₹9 लाख की नौकरी, बादलों के बीच रहकर करना था ये काम
बादल देखो, वीडियो बनाओ और पाओ ₹9 लाख, चीन की अनोखी नौकरी
3,500 लोगों ने किया अप्लाई, एक महीने की नौकरी ने मचाई हलचल
चीन के लाओजुन माउंटेन ने एक महीने की क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर नौकरी निकाली। वेतन 60,000 युआन था और आवास भी मिला। 3,500 से अधिक लोगों ने आवेदन किया। चयनित 23 वर्षीय ली सिचेन को बादलों, पहाड़ों और बदलते मौसम की वीडियो बनानी थीं। नौकरी आसान दिखी, लेकिन दिन सुबह पांच बजे शुरू होता था।
हेनान, चीन | 22 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
अगर आपको ऐसी नौकरी मिले जिसमें ऑफिस जाने की जरूरत न हो, सामने पहाड़ हों, चारों तरफ बादलों का समुद्र हो और एक महीने के काम के बदले करीब ₹9 लाख मिलें, तो शायद आवेदन करने वालों की लंबी कतार लगेगी। चीन के हेनान प्रांत में लाओजुन माउंटेन ने कुछ ऐसा ही असामान्य मौका दिया। लाओजुन माउंटेन स्केनिक एरिया ने जुलाई में एक महीने के लिए “क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर” की भर्ती शुरू की थी। चुने गए व्यक्ति को 60,000 चीनी युआन दिए जाने थे। अलग-अलग भारतीय रिपोर्टों में इसकी कीमत करीब ₹8.5 लाख से ₹9 लाख बताई गई है। आवास भी उपलब्ध कराया गया था। नौकरी की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर इसे “ड्रीम जॉब” और “जन्नत जैसी नौकरी” के तौर पर पेश किया जाने लगा। एक हफ्ते के भीतर 3,500 से अधिक आवेदन आने की जानकारी सामने आई।
नाम सुनकर लग सकता है कि चयनित व्यक्ति को बस पहाड़ पर बैठकर बादल देखने थे। हकीकत इससे काफी अलग थी। क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर का काम लाओजुन माउंटेन के बादलों, धुंध, सूर्योदय, बदलती रोशनी और पहाड़ी दृश्यों को रिकॉर्ड करना था। इसके बाद इन दृश्यों के वीडियो तैयार करके ऑनलाइन साझा करने थे। यानी यह नौकरी दरअसल पर्यटन, कंटेंट क्रिएशन और विजुअल डॉक्यूमेंटेशन का मिश्रण थी। भर्ती अभियान का मकसद भी केवल किसी व्यक्ति को प्राकृतिक नजारा दिखाना नहीं था। स्केनिक एरिया अपने पहाड़ी दृश्यों को सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहता था। इस लिहाज से चयनित व्यक्ति एक तरह से पर्यटन स्थल का डिजिटल कंटेंट क्रिएटर भी था।
नौकरी की सबसे बड़ी खासियत वेतन के साथ उसका लोकेशन था। लाओजुन माउंटेन अपने बादलों से ढके पहाड़ी दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहां अक्सर पहाड़ों के बीच धुंध की मोटी परत दिखाई देती है, जिसे “सी ऑफ क्लाउड्स” कहा जाता है। आवेदन प्रक्रिया भी सोशल मीडिया केंद्रित थी। उम्मीदवारों को तय हैशटैग के साथ अपने वीडियो जमा करने थे। चयन में वीडियो की क्वालिटी के साथ दर्शकों की प्रतिक्रिया, लाइक्स और रीपोस्ट जैसे डिजिटल एंगेजमेंट संकेतकों को भी महत्व दिया गया। यानी यह पारंपरिक सरकारी या कॉरपोरेट नौकरी का इंटरव्यू नहीं था। उम्मीदवारों को अपनी क्रिएटिविटी कैमरे के जरिए साबित करनी थी।
इस अनोखी नौकरी के लिए अंततः हेनान के 23 वर्षीय व्लॉगर ली सिचेन का चयन हुआ। वह सोशल मीडिया पर @xiaozao नाम से सक्रिय हैं और उन्होंने ई-कॉमर्स की पढ़ाई की थी। रिपोर्टों के मुताबिक ली के आवेदन वीडियो ने चयन समिति का ध्यान खींचा। उन्होंने कई प्रोफेशनल फोटोग्राफरों को पीछे छोड़ते हुए यह अस्थायी भूमिका हासिल की। उन्हें लाओजुन माउंटेन का पहला “क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर” बताया गया।
