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यमन में हिंसा से 125000 से ज्यादा लोग विस्थापित, संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय संकट पर जताई चिंता

Harish Qureshi • 2026-09-16 12:28:48
यमन में हिंसा से 125000 से ज्यादा लोग विस्थापित, संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय संकट पर जताई चिंता

यमन में सितंबर की शुरुआत से तेज हुई लड़ाई के कारण 125000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने नागरिकों की सुरक्षा और राहत पहुंच पर चिंता जताई है।


यमन | 16 सितंबर 2026

By Mohd Haris


यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष ने सितंबर 2026 में फिर गंभीर मानवीय संकट का रूप ले लिया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक महीने की शुरुआत से अब तक कम से कम 125000 लोग हिंसा के कारण अपने घर छोड़ चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार देश के भीतर सुरक्षित इलाकों की तरफ जा रहे हैं, जबकि 2300 के करीब लोग समुद्र पार कर जिबूती भी पहुंचे हैं।


संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि पश्चिमी तट पर लड़ाई तेज होने के साथ नागरिक आबादी पर दबाव बढ़ रहा है। राहत अभियानों के सामने सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और आवाजाही से जुड़ी कई पाबंदियां चुनौती बनी हुई हैं।


सितंबर में तेज हुआ विस्थापन


अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के शुरुआती आकलन में 13 सितंबर तक यमन के भीतर 85818 लोगों के विस्थापित होने की जानकारी दी गई थी। इनमें 82164 लोग अकेले सितंबर की शुरुआत से विस्थापित हुए थे। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के 15 सितंबर के आकलन में यह संख्या बढ़कर कम से कम 125000 बताई गई।


आंकड़ों में तेजी से बदलाव इस बात को दर्शाता है कि लड़ाई के नए दौर में बड़ी संख्या में परिवार लगातार अपना घर छोड़ रहे हैं। कई परिवार सीमित सामान के साथ अस्थायी ठिकानों की ओर जा रहे हैं।


पश्चिमी तट पर बढ़ी लड़ाई


संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक हूती बलों ने यमन के पश्चिमी तट पर अपनी सैन्य बढ़त जारी रखी है और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य की दिशा में आगे बढ़े हैं। इसके जवाब में यमनी सरकार से जुड़े बलों ने जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू की है। विभिन्न मोर्चों पर स्थानीय स्तर पर संघर्ष और हवाई हमलों की रिपोर्ट सामने आई है।


मारिब, लहज, अल-जौफ, हज्जा, अल-बायदा, सादा और ताइज़ सहित कई इलाकों में संघर्ष की सूचना मिली है। संयुक्त राष्ट्र ने इन घटनाओं के बीच नागरिक आबादी पर पड़ रहे असर को लेकर गंभीर चिंता जताई है।


नागरिक भी बने संघर्ष के शिकार


संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार हालिया हिंसा में कम से कम 40 नागरिक हताहत हुए हैं। इनमें 8 लोगों की मौत हुई और 32 लोग घायल हुए। मारे गए लोगों में महिलाओं और बच्चों की भी संख्या शामिल है।


संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि लड़ाई के कारण नागरिकों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। विस्थापन के साथ भोजन, पानी, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत भी बढ़ रही है।


जिबूती पहुंचे यमन से भागे लोग


यमन के बाहर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में लोग अदन की खाड़ी पार करके जिबूती भी पहुंच रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 14 सितंबर तक करीब 2300 लोग उत्तरी जिबूती के ओबॉक क्षेत्र में पहुंचे थे।


इससे पहले अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने बताया था कि 2000 से अधिक लोग जिबूती के उत्तरी तट तक पहुंच चुके हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां उन्हें पानी, भोजन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करा रही हैं।


अदन और दूसरे इलाकों की ओर पलायन


संघर्ष से प्रभावित परिवार यमन के अपेक्षाकृत सुरक्षित दक्षिणी इलाकों की तरफ भी जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लोगों की आवाजाही ताइज़, अदन, लहज और अबयान जैसे इलाकों की ओर हुई है।


रिपोर्ट के अनुसार हजारों नागरिक दक्षिणी शहर अदन की ओर पहुंच रहे हैं। कई विस्थापित परिवारों के पास पर्याप्त भोजन, पानी या रहने की व्यवस्था नहीं है।


यमन पहले से गंभीर मानवीय संकट में


नया विस्थापन ऐसे समय बढ़ा है जब यमन पहले से दुनिया के गंभीर मानवीय संकटों में शामिल है। संयुक्त राष्ट्र के 2026 के आकलन के अनुसार 21 मिलियन से अधिक लोगों को इस वर्ष मानवीय सहायता की जरूरत पड़ने का अनुमान है।


यमन में वर्षों से जारी संघर्ष ने अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं को गहरा नुकसान पहुंचाया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार देश की स्वास्थ्य सुविधाओं का केवल करीब 59 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह काम कर रहा है।


इस पृष्ठभूमि में नए विस्थापन का अर्थ केवल लोगों का स्थान बदलना नहीं है। इससे पहले से दबाव में चल रही राहत व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।


2022 के युद्धविराम के बाद फिर तनाव


यमन में संघर्ष की तीव्रता 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले युद्धविराम के बाद कुछ समय कम हुई थी। हालांकि व्यापक राजनीतिक समाधान नहीं निकल सका और देश में अलग-अलग पक्षों के बीच तनाव बना रहा।


हालिया घटनाक्रम में पश्चिमी तट पर हूती बढ़त और सरकार समर्थित बलों की जवाबी कार्रवाई ने सैन्य तनाव को फिर बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच नागरिकों और मानवीय कर्मियों की सुरक्षा पर जोर दिया है।


बाब अल-मंदब पर भी बढ़ी चिंता


यमन में संघर्ष का असर देश की सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है। पश्चिमी तट से आगे बढ़ती सैन्य गतिविधियां बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा को प्रभावित करने की आशंका बढ़ाती हैं।


यह समुद्री मार्ग लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि फिलहाल वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर व्यापक असर नहीं दिखा है, लेकिन क्षेत्र की स्थिति तेजी से अस्थिर हुई है।


मानवीय सहायता पहुंचाना बनी बड़ी चुनौती


संयुक्त राष्ट्र और राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल विस्थापित परिवारों तक सुरक्षित और निर्बाध सहायता पहुंचाने का है। संघर्ष वाले इलाकों में सुरक्षा जोखिम, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा और आवाजाही पर पाबंदियां राहत कार्यों को मुश्किल बना रही हैं।


यमन में पहले से मौजूद गरीबी और खाद्य असुरक्षा के बीच नए विस्थापन से स्थानीय समुदायों पर भी दबाव बढ़ रहा है। विस्थापित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की तत्काल जरूरत है।


आगे क्या


आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहेगा कि पश्चिमी तट पर सैन्य गतिविधियां किस दिशा में जाती हैं और क्या संघर्ष और इलाकों तक फैलता है। अगर हिंसा जारी रहती है, तो विस्थापन की संख्या और बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।


संयुक्त राष्ट्र ने नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सम्मान पर जोर दिया है। फिलहाल 125000 से अधिक लोगों का विस्थापन यमन में संघर्ष के मानवीय असर की गंभीर तस्वीर पेश करता है।


यमन में मौजूदा संकट केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। हर नए संघर्ष के साथ हजारों परिवारों के लिए घर, रोज़गार, भोजन और सुरक्षित जीवन का सवाल और कठिन होता जा रहा है।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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