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India-UK FTA: रोल्स-रॉयस और लैंड रोवर होंगी सस्ती, करोड़ों का फायदा

Shahana • 2026-07-12 06:25:23
India-UK FTA: रोल्स-रॉयस और लैंड रोवर होंगी सस्ती, करोड़ों का फायदा

India-UK FTA से रोल्स-रॉयस और लैंड रोवर होंगी सस्ती

110% से 30% ड्यूटी, भारत में बदल सकती है लग्जरी कारों की कीमत


Location:- New Delhi, India

Date:- 12 July 2026

Byline:- Shahana


India-UK FTA
लागू, लग्जरी कार खरीदारों को बड़ी राहत
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच Free Trade Agreement लागू होने के बाद यूके से पूरी तरह आयात होने वाली कई लग्जरी कारों पर कस्टम ड्यूटी कम होने की उम्मीद है। इससे कुछ मॉडलों की कीमत घट सकती है। हालांकि यह राहत केवल निर्धारित शर्तों के तहत आने वाले CBU वाहनों तक सीमित रहेगी।

India-UK FTA: रोल्स-रॉयस और लैंड रोवर होंगी सस्ती, क्या बदलेगा भारत का लग्जरी कार बाजार?

भारत-यूके व्यापार समझौते का बड़ा असर

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच वर्षों की बातचीत के बाद Free Trade Agreement लागू होने जा रहा है। इस समझौते का सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला पहलू ऑटोमोबाइल सेक्टर है, क्योंकि यूके में निर्मित कुछ लग्जरी कारों पर लगने वाली ऊंची कस्टम ड्यूटी में कमी का रास्ता खुल गया है। यदि समझौते की तय शर्तें लागू होती हैं तो भारत में आयात होने वाली कुछ प्रीमियम CBU कारें पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकती हैं। इससे हाई-एंड ऑटोमोबाइल मार्केट में नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।

India-UK FTA क्या बदल रहा है?

भारत लंबे समय से आयातित लग्जरी कारों पर ऊंची कस्टम ड्यूटी लगाता रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और विदेशी आयात को संतुलित रखना रहा है। FTA के तहत दोनों देशों ने कई सेक्टरों में टैरिफ कम करने पर सहमति बनाई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में यूके से आने वाले कुछ निर्धारित CBU वाहनों पर शुल्क में उल्लेखनीय कमी का प्रावधान किया गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर सीधे अंतिम कीमत पर दिखाई देगा।

किन कारों पर मिलेगा फायदा?

इस समझौते का लाभ हर लग्जरी कार को नहीं मिलेगा। राहत केवल उन मॉडलों को मिलेगी जो पूरी तरह यूनाइटेड किंगडम में निर्मित होकर भारत आयात किए जाते हैं और FTA के Rules of Origin सहित अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।

संभावित रूप से लाभ पाने वाले प्रमुख ब्रांडों में रोल्स-रॉयस, लैंड रोवर, एस्टन मार्टिन और मैकलारेन शामिल हैं। अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के अनुसार कीमतों में कमी का स्तर अलग हो सकता है।

करोड़ों रुपये तक की राहत कैसे?

भारत में किसी आयातित लग्जरी कार की अंतिम कीमत केवल फैक्ट्री कीमत से तय नहीं होती। इसमें कस्टम ड्यूटी, सेस, GST, लॉजिस्टिक्स, डीलर मार्जिन और अन्य टैक्स भी शामिल होते हैं। जब मूल आयात शुल्क घटता है तो कुल ऑन-रोड कीमत पर भी उसका प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से कुछ अल्ट्रा-लग्जरी मॉडलों में कीमतों में लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का अंतर दिखाई दे सकता है। हालांकि अंतिम कीमत प्रत्येक मॉडल, इंजन स्पेसिफिकेशन और टैक्स स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगी।

Jaguar Land Rover ने क्यों घटाईं कीमतें?

Jaguar Land Rover ने पहले ही अपने कुछ प्रीमियम मॉडलों की कीमतों में कटौती की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार यूके से आयात होने वाले कुछ Range Rover मॉडल और Range Rover Sport SV की कीमतों में उल्लेखनीय कमी की गई है। इसे बाजार में FTA के संभावित लाभ का शुरुआती संकेत माना जा रहा है। ऑटो इंडस्ट्री विश्लेषकों का कहना है कि यदि अन्य कंपनियां भी इसी रणनीति को अपनाती हैं तो लग्जरी SUV सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।

क्या सभी विदेशी कारें सस्ती हो जाएंगी? इस सवाल का जवाब नहीं है।

कई उपभोक्ताओं के बीच यह धारणा बन रही है कि सभी आयातित लग्जरी कारें सस्ती हो जाएंगी, जबकि वास्तविक स्थिति अलग है। जो वाहन किसी अन्य देश में बनते हैं या भारत में CKD अथवा स्थानीय असेंबली के जरिए तैयार होते हैं, उन पर यह लाभ स्वतः लागू नहीं होगा। प्रत्येक मॉडल की पात्रता अलग-अलग नियमों से तय होगी।

भारतीय ऑटो उद्योग पर क्या असर होगा?

एक पक्ष मानता है कि सस्ती आयातित लग्जरी कारों से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। दूसरा पक्ष यह तर्क देता है कि यदि आयात लगातार बढ़ता है तो स्थानीय प्रीमियम मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव बन सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का लग्जरी कार बाजार कुल यात्री वाहन बाजार का बेहद छोटा हिस्सा है, इसलिए व्यापक घरेलू उद्योग पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।

व्यापारिक रिश्तों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?

इस समझौते में वस्त्र, खाद्य उत्पाद, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, सेवाएं और निवेश जैसे कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। दोनों सरकारों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को अगले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय स्तर तक बढ़ाना है। ऑटोमोबाइल सेक्टर इस समझौते का सबसे अधिक दिखाई देने वाला हिस्सा बन गया है क्योंकि इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

आगे क्या देखना होगा?

FTA लागू होने के बाद वास्तविक प्रभाव अगले कुछ महीनों में सामने आएगा। कंपनियां अपनी नई मूल्य सूची जारी करेंगी, डीलर स्टॉक अपडेट करेंगे और ग्राहक प्रतिक्रिया भी स्पष्ट होगी। विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि कितने मॉडल वास्तव में शुल्क छूट के दायरे में आते हैं और कंपनियां इस राहत का कितना हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं।

India-UK FTA केवल ऑटोमोबाइल तक सीमित नहीं है। India-UK FTA भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। लग्जरी कार बाजार के लिए यह समझौता नई संभावनाएं लेकर आया है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कीमतों में कितनी पारदर्शिता रखती हैं और समझौते की शर्तों का व्यावहारिक असर कितना व्यापक होता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यूके से आयात होने वाले पात्र CBU मॉडलों के खरीदारों के लिए आने वाले समय में राहत की संभावना पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।

 

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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