और जरूरी सेवाओं की लागत एक साथ बढ़ सकती है।


आर्थिक शोधकर्ताओं के अनुसार ईंधन कीमत में 10% वृद्धि का असर केवल ईंधन खरीदने वाले परिवारों तक सीमित नहीं रहता। इससे उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमत भी बढ़ती है, जिनके उत्पादन या परिवहन में पेट्रोलियम उत्पाद इस्तेमाल होते हैं।


भूख का संकट और गहरा होने का खतरा


यमन पहले से दुनिया के गंभीर खाद्य सुरक्षा संकटों में शामिल है।


एफएओ के अनुसार 2026 में सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों में लाखों लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने का अनुमान था। जून से सितंबर के बीच ऐसे लोगों की संख्या करीब 5.4 करोड़ नहीं, बल्कि 5.4 million यानी 54 लाख आंकी गई थी, जो विश्लेषित आबादी का करीब 51% हिस्सा है।


सेव द चिल्ड्रन ने भी 2026 के अपने बाजार आकलन में 1.7 करोड़ से ज्यादा लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित होने की जानकारी दी है। संगठन ने संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु संकट और मानवीय सहायता में कमी को प्रमुख कारणों में शामिल किया है।


ऐसे माहौल में ईंधन और खाद्य कीमतों में वृद्धि गरीब परिवारों के लिए भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकती है।


यमन की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर


यमन का आर्थिक संकट वर्षों की लड़ाई से जुड़ा हुआ है। विश्व बैंक के अनुसार देश की वास्तविक प्रति व्यक्ति जीडीपी में 2015 से करीब 60% की गिरावट आई है। 2025 में अर्थव्यवस्था के 1.5% सिकुड़ने का अनुमान था और 2026 के लिए भी 0.5% संकुचन का अनुमान लगाया गया था।


इसका मतलब है कि कीमतें बढ़ने के साथ लोगों की आमदनी और क्रय शक्ति पर भी दबाव है।

यही वजह है कि छोटी कीमत वृद्धि भी गरीब परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक समस्या बन जाती है।


अदन और दूसरे इलाकों में भी दबाव


संकट केवल सना तक सीमित नहीं है। यमन के अलग-अलग हिस्सों में बाजार की स्थिति अलग है और मुद्रा, प्रशासनिक नियंत्रण, परिवहन तथा सुरक्षा की परिस्थितियां कीमतों को प्रभावित करती हैं।


सेव द चिल्ड्रन के आकलन में अदन, लहज और ताइज़ जैसे इलाकों में खाद्य तथा ईंधन कीमतों में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए गए हैं।


इससे पता चलता है कि यमन में महंगाई का असर एक समान नहीं है। अलग-अलग इलाकों में संघर्ष और बाजार की स्थिति के आधार पर परिवारों पर दबाव अलग स्तर का है।


क्षेत्रीय तनाव ने जोखिम बढ़ाया


यमन में हूती आंदोलन और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ता तनाव भी आर्थिक जोखिम बढ़ा रहा है। लाल सागर और बाब अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के आसपास सैन्य तनाव का असर जहाजरानी और बीमा लागत पर पड़ता है।


यमन के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि देश आवश्यक वस्तुओं के लिए बाहरी आपूर्ति पर निर्भर है।

अगर समुद्री परिवहन महंगा या असुरक्षित होता है, तो आयातित खाद्य और ईंधन की लागत बढ़ सकती है।


आम परिवारों के सामने कठिन फैसला


सना में परिवारों के सामने अब रोजमर्रा के खर्चों को प्राथमिकता देने की चुनौती बढ़ रही है।


खाद्य सामग्री महंगी होने पर परिवारों को भोजन, किराया, परिवहन और स्वास्थ्य खर्च के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। टैक्सी चालक अहमद याह्या ने इसी दबाव को लेकर सवाल उठाया कि बढ़ते भोजन खर्च के बीच परिवार किराया कैसे बचाए।


युद्ध की आर्थिक कीमत इसी स्तर पर सबसे साफ दिखाई देती है। लड़ाई का असर केवल मोर्चे पर नहीं होता। यह बाजार, रोजी-रोटी और घरेलू बजट तक पहुंचता है।


आगे की तस्वीर


यमन में कीमतों का दबाव कम करने के लिए केवल ईंधन की कीमत स्थिर करना पर्याप्त नहीं होगा। सुरक्षित परिवहन मार्ग, नियमित आयात, स्थिर मुद्रा, मानवीय सहायता और राजनीतिक स्थिरता भी जरूरी हैं।


विश्व बैंक के मुताबिक आर्थिक स्थिरता के लिए बुनियादी सेवाओं की सुरक्षा, रोजगार और आजीविका को समर्थन तथा शांति और संस्थागत स्थिरता की दिशा में प्रगति जरूरी है।


फिलहाल यमन में घरेलू संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव एक-दूसरे से जुड़कर आर्थिक दबाव बढ़ा रहे हैं। ईंधन की कीमत में वृद्धि इसका सबसे दिखाई देने वाला असर है, लेकिन इसके पीछे परिवहन, आयात, खाद्य सुरक्षा और कमजोर क्रय शक्ति की पूरी श्रृंखला काम कर रही है।


यमन में बढ़ती कीमतें इसलिए केवल महंगाई की खबर नहीं हैं। यह उस मानवीय संकट का आर्थिक चेहरा है, जिसमें युद्ध की कीमत सबसे ज्यादा आम परिवार चुका रहे हैं।


वीडियो देखें

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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