क्रूड ऑयल प्राइस में 7% गिरावट के बाद हल्की रिकवरी हुई है। US-ईरान जंग के बीच सप्लाई रिस्क के बावजूद ब्रेंट 85 डॉलर से नीचे बना हुआ है। मार्केट में अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव जारी है।
📍 लंदन / न्यूयॉर्क
📰 4 अगस्त 2026
✍️ By Mohd Haris
क्रूड ऑयल प्राइस में हाल के दिनों में तेज़ उतार-चढ़ाव देखा गया है। सात प्रतिशत गिरावट के बाद अब कीमतों में हल्की रिकवरी आई है। इसके बावजूद ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ है।
यह बदलाव ऐसे समय पर आया है जब US-ईरान जंग ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती गिरावट के बाद ऑयल मार्केट ने कुछ स्थिरता दिखाई। ट्रेडर्स ने सप्लाई रिस्क और जियोपॉलिटिकल संकेतों को फिर से आंका।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 85 डॉलर के नीचे रहने से यह संकेत मिलता है कि फिलहाल मार्केट में पैनिक खरीदारी नहीं है।
एनालिस्ट्स का मानना है कि यह रिकवरी तकनीकी करेक्शन का हिस्सा भी हो सकती है।
मध्य पूर्व में US और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इस उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह है।
होर्मुज़ स्ट्रेट वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। यहां किसी भी सैन्य गतिविधि से मार्केट तुरंत प्रतिक्रिया देता है।
हाल के घटनाक्रम में शिपिंग रिस्क और संभावित सप्लाई डिसरप्शन की आशंका बनी हुई है।
पिछले हफ्ते ऑयल प्राइस में करीब 7% की गिरावट दर्ज हुई।
इसके बाद मार्केट में धीरे-धीरे रिकवरी देखी गई।
हालिया ट्रेडिंग सेशन में कीमतों ने स्थिरता की ओर संकेत दिया।
क्रूड ऑयल प्राइस का असर सीधे ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ता है।
• ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती या घटती है
• महंगाई पर असर पड़ता है
• एनर्जी सिक्योरिटी प्रभावित होती है
इसलिए कीमतों का हर उतार-चढ़ाव व्यापक प्रभाव डालता है।
कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि मार्केट ने जियोपॉलिटिकल रिस्क को पहले ही प्राइस में शामिल कर लिया है।
दूसरी तरफ, कुछ विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है।
इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।
हालांकि जंग की स्थिति गंभीर है, लेकिन अभी तक सप्लाई में बड़ा व्यवधान नहीं आया है।
यही वजह है कि कीमतें नियंत्रित दायरे में बनी हुई हैं।
यदि होर्मुज़ में वास्तविक बाधा आती है, तो स्थिति तेजी से बदल सकती है।
ऑयल प्राइस में स्थिरता से कुछ राहत मिलती है।
लेकिन अनिश्चितता बनी रहने से निवेशक सतर्क हैं।
इन्फ्लेशन और ग्रोथ आउटलुक पर इसका असर पड़ सकता है।
एनर्जी मार्केट का यह उतार-चढ़ाव वैश्विक स्तर पर असर डालता है।
यूरोप और एशिया दोनों क्षेत्र सप्लाई पर निर्भर हैं।
इसलिए जियोपॉलिटिकल घटनाएं सीधे अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आगे भी वोलैटिलिटी बनी रहेगी।
जंग की दिशा और डिप्लोमैटिक प्रयास कीमतों को प्रभावित करेंगे।
मार्केट फिलहाल इंतजार की स्थिति में है।
क्रूड ऑयल प्राइस में हालिया रिकवरी राहत का संकेत है, लेकिन जोखिम खत्म नहीं हुआ है।
US-ईरान तनाव और सप्लाई चिंता आगे भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
आने वाले दिनों में मार्केट की दिशा पूरी तरह जियोपॉलिटिकल घटनाओं पर निर्भर रहेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।