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काशी में योगी का बड़ा ऐलान, आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को मिलेंगी दो यूनिफॉर्म

Wasi Siddiqui • 2026-09-09 15:49:58
काशी में योगी का बड़ा ऐलान, आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को मिलेंगी दो यूनिफॉर्म

काशी में राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ के बीच आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की सुविधाओं पर फोकस बढ़ा है। सरकार यूनिफॉर्म समेत प्रारंभिक शिक्षा और पोषण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

📍 वाराणसी, उत्तर प्रदेश
🗓️ 09 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui

काशी से पोषण अभियान को नई दिशा देने की कोशिश

वाराणसी में राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की शुरुआत के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर फिर से फोकस आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों की शुरुआती शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया।

रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में आयोजित कार्यक्रम के साथ राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत हुई। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने अभियान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इस वर्ष अभियान की थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है।

आंगनबाड़ी बच्चों के लिए यूनिफॉर्म पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालिया कार्यक्रमों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार के कदमों का उल्लेख किया है। इसी क्रम में आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों की यूनिफॉर्म और दूसरी आवश्यक सुविधाओं को लेकर भी व्यवस्था मजबूत करने की बात सामने आई है।

उत्तर प्रदेश में परिषदीय शिक्षा व्यवस्था के तहत बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था पहले से संचालित है। वाराणसी में अप्रैल 2026 में स्कूल चलो अभियान के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था का उल्लेख करते हुए अभिभावकों के खातों में डीबीटी के जरिए धनराशि भेजने की बात कही थी।

आंगनबाड़ी व्यवस्था को प्री-प्राइमरी शिक्षा से जोड़ने की तैयारी

सरकार की नीति में आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण के केंद्र के तौर पर नहीं, बल्कि शुरुआती बाल शिक्षा के महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में विकसित करने पर जोर दिखाई देता है। प्रदेश में बाल वाटिका और प्री-प्राइमरी शिक्षा की व्यवस्था को भी इससे जोड़ा जा रहा है।

सितंबर 2026 में जारी विभागीय जानकारी के मुताबिक पीएम श्री विद्यालय परिसरों में संचालित को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बाल वाटिकाओं के बच्चों को यूनिफॉर्म तथा जूता-मोजा उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसके लिए अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए राशि भेजने की योजना बताई गई है।

अंबेडकरनगर से भी सामने आया डीबीटी मॉडल

अंबेडकरनगर में पीएम श्री विद्यालय परिसरों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को डीबीटी योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। पहले चरण में 20 पीएम श्री स्कूलों से जुड़े करीब 300 बच्चों को शामिल किए जाने की बात कही गई है।

इस व्यवस्था में 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर और स्कूल बैग जैसी जरूरतों के लिए अभिभावकों के बैंक खातों में 1200 रुपये भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

राष्ट्रीय पोषण माह का बड़ा एजेंडा

काशी में शुरू हुआ राष्ट्रीय पोषण माह केवल यूनिफॉर्म तक सीमित नहीं है। अभियान का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और शुरुआती बाल विकास को मजबूत करना है।

इस अभियान के तहत समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था, बच्चों को मिलने वाले भोजन और उनके विकास की निगरानी में स्थानीय स्तर की समितियों और मातृ समितियों की भूमिका बढ़ाने की योजना है।

छोटे बच्चों के विकास पर विशेष निगरानी

राष्ट्रीय पोषण माह 2026 में 0 से 3 वर्ष तक के बच्चों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर अभिभावकों को उत्तरदायी देखभाल और उम्र के अनुरूप गतिविधियों की जानकारी देने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

तीन वर्ष तक के बच्चों के विकासात्मक पड़ाव दर्ज करने और विकास संबंधी समस्या वाले बच्चों को स्वास्थ्य विभाग के जरिए आगे की जांच तथा हस्तक्षेप से जोड़ने की व्यवस्था पर भी जोर है।

3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा

आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए खेल आधारित गतिविधियों और शुरुआती शिक्षा को बढ़ावा देने की योजना है। इसका मकसद बच्चों को प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश से पहले सीखने के लिए तैयार करना है।

