कांग्रेस में एआईसीसी सचिवों की नई टीम के गठन की कवायद तेज है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की निगरानी में नेताओं के संगठनात्मक काम, राजनीतिक समझ और जमीनी पकड़ का जायज़ा लिया जा रहा है।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 15 सितंबर 2026
✍️ मोहम्मद नावेद
कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। पार्टी के भीतर एआईसीसी सचिवों की भूमिका और प्रदर्शन की समीक्षा के साथ नई टीम तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इस कवायद में पुराने संगठनात्मक ढांचे के साथ नए और सक्रिय नेताओं को मौका देने पर फोकस दिखाई दे रहा है।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की निगरानी में संभावित उम्मीदवारों की छंटनी और इंटरव्यू की प्रक्रिया हुई है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक करीब 130 से 150 नेताओं को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जबकि अंतिम स्तर पर लगभग 25 से 30 नामों पर विचार किए जाने की बात सामने आई है।
एआईसीसी सचिवों की भूमिका पर समीक्षा
कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में एआईसीसी सचिव महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्हें राज्यों में पार्टी की गतिविधियों, संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय तथा चुनावी तैयारियों से जुड़े काम सौंपे जाते हैं।
मौजूदा प्रक्रिया में पार्टी नेतृत्व सचिव पद के लिए संभावित नेताओं के पुराने संगठनात्मक काम, राजनीतिक अनुभव और संबंधित राज्यों की परिस्थितियों की समझ को परख रहा है। उम्मीदवारों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी समझ से जुड़े सवाल भी पूछे जाने की रिपोर्ट है।
राहुल और प्रियंका की सीधी भागीदारी
रिपोर्टों के अनुसार, इंटरव्यू प्रक्रिया में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की सीधी भागीदारी रही है। कुछ उम्मीदवारों के इंटरव्यू समूहों में लिए गए और उनसे उनके बायोडाटा, संगठनात्मक जिम्मेदारियों तथा राजनीतिक परिस्थितियों पर सवाल पूछे गए।
इस प्रक्रिया में केसी वेणुगोपाल के कार्यालय की भी अहम भूमिका बताई गई है। राज्यों से मिले फीडबैक और नेताओं के संगठनात्मक रिकॉर्ड के आधार पर संभावित नामों की छंटनी की गई।
युवा और नए चेहरों पर जोर
कांग्रेस के भीतर चल रही इस कवायद का एक अहम पहलू नए चेहरों को संगठन में जिम्मेदारी देने की कोशिश है। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ऐसे नेताओं को आगे लाने पर जोर दे रहे हैं जिनके पास संगठनात्मक काम का अनुभव है, लेकिन फिलहाल उनके पास बड़ी केंद्रीय जिम्मेदारी नहीं है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी मौजूदा पदाधिकारियों को हटाया जा रहा है। रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट है कि कुछ मौजूदा पदाधिकारी इस चयन प्रक्रिया में शामिल रहे हैं। इसलिए अंतिम फैसले तक व्यापक स्तर पर पदमुक्ति को तय तथ्य के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
50 फीसदी सचिवों की चर्चा क्यों
कुछ रिपोर्टों में मौजूदा एआईसीसी सचिवों में लगभग आधे को बदलने की संभावना जताई गई है। वर्तमान संगठनात्मक ढांचे में 64 एआईसीसी सचिव होने की जानकारी सामने आई है। इस हिसाब से लगभग आधे पदों पर बदलाव की स्थिति बनती है, लेकिन कांग्रेस की ओर से अंतिम सूची और पदवार बदलाव की आधिकारिक घोषणा अभी निर्णायक आधार नहीं देती।
इसलिए इसे फिलहाल संभावित संगठनात्मक फेरबदल के तौर पर देखना अधिक उचित है, न कि तय नियुक्तियों या पदमुक्तियों की सूची के रूप में।
इंटरव्यू प्रक्रिया में क्या देखा गया
उम्मीदवारों से उनके बायोडाटा और पार्टी में निभाई गई संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बारे में सवाल पूछे गए। रिपोर्टों के मुताबिक राज्य की राजनीतिक स्थिति, राष्ट्रीय राजनीतिक माहौल और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर भी उनकी समझ परखी गई।
यह प्रक्रिया कांग्रेस के लिए इसलिए अहम है क्योंकि सचिव स्तर के पद पार्टी के राष्ट्रीय संगठन और राज्यों के बीच कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नेतृत्व ऐसे चेहरों की तलाश में है जो संगठनात्मक जिम्मेदारी के साथ राजनीतिक परिस्थितियों को भी समझते हों।
पार्टी के भीतर असंतोष की आवाज भी
संगठनात्मक चयन की इस प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के भीतर कुछ असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ युवा नेताओं ने इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाए जाने पर नाराज़गी जताई है। उनका तर्क है कि लंबे समय तक संगठन में काम करने के बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर नहीं मिला।
दूसरी तरफ पार्टी के भीतर यह तर्क भी है कि किसी भी बड़े संगठनात्मक बदलाव में चयन के लिए स्पष्ट मानदंड जरूरी हैं। अगर प्रक्रिया पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित होती है, तो नई टीम को अधिक सक्रिय बनाने का उद्देश्य हासिल किया जा सकता है। यह बहस कांग्रेस के अंदर संगठनात्मक लोकतंत्र और नेतृत्व चयन की शैली को लेकर भी महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह बदलाव
कांग्रेस लंबे समय से संगठन को चुनावी जरूरतों के मुताबिक अधिक सक्रिय बनाने की चुनौती का सामना कर रही है। एआईसीसी सचिवों की नई टीम इस दिशा में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सिर्फ युवा चेहरे शामिल करना पर्याप्त नहीं होगा। नई टीम की वास्तविक परीक्षा राज्यों में संगठन खड़ा करने, स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने में होगी।
हालिया नियुक्तियों में भी संगठनात्मक जिम्मेदारियों को बढ़ाने और विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने का रुझान दिखाई दिया है। कांग्रेस ने सितंबर में कई राज्यों के प्रभार और संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव किए हैं।
अब आगे क्या
एआईसीसी सचिवों के चयन की प्रक्रिया में इंटरव्यू और आंतरिक समीक्षा का चरण आगे बढ़ चुका है। रिपोर्टों में करीब 25 से 30 नामों को अंतिम स्तर पर चुने जाने की संभावना जताई गई है। अंतिम नियुक्तियां पार्टी नेतृत्व के फैसले और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी।
कांग्रेस के लिए असली चुनौती केवल चेहरों को बदलना नहीं है। संगठन में जवाबदेही, प्रदर्शन की नियमित समीक्षा और राज्यों में प्रभावी समन्वय को संस्थागत रूप देना भी उतना ही जरूरी होगा।
कांग्रेस में चल रही एआईसीसी सचिवों की चयन प्रक्रिया पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव का संकेत देती है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल की सक्रिय भागीदारी से यह साफ है कि केंद्रीय नेतृत्व नई टीम के चयन को गंभीरता से ले रहा है।
फिलहाल करीब आधे मौजूदा सचिवों की निश्चित विदाई या 130 नए चेहरों की अंतिम नियुक्ति को तय तथ्य मानना उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी चयन प्रक्रिया और संभावित बदलाव की ओर इशारा करती है। अंतिम तस्वीर कांग्रेस की आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।