उनका कार्यकाल 16 जुलाई से 15 अगस्त तक चला। यानी यह स्थायी नौकरी नहीं थी। यह एक महीने का विशेष प्रोजेक्ट था।
सोशल मीडिया पर इस नौकरी की तस्वीर काफी आकर्षक नजर आई। पहाड़, बादल, सूर्योदय और करीब ₹9 लाख का भुगतान। लेकिन ली सिचेन का अनुभव बताता है कि काम में मेहनत भी काफी थी। उनका दिन सुबह करीब 5 बजे शुरू होता था। उन्हें सूर्योदय से पहले कैमरा तैयार करना पड़ता था और कई बार सूर्यास्त के बाद तक शूटिंग जारी रहती थी। अलग-अलग मौसम और रोशनी में पहाड़ों को रिकॉर्ड करने के लिए उन्हें लगातार अलग-अलग एंगल तलाशने पड़ते थे। काम में केवल वीडियो शूट करना शामिल नहीं था। ली ने वीडियो एडिटिंग, कलर ग्रेडिंग, शूटिंग तकनीक और ड्रोन ऑपरेशन जैसे कौशल भी इस्तेमाल किए। बदलते मौसम के कारण शूटिंग की योजना भी परिस्थितियों के मुताबिक बदलनी पड़ती थी।
इस नौकरी की सबसे ज्यादा चर्चा मुफ्त आवास को लेकर हुई। चयनित उम्मीदवार को महीने भर पहाड़ पर रहने की सुविधा दी गई। यही वजह थी कि सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सामान्य नौकरी के बजाय “ड्रीम जॉब” कहना शुरू कर दिया। लेकिन मुफ्त रहना और खाना इस बात की गारंटी नहीं था कि काम आरामदायक होगा। रोजाना कंटेंट तैयार करना, सही समय पर बादलों की तस्वीर लेना और बदलते मौसम में शूटिंग करना जिम्मेदारी का हिस्सा था। इससे एक महत्वपूर्ण फर्क सामने आता है। नौकरी का लोकेशन जितना आकर्षक था, उसका कंटेंट प्रोडक्शन वाला हिस्सा उतना ही पेशेवर था।
लाओजुन माउंटेन मध्य चीन के हेनान प्रांत में स्थित है। यह चीन के प्रसिद्ध ताओवादी पर्वतों में शामिल है और इसका इतिहास 2,000 साल से अधिक पुराना बताया जाता है। इसे चीन की 5A कैटेगरी के पर्यटन स्थलों में रखा गया है, जो देश की सबसे ऊंची पर्यटन रेटिंग है। पर्वत का सबसे चर्चित आकर्षण बादलों और धुंध से ढके दृश्य हैं। मौसम की स्थिति के अनुसार यहां पहाड़ी चोटियां बादलों के बीच उभरती दिखाई देती हैं। इसी प्राकृतिक खूबसूरती को डिजिटल कंटेंट के जरिए दर्शकों तक पहुंचाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य था।
यहां एक और दिलचस्प अपडेट सामने आया है। लाओजुन माउंटेन का यह एक महीने का प्रयोग 15 अगस्त को खत्म हो गया, लेकिन स्केनिक एरिया की ओर से भविष्य में इसी तरह के नए एक्सपीरियंस आधारित अभियान चलाने की संभावना बताई गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अभी फिर से आवेदन शुरू हो गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में मौजूदा भर्ती को समाप्त बताया गया है। इसलिए इस खबर को पढ़कर किसी अनजान वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट पर तुरंत आवेदन करना जोखिम भरा हो सकता है।
इस पूरे मामले को केवल एक असामान्य नौकरी के तौर पर देखना अधूरा होगा। पर्यटन उद्योग में सोशल मीडिया अब मार्केटिंग स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा बन चुका है। लाओजुन माउंटेन ने एक ऐसी नौकरी बनाई जिसे लेकर लोग खुद चर्चा करने लगे। हजारों आवेदन आए, मीडिया कवरेज हुई और पहाड़ के प्राकृतिक दृश्यों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान गया। इस तरह नौकरी खुद एक डिजिटल मार्केटिंग अभियान में बदल गई। यह मॉडल पर्यटन स्थलों के लिए खासा उपयोगी हो सकता है। किसी महंगे विज्ञापन अभियान के बजाय एक आकर्षक अनुभव और सोशल मीडिया कंटेंट लोगों का ध्यान खींच सकता है।
