3 नवंबर 2026 को जॉर्डन की संसद में सांसदों ने ज़ुहर की नमाज़ अदा की। अहमद अल-रक़ब ने इमामत की। इज़राइली संसद से जुड़े वायरल दावे का मूल वीडियो से अंतिम मिलान अभी बाक़ी है।
अम्मान | 5 नवंबर 2026
By Mohd Haris
इज़राइली संसद में मुस्लिम सांसदों के नमाज़ पढ़ने के दावे के बीच जॉर्डन की संसद से जुड़ी एक वास्तविक घटना की पुष्टि हुई है। 3 नवंबर 2026 को जॉर्डन की राजधानी अम्मान स्थित संसद के मुख्य सदन में कई सांसदों ने सामूहिक रूप से ज़ुहर की नमाज़ अदा की थी। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आई थीं। नमाज़ की इमामत सांसद डॉ. अहमद अल-रक़ब ने की थी। स्थानीय रिपोर्टों में घटना की तारीख़, स्थान और संबंधित सांसद का नाम दर्ज है।
इस बीच इज़राइली संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, के भीतर मुस्लिम सांसदों के नमाज़ पढ़ने का दावा भी प्रसारित हुआ है। हालांकि, जॉर्डन की प्रमाणित घटना और इज़राइल के नाम से साझा किए गए वीडियो का सीधा तकनीकी मिलान अभी पूरा नहीं हुआ है। इसलिए उपलब्ध तथ्यों से जॉर्डन की घटना की पुष्टि होती है, लेकिन यह निष्कर्ष निकालने के लिए कि दोनों जगहों के नाम से साझा किया गया वीडियो बिल्कुल एक ही रिकॉर्डिंग है, मूल फ़ुटेज की तुलना आवश्यक है।
जॉर्डन की संसद में कब और कैसे हुई नमाज़?
3 नवंबर को जॉर्डन की प्रतिनिधि सभा में स्थायी संसदीय कार्यालय के पदाधिकारियों के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी।
संसदीय कार्यवाही शुरू होने से पहले ज़ुहर की नमाज़ का वक़्त हुआ। इसी दौरान कई सांसदों ने सदन के भीतर सामूहिक नमाज़ अदा की।
सांसद अहमद अल-रक़ब ने नमाज़ की इमामत की, जबकि दूसरे सांसद उनके पीछे सफ़ बनाकर खड़े हुए।
घटना की तस्वीरें और वीडियो उसी दिन प्रकाशित हुए। इनमें सांसदों को संसद के मुख्य कक्ष में नमाज़ अदा करते हुए दिखाया गया।
यह घटना किसी नई सरकार के सत्ता संभालने का समारोह नहीं थी। इसका संबंध संसद की निर्धारित कार्यवाही से पहले हुई धार्मिक गतिविधि से था।
सांसद दीमा तहबूब ने बताई सदन में नमाज़ पढ़ने की वजह
जॉर्डन की सांसद दीमा तहबूब ने 3 नवंबर को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर इस घटना का संदर्भ स्पष्ट किया।
उनके मुताबिक़, नमाज़ औपचारिक संसदीय बैठक शुरू होने से पहले अदा की गई थी। उन्होंने बताया कि संसद के उद्घाटन से संबंधित प्रक्रियाओं के दौरान कुछ समय के लिए सदन के दरवाज़े बंद रखे जाते हैं। उनके बयान के अनुसार, शाही काफ़िले के प्रस्थान तक दरवाज़े बंद रहने की व्यवस्था के कारण नमाज़ का वक़्त निकलने की आशंका थी। इसी वजह से संबंधित सांसदों ने मुख्य कक्ष में नमाज़ अदा की। तहबूब ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक शुरू न होने या कार्यवाही के बीच विराम के दौरान नमाज़ अदा करने की स्थिति पहले भी बनती रही है। इस स्पष्टीकरण से यह जानकारी मिलती है कि सांसदों ने सदन के भीतर नमाज़ क्यों पढ़ी।
इज़राइली संसद के नाम से दावा कैसे सामने आया?
जॉर्डन की संसद में नमाज़ की घटना के आसपास इज़राइली संसद के भीतर मुस्लिम सांसदों के नमाज़ पढ़ने का दावा भी सामने आया।
4 नवंबर को एक तुर्की वेबसाइट ने इज़राइली संसद में नमाज़ से संबंधित रिपोर्ट और वीडियो प्रकाशित किया था।
लेकिन उस रिपोर्ट में वीडियो की मूल रिकॉर्डिंग की तारीख़, स्थान और दिखाई देने वाले लोगों की स्वतंत्र रूप से प्रमाणित पहचान स्पष्ट नहीं थी।
अब जॉर्डन की संसद में उसी अवधि के दौरान हुई नमाज़ की घटना का दस्तावेज़ी विवरण उपलब्ध है।
जॉर्डन में वीडियो को लेकर क्या प्रतिक्रिया हुई?
जॉर्डन की संसद में नमाज़ अदा करने का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कुछ लोगों ने सांसदों के धार्मिक अधिकारों का समर्थन किया, जबकि अन्य ने सवाल उठाया कि विधायी कार्यवाही के लिए निर्धारित मुख्य कक्ष में सामूहिक नमाज़ पढ़ना कितना उचित है। 4 नवंबर को जॉर्डन के मीडिया विश्वसनीयता निगरानी संगठन अकीद ने इस घटना की समाचार कवरेज की समीक्षा प्रकाशित की।
संगठन ने माना कि संसद के मुख्य कक्ष में नमाज़ पढ़े जाने की घटना अपने असामान्य स्थान के कारण समाचार का विषय बन सकती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।