Synopsis
भारत ने Critical Minerals की दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षित करने की दिशा में जाम्बिया के साथ निवेश संबंधी बातचीत फिर शुरू की है। 26 अगस्त 2026 को दोनों देशों के अधिकारियों के बीच शुरुआती स्तर की चर्चा हुई। बातचीत में तांबा और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े निवेश अवसरों पर ध्यान दिया गया। भारत के लिए यह पहल बढ़ती औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के बीच विदेशी खनिज संसाधनों तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
Location: नई दिल्ली, भारत
Date: 26 अगस्त 2026
Byline: अपूर्वा चौधरी
भारत-जाम्बिया के बीच फिर शुरू हुई बातचीत
भारत और जाम्बिया के बीच Critical Minerals को लेकर बातचीत ऐसे समय में आगे बढ़ी है, जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक विनिर्माण के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति पर जोर दे रही हैं।
26 अगस्त को हुई शुरुआती चर्चा में दोनों पक्षों ने निवेश और खनिज संसाधनों से जुड़े संभावित सहयोग पर विचार किया। भारत का लक्ष्य केवल खनिजों का आयात बढ़ाना नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए भरोसेमंद सप्लाई नेटवर्क तैयार करना भी है।
तांबा और कोबाल्ट क्यों अहम हैं?
तांबा आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण धातु है। बिजली के तारों, इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर ग्रिड, इलेक्ट्रिक वाहनों और औद्योगिक उपकरणों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। वहीं कोबाल्ट बैटरी और ऊर्जा भंडारण से जुड़े उद्योगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार के साथ इन खनिजों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए सुरक्षित और विविध अंतरराष्ट्रीय सप्लाई स्रोत तैयार करना भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
पुराने खनन प्रोजेक्ट का क्या हुआ?
भारत और जाम्बिया के बीच पहले करीब 9,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र से जुड़े एक खनन अधिकार मामले को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई थी। हालांकि, इस बार शुरू हुई प्रारंभिक चर्चा में उस पुराने विवादित प्रोजेक्ट को शामिल नहीं किया गया है।
इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश पुराने मतभेदों को अलग रखते हुए नए निवेश अवसरों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में बातचीत किस दिशा में जाती है, यह इस साझेदारी की वास्तविक संभावनाओं को तय करेगा।
KABIL की भी बढ़ रही भूमिका
Critical Minerals की वैश्विक दौड़ में भारत की सरकारी कंपनी Khanij Bidesh India Ltd यानी KABIL भी सक्रिय है। कंपनी विदेशों में ऐसे खनिज संसाधनों की संभावनाएं तलाश रही है, जो भारत की भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जाम्बिया के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, रूस, इंडोनेशिया और मलावी जैसे देशों में भी संभावित अवसरों का आकलन किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि भारत अपनी Critical Minerals strategy को किसी एक देश पर निर्भर रखने के बजाय कई स्रोतों में फैलाना चाहता है।
भारत को तांबे की चिंता क्यों?
भारत में तांबे की मांग बढ़ने के साथ आयात पर निर्भरता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। 2018 में Sterlite Copper का स्मेल्टर बंद होने के बाद घरेलू उत्पादन और उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ा।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, 2047 तक भारत को अपनी कॉपर कंसंट्रेट जरूरत का लगभग 91 से 97 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा करना पड़ सकता है। यदि मांग अनुमान के मुताबिक बढ़ती है, तो लंबे समय के लिए विदेशी खनन परिसंपत्तियों और सप्लाई स्रोतों तक पहुंच भारत के लिए और महत्वपूर्ण हो जाएगी।
Critical Minerals रणनीति का बड़ा हिस्सा
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण की ओर बढ़ रही है। इन क्षेत्रों के विस्तार के लिए केवल ऊर्जा और पूंजी ही नहीं, बल्कि तांबा, कोबाल्ट, लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की स्थिर आपूर्ति भी जरूरी होगी।
जाम्बिया के साथ बातचीत इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अफ्रीकी देशों के साथ खनिज सहयोग बढ़ाने से भारत को अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने और भविष्य में किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल भारत-जाम्बिया बातचीत शुरुआती चरण में है। इसलिए इसे किसी अंतिम निवेश समझौते या खनन परियोजना की मंजूरी के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। आगे की बातचीत में निवेश की शर्तें, खनन अधिकार, संसाधनों की मात्रा, कीमत और सप्लाई व्यवस्था जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे।
भारत के लिए असली चुनौती यह होगी कि विदेशों में संसाधनों तक पहुंच बनाने के साथ-साथ उन्हें प्रतिस्पर्धी कीमत पर सुरक्षित और लगातार देश तक लाया जा सके।
जाम्बिया के साथ Critical Minerals पर बातचीत फिर शुरू होना भारत की बदलती आर्थिक और औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है। तांबा और कोबाल्ट जैसे खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, बैटरी और आधुनिक विनिर्माण के लिए जरूरी हैं।
भारत जिस तरह विदेशों में खनिज संसाधनों के नए अवसर तलाश रहा है, उससे उसकी रणनीति अब केवल आयात पर निर्भर रहने के बजाय लंबी अवधि की सुरक्षित सप्लाई चेन और रणनीतिक निवेश तैयार करने की ओर बढ़ती दिख रही है। हालांकि, जाम्बिया के साथ बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और इसके परिणाम आगे होने वाली वार्ताओं पर निर्भर करेंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।