इस दावे में एक जरूरी सावधानी है। रिपोर्टों में 60,000 युआन का भुगतान बताया गया है, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत अलग-अलग समय और विनिमय दर के आधार पर करीब ₹8.5 लाख से ₹9 लाख के बीच बताई गई। इसलिए इसे ठीक-ठीक “₹9 लाख की मासिक स्थायी सैलरी” कहना सही नहीं होगा। यह एक महीने के विशेष अस्थायी प्रोजेक्ट के लिए 60,000 युआन का भुगतान था। यही अंतर इस वायरल खबर को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यह रेगुलर जॉब ओपनिंग नहीं थी, बल्कि पर्यटन स्थल का सीमित अवधि वाला कंटेंट प्रोजेक्ट था।
ली के लिए इस अनुभव का फायदा केवल भुगतान तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने वीडियो शूटिंग, एडिटिंग, कलर ग्रेडिंग और ड्रोन ऑपरेशन जैसे कौशल विकसित किए। उनकी सोशल मीडिया मौजूदगी को भी इस अनुभव से फायदा मिला। हालांकि एक महीने का प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद वह स्थायी नौकरी की तलाश में हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि इतनी आकर्षक दिखने वाली भूमिका करियर की स्थायी गारंटी नहीं थी। उनके लिए यह एक प्रोजेक्ट, पोर्टफोलियो और डिजिटल एक्सपोज़र का मौका था।
इस कहानी का व्यापक पहलू डिजिटल जॉब मार्केट से जुड़ा है। कंपनियां और पर्यटन संस्थान अब केवल पारंपरिक कर्मचारियों की तलाश नहीं करते। उन्हें ऐसे लोग भी चाहिए जो किसी जगह, उत्पाद या अनुभव को वीडियो और सोशल मीडिया के जरिए दर्शकों तक पहुंचा सकें। क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर इसी बदलाव का एक असामान्य उदाहरण है। यहां कर्मचारी का काम प्राकृतिक दृश्य देखना भर नहीं था। उसे उस दृश्य को डिजिटल कंटेंट में बदलकर दर्शकों तक पहुंचाना था। यानी नौकरी की असली वैल्यू “बादल देखने” में नहीं, बल्कि बादलों को ऐसा कंटेंट बनाने में थी जिसे लोग ऑनलाइन देखना चाहें।
इस कहानी को देखकर किसी भी वायरल “ड्रीम जॉब” विज्ञापन पर भरोसा करना सही नहीं होगा। खासकर तब, जब उसमें असाधारण वेतन, मुफ्त आवास और आसान काम का दावा किया गया हो। लाओजुन माउंटेन का मामला वास्तविक रिपोर्टों से सामने आया है, लेकिन इसकी शर्तें सीमित अवधि और खास कंटेंट प्रोजेक्ट से जुड़ी थीं। किसी भी नए अवसर के लिए आधिकारिक भर्ती घोषणा, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और भुगतान की शर्तें जांचना जरूरी है। इस मामले में भी मौजूदा रिपोर्टें बताती हैं कि भर्ती जुलाई में हुई और 15 अगस्त तक प्रोजेक्ट पूरा हो चुका था।
चीन की यह ₹9 लाख वाली नौकरी पहली नजर में बादलों के बीच आराम से रहने का मौका लगती है। लेकिन असल कहानी इससे ज्यादा दिलचस्प है। यह एक महीने का कंटेंट क्रिएशन प्रोजेक्ट था, जिसमें चुने गए व्यक्ति को प्राकृतिक दृश्यों की लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल पब्लिशिंग करनी थी। 3,500 से अधिक आवेदन और सोशल मीडिया पर हुई चर्चा दिखाती है कि लोग ऐसे काम की तरफ आकर्षित हैं जिसमें पारंपरिक ऑफिस रूटीन से अलग अनुभव मिले। लेकिन इस मामले की सबसे अहम बात यह है कि “ड्रीम जॉब” के पीछे भी नियमित शूटिंग, एडिटिंग, मौसम के साथ काम और सुबह से शाम तक की मेहनत मौजूद थी। लाओजुन माउंटेन का प्रयोग पर्यटन और डिजिटल मीडिया के मेल का दिलचस्प उदाहरण है। फिलहाल यह एक महीने का प्रोजेक्ट खत्म हो चुका है। भविष्य में ऐसे नए अभियान आते हैं या नहीं, इस पर नजर रहेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।