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भारत-वियतनाम संबंध विश्वास और सम्मान पर आधारित: राजदूत

Shah Times 2026-08-14 12:03:57
भारत-वियतनाम संबंध विश्वास और सम्मान पर आधारित: राजदूत

भारत-वियतनाम रिश्ते विश्वास और सम्मान पर आधारित: राजदूत

शेरपा बोले, भारत-वियतनाम साझेदारी का आधार सद्भावना

भारत-वियतनाम संबंधों में नई पेशरफ़्त, राजदूत ने बताया आधार


भारतीय राजदूत त्शेरिंग डब्ल्यू. शेरपा ने भारत-वियतनाम रिश्तों को विश्वास, आपसी सम्मान और सद्भावना पर आधारित बताया। उन्होंने साझा इतिहास, बौद्ध विरासत और राष्ट्रीय आंदोलनों की समान पृष्ठभूमि का उल्लेख किया। मई 2026 में दोनों देशों ने रिश्तों को एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया और 2030 तक 25 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य रखा।


हनोई, वियतनाम|14 अगस्त 2026|शाह टाइम्स

By Mohd Haris


भारत-वियतनाम रिश्तों की नई तस्वीर

भारत और वियतनाम के बीच रिश्तों को लेकर भारतीय राजदूत त्शेरिंग डब्ल्यू. शेरपा ने कहा है कि दोनों देशों की पारंपरिक साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत विश्वास, आपसी सम्मान और सद्भावना है। उन्होंने दोनों देशों को प्रोग्रेसिव और फॉरवर्ड-लुकिंग पार्टनर बताते हुए कहा कि भारत और वियतनाम ने चुनौतियों को अवसरों में बदला है और एक-दूसरे से सीखते हुए साझा क्षमताओं को आगे बढ़ाया है।

शेरपा ने यह टिप्पणी वियतनाम के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक Vietnam News में प्रकाशित अपने लेख में की। उनका लेख भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रकाशित हुआ है। इसमें उन्होंने भारत-वियतनाम रिश्तों के ऐतिहासिक आधार से लेकर भविष्य की रणनीतिक साझेदारी तक का जायज़ा पेश किया।

विश्वास और सद्भावना को बताया रिश्तों की ताकत

भारतीय राजदूत के मुताबिक, दोनों देशों के बीच लोगों को केंद्र में रखने वाली साझेदारी ने लंबे समय से आपसी भरोसे और सम्मान को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि यही सद्भावना पारंपरिक रिश्तों को आने वाले दौर में और मजबूत करने की बुनियाद है।

यह बयान ऐसे वक्त आया है जब भारत और वियतनाम ने अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को नए रणनीतिक स्तर पर पहुंचाया है। मई 2026 में वियतनाम के पार्टी महासचिव और राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रिश्तों को Enhanced Comprehensive Strategic Partnership तक बढ़ाने का फैसला किया था।

यह अपग्रेड दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल और बदलते क्षेत्रीय हालात में आपसी महत्व को दर्शाता है।

साझा इतिहास ने रिश्तों को दी गहराई

भारत और वियतनाम के रिश्तों की बुनियाद केवल मौजूदा कूटनीति तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत के रिश्ते लंबे समय से मौजूद हैं।

शेरपा ने दोनों देशों की स्वतंत्रता की समान ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। वियतनाम ने सितंबर 1945 में और भारत ने अगस्त 1947 में औपनिवेशिक शासन से आज़ादी हासिल की। दोनों देशों के राष्ट्रीय आंदोलनों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव और एक-दूसरे से मिली प्रेरणा का भी उन्होंने ज़िक्र किया।

भारतीय राजदूत ने भारत और वियतनाम के संबंधों में बौद्ध धर्म और साझा सांस्कृतिक विरासत को अहम कड़ी बताया। उनके मुताबिक, Buddhism दोनों समाजों के बीच एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पुल बना हुआ है।

