यमन के मारिब में मिला मिसाइल मलबा चीनी DF-15A से जोड़ा जा रहा है। दावा है कि मिसाइल सऊदी ने हूतियों पर दागी थी, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई।
मारिब, यमन | 15 सितंबर 2026
By Mohd Haris
यमन में मिला मिसाइल का मलबा
यमन के मारिब प्रांत में मिले एक बड़े मिसाइल मलबे ने सऊदी अरब के गुप्त बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उपलब्ध तस्वीरों और ओपन-सोर्स विश्लेषण के आधार पर मलबे को चीन निर्मित DF-15A शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल से जोड़ा जा रहा है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मिसाइल सऊदी अरब की ओर से हूती ठिकानों को निशाना बनाने के लिए दागी गई थी, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम तथ्य यह है कि मिसाइल की पहचान और उसके इस्तेमाल की जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
DF-15A की पहचान कैसे हुई
मलबे की तस्वीरों में दिखाई देने वाले ढांचे, आकार और बूस्टर से जुड़े हिस्सों की तुलना के आधार पर रक्षा विश्लेषकों ने इसे DF-15 परिवार की मिसाइल बताया है। कुछ ओपन-सोर्स विश्लेषणों ने इसे विशेष रूप से DF-15A मॉडल बताया है।
डिफेंस सिक्योरिटी एशिया ने भी इसे DF-15A बूस्टर से जोड़ते हुए रिपोर्ट किया है, लेकिन उसने स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब, चीन या यमन की ओर से मिसाइल की पहचान, लॉन्च स्थल और लक्ष्य की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मिसाइल लक्ष्य तक क्यों नहीं पहुंची
मिसाइल के लक्ष्य से चूकने की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध मलबे से इतना संकेत मिलता है कि मिसाइल का कोई चरण उड़ान के दौरान अलग हुआ होगा या सिस्टम में खराबी के बाद वह नीचे गिर गई होगी।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि मिसाइल को किसी एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट किया या वह तकनीकी कारण से विफल हुई। उपलब्ध तस्वीरों से केवल मलबे की मौजूदगी स्थापित होती है, मिसाइल की विफलता का सटीक कारण नहीं।
सऊदी अरब से जुड़ा सबसे अहम सवाल
अगर DF-15A की पहचान और सऊदी इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह रियाद की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी होगी।
सऊदी अरब लंबे समय से चीन से बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियां हासिल करने के लिए जाना जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक रियाद ने पहले DF-3A जैसी चीनी मिसाइलें हासिल की थीं और बाद में उसके मिसाइल कार्यक्रम को DF-21 परिवार से भी जोड़ा गया। लेकिन DF-15A के परिचालन इस्तेमाल की सार्वजनिक पुष्टि अब तक नहीं हुई थी।
यमन में क्यों बढ़ रहा है सैन्य तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच सैन्य तनाव फिर तेज हुआ है। हाल के दिनों में हूतियों ने सऊदी ठिकानों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 15 सितंबर को हूतियों ने सऊदी अरब के खमीस मुशैत सैन्य एयरबेस को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। इस हमले में 13 नागरिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
2022 के बाद फिर बढ़ा संघर्ष
यमन संघर्ष में 2022 के बाद अपेक्षाकृत शांति की स्थिति बनी थी, लेकिन 2026 में हालात फिर बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। हूती बलों ने यमन में सऊदी समर्थित सरकारी बलों के खिलाफ अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं।
सऊदी अरब ने भी जवाबी सैन्य कार्रवाई तेज की है। इससे संघर्ष दोबारा व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा संकट का रूप ले सकता है।
चीन की मिसाइल से जुड़ा सवाल
DF-15A की पहचान सही साबित होती है तो इस घटनाक्रम का एक अहम पहलू चीन से जुड़ता है। चीन ने DF-15 परिवार की शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित की हैं।
सऊदी अरब और चीन के बीच रक्षा सहयोग पुराना है। इसलिए यमन में संभावित DF-15A इस्तेमाल से रियाद की मिसाइल क्षमता और उसके चीनी रक्षा संबंधों पर नई निगाह पड़ सकती है।
लेकिन केवल मलबे की तस्वीरों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि चीन ने हाल में सऊदी अरब को इस प्रणाली की आपूर्ति की या किसी नई सैन्य डील के तहत इसका इस्तेमाल हुआ।
हूतियों के पास ऐसी मिसाइल होने का सवाल
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हूतियों के पास DF-15A जैसी चीनी मिसाइल होने के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं। इसी वजह से मलबे की मौजूदगी को सऊदी लॉन्च से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिर भी यह एक विश्लेषणात्मक संभावना है, स्थापित तथ्य नहीं। मलबे की फॉरेंसिक जांच, सीरियल नंबर, लॉन्च दिशा और स्वतंत्र खुफिया प्रमाण ही इस सवाल का ज्यादा भरोसेमंद जवाब दे सकते हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
अगर सऊदी अरब द्वारा DF-15A के युद्ध इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह यमन संघर्ष में रियाद की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता के इस्तेमाल का संकेत होगा।
इसका असर केवल सऊदी-हूती संघर्ष तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान, अमेरिका, चीन और खाड़ी देशों की सुरक्षा रणनीति में बैलिस्टिक मिसाइलों की भूमिका पहले से अहम है। ऐसे में नई मिसाइल क्षमता का सार्वजनिक रूप से सामने आना क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर चर्चा को प्रभावित कर सकता है।
तेल और समुद्री सुरक्षा भी दांव पर
यमन में बढ़ते सैन्य तनाव का असर ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से जुड़े व्यवधान और क्षेत्रीय सैन्य तनाव ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है।
लाल सागर और बाब अल-मंदब के आसपास बढ़ती अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसलिए यमन में किसी भी बड़े सैन्य विस्तार का असर क्षेत्रीय सीमा से बाहर जा सकता है।
अब सबसे अहम सवाल
इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम मलबे की स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच होगी। अगर मलबे पर पहचान संबंधी प्रमाण, सीरियल नंबर या अन्य तकनीकी निशान मिलते हैं, तो DF-15A की पहचान ज्यादा मजबूत हो सकती है।
इसके बाद लॉन्च स्थल, मिसाइल की दिशा और लक्ष्य की स्वतंत्र पुष्टि यह स्पष्ट करने में मदद करेगी कि मिसाइल किसने दागी और वह लक्ष्य तक क्यों नहीं पहुंची।
निष्कर्ष
यमन के मारिब में मिला मिसाइल मलबा सऊदी अरब की संभावित DF-15A क्षमता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर इसे चीन निर्मित DF-15A से जोड़ा जा रहा है और रिपोर्टों में इसे हूती ठिकानों के खिलाफ सऊदी कार्रवाई से संबंधित बताया गया है।
लेकिन अभी इसे स्थापित तथ्य मानना जल्दबाजी होगी। मिसाइल की पहचान, स्वामित्व और लॉन्च की जिम्मेदारी पर सऊदी अरब, चीन या यमनी पक्ष की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस घटनाक्रम की सबसे सटीक तस्वीर फिलहाल यही है कि यमन में एक संदिग्ध चीनी निर्मित बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा मिला है, जिसने सऊदी अरब की मिसाइल क्षमता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।