इस दिशा में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा दिवस, खेल-शिक्षण सामग्री और सरकारी प्राथमिक विद्यालयों से परिचय जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अयोध्या से पहले ही हुई थीं कई घोषणाएं

काशी कार्यक्रम से एक दिन पहले अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए कई घोषणाएं की थीं। इनमें मानदेय बढ़ाने, कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और यूनिफॉर्म से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल थीं।

रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये और सहायिकाओं का मानदेय 4000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये करने की घोषणा की। कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के लिए हर साल 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा की बात भी सामने आई।

यूनिफॉर्म को लेकर एक जरूरी अंतर

यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की यूनिफॉर्म अलग व्यवस्था है, जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों की यूनिफॉर्म अलग विषय है।

केंद्र सरकार के स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए सालाना दो यूनिफॉर्म का प्रावधान पहले से दर्ज है।

बच्चों के मामले में मौजूदा व्यवस्था को स्थानीय और योजना आधारित स्तर पर लागू किया जा रहा है। इसलिए दो यूनिफॉर्म की सुविधा को प्रदेश के हर आंगनबाड़ी बच्चे के लिए एक समान रूप से लागू हो चुकी व्यवस्था बताना फिलहाल उचित नहीं होगा। उपलब्ध सूचनाओं में पीएम श्री परिसरों से जुड़े आंगनबाड़ी और बाल वाटिका बच्चों के लिए डीबीटी आधारित व्यवस्था स्पष्ट रूप से सामने आती है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल

आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चे सामान्य तौर पर शुरुआती बाल्यावस्था के दौर में होते हैं। इस उम्र में पोषण के साथ सीखने का माहौल, नियमित उपस्थिति और बुनियादी सुविधाएं उनके आगे के शैक्षणिक सफर पर असर डालती हैं।

यूनिफॉर्म जैसी सुविधा बच्चों में एकरूपता और संस्थागत पहचान बढ़ा सकती है। लेकिन इसका वास्तविक असर तभी दिखेगा जब ड्रेस के साथ पोषण, शिक्षण सामग्री, प्रशिक्षित कार्यकर्ता, सुरक्षित भवन, साफ पानी और नियमित स्वास्थ्य निगरानी भी सुनिश्चित हो।

जमीनी स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती

सरकारी योजना की सफलता केवल घोषणा से तय नहीं होती। असली कसौटी क्रियान्वयन है। बच्चों की संख्या का सही रिकॉर्ड, पात्रता का सत्यापन, बैंक खातों की जानकारी, डीबीटी की समयबद्धता और सामग्री की गुणवत्ता जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।

इसके साथ यह भी देखना होगा कि जिन केंद्रों में भवन, पेयजल, शौचालय या शिक्षण सामग्री की कमी है, वहां केवल यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने से बच्चों के लिए पूरा शैक्षणिक माहौल तैयार नहीं होगा।

सरकार की व्यापक रणनीति

उत्तर प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिक शिक्षा से पहले की तैयारी के महत्वपूर्ण चरण के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। अप्रैल 2026 में वाराणसी से स्कूल चलो अभियान के दौरान भी बाल वाटिका और आंगनबाड़ी को शुरुआती शिक्षा से जोड़ने की दिशा में सरकार की प्राथमिकता सामने आई थी।

राष्ट्रीय पोषण माह 2026 में इसी सोच को पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और सामुदायिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

आगे क्या होगा

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि यूनिफॉर्म और अन्य सुविधाओं से जुड़े फैसलों को प्रदेश के कितने आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि लाभार्थी बच्चों की पहचान और डीबीटी प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है।

काशी से शुरू हुआ राष्ट्रीय पोषण माह इस बात का संकेत देता है कि शुरुआती बाल विकास को नीति के केंद्र में रखने की कोशिश जारी है। बच्चों को यूनिफॉर्म देना इस प्रयास का एक हिस्सा है। इसकी वास्तविक कामयाबी पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और केंद्रों की जमीनी गुणवत्ता में एक साथ सुधार से तय होगी।

वीडियो देखें

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Wasi Siddiqui

Wasi Siddiqui

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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