मई की यात्रा ने बदला रणनीतिक स्तर

वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम की मई 2026 की भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में अहम पड़ाव रही। इस यात्रा के दौरान 13 समझौता ज्ञापनों पर सहमति बनी और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की घोषणाएं हुईं।

दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया है। भारतीय दूतावास से जुड़े एक इंटरव्यू के मुताबिक, दोनों देशों के बीच व्यापार 2015-16 के करीब 8 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में लगभग 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका था।

इस आंकड़े से पता चलता है कि आर्थिक रिश्तों में अच्छी पेशरफ़्त हुई है, हालांकि दोनों देशों के कुल वैश्विक व्यापार में द्विपक्षीय कारोबार की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है।

टेक्नोलॉजी से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स तक सहयोग

नई साझेदारी का दायरा पारंपरिक कूटनीतिक रिश्तों से काफी आगे बढ़ चुका है। दोनों देश टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, क्रिटिकल मिनरल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, हेल्थकेयर, फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

भारतीय राजदूत ने टेक्नोलॉजी को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताया है। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वियतनाम के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी उन्होंने जोर दिया।

क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट और QR कोड आधारित भुगतान व्यवस्था को भी दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और कारोबारी संपर्क बढ़ाने वाला अहम माध्यम बताया गया है।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा में बढ़ता तालमेल

भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी में वियतनाम को एक अहम स्तंभ माना जाता है। शेरपा ने दोहराया कि वियतनाम भारत की Act East Policy और Vision MAHASAGAR के संदर्भ में महत्वपूर्ण साझेदार है।

दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर समान रुख रखते हैं। वियतनाम का Indo-Pacific Oceans Initiative में शामिल होना भी दोनों देशों के रणनीतिक तालमेल को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

यह सहयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुआमले तेजी से अहम हो रहे हैं।

आसियान के साथ भारत की नीति में वियतनाम की भूमिका

भारत की विदेश नीति में ASEAN centrality एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। दक्षिण-पूर्व एशिया में वियतनाम के बढ़ते महत्व के कारण भारत के लिए हनोई के साथ रणनीतिक संवाद की अहमियत भी बढ़ी है।

शेरपा ने कहा कि भारत ASEAN centrality के लिए प्रतिबद्ध है और भारत-वियतनाम साझेदारी का असर बहुपक्षीय मंचों तक पहुंच रहा है। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय कानून, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के साथ-साथ Global South की आवाज मजबूत करने को लेकर भी साझा हित रखते हैं।

इसका मतलब है कि भारत-वियतनाम संबंध केवल द्विपक्षीय रिश्तों का मामला नहीं रह गए हैं। दोनों देशों की साझेदारी व्यापक एशियाई और इंडो-पैसिफिक जियोपॉलिटिक्स से भी जुड़ चुकी है।

संस्कृति और बौद्ध विरासत बनी स्थायी कड़ी

भारत-वियतनाम रिश्तों में सांस्कृतिक डिप्लोमेसी की भूमिका भी लगातार मजबूत हो रही है। बौद्ध धर्म दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क की पुरानी कड़ी है।

2025 में वियतनाम में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी को दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण उदाहरण माना गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वियतनाम के My Son Sanctuary में संरक्षण कार्य भी किए हैं।

चाम पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण जैसे प्रोजेक्ट दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को नई टेक्नोलॉजी के जरिए सुरक्षित रखने की कोशिशों का हिस्सा हैं।

लोगों के बीच संपर्क भी बढ़ा

भारत और वियतनाम के बीच People-to-People Connectivity भी रिश्तों का अहम आधार बन रही है। भारतीय राजदूत के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हर सप्ताह 90 से ज्यादा सीधी उड़ानें संचालित होती हैं। दोनों देशों के बीच यात्रियों की संख्या करीब 9 लाख तक पहुंच चुकी है।

इस कनेक्टिविटी का सीधा असर पर्यटन, कारोबार और लोगों के बीच संपर्क पर पड़ा है। दोनों देश समुद्री संपर्क बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी Indian Studies Chairs स्थापित करने की दिशा में काम हो रहा है। दा नांग यूनिवर्सिटी और University of Social Sciences and Humanities में भारतीय अध्ययन से जुड़े अकादमिक कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है।

