झीरम घाटी हमले में 10 दोषियों को मौत की सजा, 13 साल बाद आया फैसला
Harish Qureshi
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2026-09-17 11:17:00
झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। अदालत ने 5 सितंबर को इन्हें दोषी ठहराया था। फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील का रास्ता खुला है।
जगदलपुर | 17 सितंबर 2026
By Mohd Haris
13 साल पुराने मामले में बड़ा न्यायिक फैसला
छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित झीरम घाटी में 25 मई 2013 को हुए माओवादी हमले के मामले में विशेष एनआईए अदालत ने 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। जगदलपुर में विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 16 सितंबर को सजा का ऐलान किया। अदालत ने इससे पहले 5 सितंबर को सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था।
यह हमला कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले को निशाना बनाकर किया गया था। इसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। उपलब्ध आधिकारिक और समाचार स्रोतों में मृतकों की संख्या को लेकर अंतर दिखता है, हालांकि एनआईए के अनुसार कुल 27 लोगों की मौत हुई।
10 दोषियों को मृत्युदंड
विशेष एनआईए अदालत ने जिन 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई, उनमें प्रमिला मोडियम, चैती लेकाम, सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी, आयता मरकाम, मदकामी देवा, जोगा मदकामी, बनजामी सन्ना और महादेव नाग शामिल हैं।
इन आरोपियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। मामले में कुल 11 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद बाकी 10 आरोपियों पर मुकदमा जारी रहा।
25 मई 2013 को क्या हुआ था
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला बस्तर के दरभा इलाके में झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान माओवादी हमलावरों ने काफिले पर घात लगाकर हमला किया।
एनआईए के मुताबिक हमले में आईईडी विस्फोट, गोलीबारी और ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के अनुसार 24 लोगों की मौके पर मौत हुई और घायल हुए लोगों में से 3 की बाद में मृत्यु हो गई।
हमले में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख राजनीतिक नेता मारे गए।
जांच एनआईए को सौंपी गई
हमले के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया था। तत्कालीन राज्य सरकार ने जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण को सौंप दी। एनआईए ने 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल की और बाद में पूरक चार्जशीट भी पेश की।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए। दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों को भी अदालत के सामने रखा गया।
किन धाराओं में दोषी ठहराया गया
अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
एनआईए की जांच के अनुसार प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी से जुड़े सशस्त्र कैडरों ने स्थानीय समितियों और डिवीजनों के साथ मिलकर हमले की साजिश रची थी। यह जांच एजेंसी का निष्कर्ष है, जिसे अदालत के फैसले में दोषसिद्धि के आधार के रूप में देखा गया।
हाईकोर्ट में अपील का रास्ता
मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद मामला कानूनी तौर पर अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है। दोषियों को हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। मृत्युदंड के मामले में हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है।
बचाव पक्ष ने फैसले से असहमति जताई है और हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। इसलिए आगे की न्यायिक प्रक्रिया इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
झीरम घाटी मामला क्यों महत्वपूर्ण है
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा के इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल रहा है। हमले में राज्य कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ था।
मामले की जांच और कथित व्यापक साजिश को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी लंबे समय से बहस होती रही है। बाद के वर्षों में राज्य सरकार ने अलग जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया था। एनआईए और राज्य स्तर की जांच को लेकर अलग-अलग सवाल भी उठाए गए।
इन राजनीतिक आरोपों और जांच से जुड़े विवादों को अदालत द्वारा दोषसिद्ध किए गए 10 आरोपियों के खिलाफ दर्ज न्यायिक निष्कर्ष से अलग देखना जरूरी है। व्यापक साजिश से जुड़े अलग-अलग दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक और जांच प्रक्रियाओं से तय होगी।
अब आगे क्या होगा
अब मामले की अगली अहम कड़ी हाईकोर्ट की कार्यवाही होगी। दोषियों की अपील और मृत्युदंड की पुष्टि से जुड़े कानूनी सवाल वहीं परखे जाएंगे।
इसलिए 16 सितंबर का फैसला महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है, लेकिन इसे अंतिम रूप से सजा के क्रियान्वयन का आदेश नहीं माना जा सकता। आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मृत्युदंड पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष
झीरम घाटी हमले के 13 साल बाद विशेष एनआईए अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। यह फैसला लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का अहम चरण है।
फिलहाल सभी की निगाहें हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही पर हैं। अपील और मृत्युदंड की वैधानिक पुष्टि के बाद ही इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति सामने आएगी।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।