व्यापार का अगला लक्ष्य 25 अरब डॉलर

भारत और वियतनाम ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले दशक में तेजी से बढ़ा है, लेकिन अभी भी क्षमता के मुकाबले इसमें विस्तार की गुंजाइश है।

कृषि क्षेत्र में भारतीय अंगूर और वियतनामी ड्यूरियन जैसे उत्पादों के लिए मार्केट एक्सेस पर भी प्रगति हुई है। क्रिटिकल मिनरल्स, फार्मास्यूटिकल्स, ICT और सप्लाई चेन रेजिलिएंस को भविष्य के सहयोग के अहम क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है।

यह आर्थिक एजेंडा दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को व्यावहारिक और कारोबारी आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बदलती जियोपॉलिटिक्स में साझेदारी का मतलब

दुनिया इस समय जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, बदलते शक्ति संतुलन और आर्थिक विखंडन के दौर से गुजर रही है। ऐसे हालात में भारत और वियतनाम दोनों अपने रणनीतिक विकल्पों को ज्यादा व्यापक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

दोनों देश किसी एक शक्ति पर निर्भरता कम करने, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन पर जोर देते हैं। यही वजह है कि भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और वियतनाम की क्षेत्रीय भूमिका एक-दूसरे के लिए उपयोगी बनती जा रही है।

भारत के लिए वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। वियतनाम के लिए भारत आर्थिक, तकनीकी, रक्षा और राजनीतिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण विकल्प है।

आगे की राह में क्या अहम होगा

अब असली चुनौती इन राजनीतिक घोषणाओं को जमीनी नतीजों में बदलने की है। मई 2026 की यात्रा के दौरान हुए समझौतों और घोषणाओं को लागू करना दोनों सरकारों की प्राथमिकता रहेगी।

व्यापार लक्ष्य हासिल करने के लिए मार्केट एक्सेस, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी प्रक्रियाओं में सुधार अहम होंगे। टेक्नोलॉजी सहयोग को प्रभावी बनाने के लिए निजी क्षेत्र, रिसर्च इंस्टीट्यूशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच संपर्क बढ़ाना होगा।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा में भी दोनों देशों के बीच तालमेल को क्षेत्रीय स्थिरता के व्यापक एजेंडे से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।

2027 में सांस्कृतिक रिश्तों का नया पड़ाव

2027 दोनों देशों के लिए खास साल होगा। भारत और वियतनाम अपने राजनयिक संबंधों की 55वीं वर्षगांठ मनाएंगे। इस मौके पर भारत में Vietnam Cultural Week और वियतनाम में India Cultural Week आयोजित करने की योजना है।

यह पहल बताती है कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी केवल सरकारों और संस्थानों तक सीमित नहीं है। संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क को भी रिश्तों की स्थायी बुनियाद माना जा रहा है।

निष्कर्ष

भारतीय राजदूत त्शेरिंग डब्ल्यू. शेरपा का बयान भारत-वियतनाम रिश्तों की मौजूदा दिशा को स्पष्ट करता है। दोनों देशों की साझेदारी का आधार साझा इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, बौद्ध संपर्क, आपसी सम्मान और रणनीतिक भरोसा है।

मई 2026 में रिश्तों को Enhanced Comprehensive Strategic Partnership तक ले जाना इस प्रक्रिया की बड़ी पेशरफ़्त है। अब फोकस व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, क्रिटिकल मिनरल्स और सांस्कृतिक सहयोग में ठोस नतीजे हासिल करने पर रहेगा।

भारत के लिए वियतनाम एक्ट ईस्ट पॉलिसी का अहम स्तंभ है, जबकि वियतनाम के लिए भारत इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ के व्यापक परिदृश्य में महत्वपूर्ण साझेदार है। उपलब्ध संकेत बताते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते अब पारंपरिक दोस्ती से आगे बढ़कर एक व्यावहारिक और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहे हैं।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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